hemant soren
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झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की अगुवाई में इंडिया गठबंधन (INDIA) ने झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Elections 2024) में जोरदार जीत दर्ज की है. इस खबर के लिखे जाने तक इंडिया गठबंधन झारखंड में 18 सीटें जीत चुका है. जबकि 39 पर उसने बढ़त बना ली है.
झारखंड में जहां बहुमत के लिए 42 सीटों की जरूरत होती है वहां जेएमएम का अकेले 34 सीटें जीतना और इंडिया गठबंधन की झोली में 57 सीटें आना इस बात का प्रमाण है कि सोरेन सरकार ने कथित सत्ता-विरोधी लहर को मजबूती से मात दी है. झारखंड विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ऐसा कैसे कर सके, आइए डालते हैं एक नजर.
आदिवासी अस्मिता रही निर्णायक
सबसे पहले बात करते हैं जेएमएम के चुनाव प्रचार की. इस साल की शुरुआत में जब हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने गिरफ्तार किया था तो उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री के पद से भी इस्तीफा देना पड़ा था. सोरेन करीब छह माह तक जेल में बंद रहे. यही समय साल के अंत में हुए चुनाव का केंद्र बन गया. और 'आदिवासी अस्मिता' चुनाव पर छा गई.
ध्यान देने वाली बात है कि कुछ माह पहले हुए लोकसभा चुनाव में भी आदिवासी समाज ने बीजेपी के खिलाफ वोट किया था. झारखंड की पांचों अनुसूचित जनजाति (ST) सीटों पर एनडीए को हार मिली थी. जेएमएम इस बार फिर अपने मूलनिवासी नेता हेमंत सोरेन के चेहरे पर लड़ी, और कामयाब रही. बीजेपी ने भी चंपई सोरेन और सीता सोरेन जैसे नेताओं को अपनी ओर कर आदिवासी वोट साधने की कोशिश की लेकिन उसका यह पैंतरा नाकाम रहा.
सिम्पथी वोट साधने में कामयाब हुए सोरेन
हेमंत सोरेन के जेल जाने से यह भी हुआ कि वह झारखंड की जनता की सहानुभूति के पात्र बन गए. बीजेपी ने जेएमएम के पिछले पांच साल के प्रदर्शन पर कई बार चुनाव का रुख मोड़ना चाहा लेकिन जेल से लौटे मुख्यमंत्री सोरेन इसे 'हेमंत सोरेन बनाम बीजेपी' का चुनाव बनाने में कामयाब रहे. यहां एक बार फिर सोरेन ने इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी एक आदिवासी नेता का हरासमेंट कर रही है. और यह नीति कारगर साबित हुई.
महिला वोटरों ने पलटी बाज़ी
बीते कुछ विधानसभा चुनावों के पैटर्न को फॉलो करते हुए झारखंड चुनाव भी महिला वोटरों के फैसले से प्रभावित हुए. मतदान के पहले दौर में जहां 64.27 प्रतिशत पुरुषों ने वोट किया था, वहीं 69.04 प्रतिशत महिलाएं पोलिंग बूथ पहुंची थीं. चुनाव आयोग के अनुसार राज्य की 81 सीटों में से 68 पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया.
इंडिया अलायंस जहां इन आंकड़ों को पिछले कार्यकाल की नीतियों का नतीजा बता रहा था, वहीं एनडीए यह दावा कर रहा था कि यह सत्ता-विरोधी लहर का नतीजा है. नतीजे आने पर शायद यह साफ हो गया है कि महिलाओं का मत किस ओर झुका. दरअसल विशेषज्ञों की मानें तो सोरेन सरकार की 'मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना' (Mukhyamantri Maiya Samman Yojna) उन्हें दूसरी बार जीत दिलाने में अहम रही है.
इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए की राशि बैंक अकाउंट में दी जाती है. सोरेन सरकार ने इस योजना को अपने चुनाव प्रचार के अहम पहलुओं में से एक बनाया. और नतीजा सामने है.
नहीं चला बीजेपी का 'घुसपैठिया' दांव
भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान सोरेन सरकार पर एक संगीन आरोप लगाया. बीजेपी ने दावा किया कि सोरेन सरकार राज्य में 'घुसपैठियों' को आने दे रही है. जबकि ये घुसपैठिये झारखंड के मूलनिवासियों की जल-जंगल-जमीन हड़प रहे हैं. बीजेपी ने इससे जुड़ा एक विवादित विज्ञापन भी जारी किया जिसे बाद में चुनाव आयोग के आदेश के बाद हटाया गया.
बीजेपी ने अपनी रैलियों में लगातार यह बात कही कि सोरेन सरकार की नाकामियों की वजह से झारखंड की माटी, बेटी और रोटी खतरे में है. लेकिन जब सोरेन ने महिला और आदिवासी वोट साध लिए तो बीजेपी का यह दांव फीका पड़ गया. विशेषज्ञों की मानें तो आदिवासी अस्मिता और मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना बीजेपी के इस दांव को असफल करने में अहम साबित हुई है.