चेन्नई के शोलिंगनल्लूर इलाके में इंसानियत की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया और कई सवाल भी खड़े कर दिए. जहां एक तरफ किसी पत्थर दिल ने एक नवजात को जन्म के कुछ ही देर बाद अकेला किस्मत के हवाले छोड़ दिया, तो वहीं दूसरी तरफ दरियादिली की मिसाल पेश करते हुए कुछ लोगों की बुद्धिमानी और संवेदनशीलता ने उस मासूम को नई जिंदगी दे कर उसकी जान बचा ली.
रोने की आवाज सुन सहमीं सफाईकर्मी
घटना उस समय की है जब आविन डिपो के पास रात की ड्यूटी कर रहीं दो महिला सफाईकर्मी अपने काम में जुटी थीं. तभी उन्हें पास के एक सार्वजनिक शौचालय से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी. पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब आवाज देर तक और लगातार आने लगी तब दोनों महिलाएं सोचने पर मजबूर हो गईं. थोड़ा सोचने के बाद वह तुरंत वहां पहुंचीं, जहां से रोने की आवाज आ रही थी.
जैसे ही सफाईकर्मियों ने शौचालय के अंदर देखा, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. वहां एक नवजात बच्चा अकेला पड़ा था. रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा लग रहा था कि बच्चे को जन्म के तुरंत बाद ही छोड़ दिया गया था. हालत ऐसी थी कि जन्म के बाद उसे ठीक से साफ तक नहीं किया गया था. खून असके शरीर पर वैसे ही लगा था. इतना ही नहीं छोड़ने वाले के दिल इतना सख्त था कि उसने बच्चे को ऐसे ही एक नीले रंग की छत ढकने वाली प्लास्टिक की चादर में लपेटकर छोड़ दिया था. यह दृश्य देखकर दोनों महिलाएं घबरा गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बिना देर किए चेम्मनचेरी पुलिस को सूचना दी.
पुलिस ने दिखाई फुर्ती, समय रहते पहुंचाया अस्पताल
सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर राजशेखर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. नवजात की हालत गंभीरता से लेते हुए, प्राथमिक उपचार के लिए फुर्ती दिखाई. पुलिस ने देखा कि बच्चा अभी-अभी जन्मा था और उसे तत्काल मेडिकल मदद की जरूरत थी. ऐसे में टीम ने बिना वक्त गंवाए बच्चे को तुरंत पास के एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी प्राथमिक देखभाल शुरू की.
बेहतर इलाज के लिए एग्मोर चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल भेजा
हालांकि जरूरी उपचार के बाद बच्चे के बेहतर इलाज और देखभाल के लिए108 नंबर पर कॉल कर एम्बुलेंस को बुलाया गया. नवजात को तुरंत इनक्यूबेटर सपोर्ट की मदद से चेन्नई के एग्मोर चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल भेजा गया, ताकि उसे जरूरी इलाज और सुरक्षित देखभाल मिल सके. फिलहाल पुलिस बच्चे के परिजनों का पता लगाने में जुटी है, ताकि ये पता चल सके कि बच्चे को इस हालात में छोड़ने के पीछे रिश्तेदारों की क्या मजबूरी थी.
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