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सुपौल में पूर्ववर्ती छात्र, अधिकारी, सांसद और विधायक एक साथ मिले तो बदल रही है बिहार के इस स्कूल की तस्वीर

किसी भी स्कूल में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत होती है. इसलिए इस काम के लिए सबसे पहले इसी स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों की संस्था 'जवाहर प्रेम लाल फॉउंडेशन' जो कि इलाके में शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है. 6 महीने में ही इस सरकारी स्कूल का कायाकल्प हो चुका है.

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देश में सरकारी शिक्षा का स्तर किसी से छिपा नही है, वैसे सरकार द्वारा शिक्षा का निरंतर सुधार का प्रयास जारी है लेकिन अपेक्षा के अनुसार परिणाम नहीं मिल पाता है. अब बिहार के सुपौल जिले के एक सरकारी स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों ने ऐसा उदाहरण पेश किया है जो पूरे राज्य और देश के लिए अनुकरणीय है. जिले के जवाहर प्रेम लाल उच्च माध्यमिक विद्यालय, बसहा के बच्चों के शैक्षणिक मदद के लिए इस स्कूल के सफल पूर्ववर्ती छात्रों ने अपने स्कूल को मदद देने की ठान ली है.

ऐसे बदल रही तस्वीर

किसी भी स्कूल में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत होती है. इसलिए इस काम के लिए सबसे पहले इसी स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों की संस्था 'जवाहर प्रेम लाल फॉउंडेशन' जो कि इलाके में शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है, साथ ही "टीम लेटस इंस्पायर बिहार" संस्था का भी खूब साथ मिला, लेकिन बड़ी सफलता तब मिली जब इस क्षेत्र के सांसद, विधायक और अधिकारी इस संस्था के पहल पर सब एक साथ मदद करने को साथ आगे आए. इसके लिए 6 महीने पूर्व अप्रैल माह में इसी सरकारी स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों द्वारा बिहार का पहला "स्कूल कॉन्क्लेव" का आयोजन किया गया था जिसमें राज्य और जिले कई वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस, प्रेरक वक्ताओं और स्थानीय सांसद एवं विधायक ने भाग लिया था, खासकर बिहार के तत्कालीन गृह सचिव विकास जी का स्कूल में आगमन हुआ था. इसके बाद ही बच्चों में शैक्षणिक सुधार और स्कूल का काया कल्प होना शुरू हो गया. किसी सरकारी स्कूल में उनके पूर्ववर्ती छात्रों द्वारा उस स्कूल में वहां पढ़ रहे बच्चों को किए जा रहे मदद के प्रयास के लिए एक केस स्टडी है.

स्कूल में इंफ्रास्ट्रक्चर के सुधार के लिए इलाके के सांसद दिलेश्वर कमैत ने अपने निधि से 55 साल से बिना बॉउंड्री वॉल वाले स्कूल में 15 लाख रुपये से बॉउंड्री वॉल निर्माण के प्रक्रिया की शुरुआत की तो वहीं स्थानीय विधायक श्री रामविलास कामत ने अपने निधि से बच्चों व्यक्तित्व विकास के लिए 10 लाख रुपये की लागत से एक भव्य रंगमंच बनवा दिया. इस सामूहिक प्रयास में पूर्ववर्ती छात्रों के अलावा स्कूल के शिक्षक और बिहार के आला अधिकारी भी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के लिए मेंटर का काम लगातार कर रहे हैं. इसी क्रम में इस स्कूल में "स्कूल के मेंटर" कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें जिले के उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और स्थानीय विधायक छात्रों के बीच आकर उनका मनोबल बढ़ाने का काम किया.

school in Bihar!

छात्र भी अपने बीच इलाके के बड़े अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं अपने सीनियर को पाकर फुले नहीं समाए और उनके जैसे बनने के लिए सवाल जवाब किए. इलाके में शैक्षणिक सुधार के लिए संस्था "जवाहर प्रेम लाल फॉउंडेशन" के महासचिव डॉक्टर प्रमोद कुमार का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम से छात्रों का उत्साह और मनोबल काफी बढ़ा है और बच्चों में अप्रत्याशित सुधार देखने को मिल रहा है, हम बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए हम सब हमेशा तत्पर है, शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए पूर्ववर्ती छात्रों की टीम अलग अलग तरह के कंटेट तैयार करने में लगे है, जिससे अधिक से अधिक कमजोर वर्ग के बच्चों को फायदा मिल सके और उसे आसानी से समझ में आ सकें.

6 महीने में ही इस सरकारी स्कूल का कायाकल्प हो चुका है. इसमें पूर्ववर्ती छात्रों की संस्था "जवाहर प्रेम लाल फॉउंडेशन" के द्वारा 1.5 किमी तक फाइबर केबल बिछाकर इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाया गया है ताकि स्कूल के छात्र तकनीक की सहयाता लेकर जीवन में आगे बढ़ सके, साथ ही साफ पानी, स्कूल प्रशाशन के द्वारा 2 नए टायलेट का निर्माण, कंप्यूटर और साइंस लैब तक शामिल है. इस सामूहिक प्रयास में एक तरह से नई शिक्षा नीति में सुझाए गए सभी मापदंडों को शामिल करने का प्रयास किया गया है, ताकि बच्चें अपने अपने जीवन में एक ऊंची उड़ान ले सके.

-सुपौल से रामचंद्र मेहता की रिपोर्ट