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इस फैक्ट्री में रूढ़िवादी सोच को तोड़ रही महिलाएं , बाइक्स वेल्डिंग से लेकर बाइक मैन्युफैक्चरिंग तक का संभाल रही काम

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर जयसुख पटेल बताते हैं कि वैसे तो आम तौर पर आपने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में पुरुषों को ही काम करते हुए देखा होगा, लेकिन हमारे यहां लड़कियां भी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं.

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Women are breaking the orthodox thinking in this factory Women are breaking the orthodox thinking in this factory

लड़कियों को बाइक चलाते हुए तो आप सबने देखा ही होगा, लेकिन गुजरात के कच्छ के भचाऊ गांव में एक ऐसी फैक्ट्री भी है जहां पर ई बाइक बनाने का काम लड़कियां कर रहीं हैं. भचाऊ में ओरेवा ग्रुप की ई बाइक बनाने की कंपनी है. इस कंपनी में बाइक्स को मैन्युफैक्चर करने का काम किया जाता है. खास बात यह है कि इन बाइक्स को लड़कियां ही मैन्युफैक्चर कर रही हैं. वेल्डिंग से लेकर फाइनल फिक्सिंग तक के सारे काम महिलाएं ही करती हैं. इस फैक्टरी में लगभग 250 लड़कियां है जो गाड़ियां बनाने का काम कर रही हैं. यह लड़कियां कच्छ के दूर -दूर के गांवों से आती हैं, आज ये लड़कियां खुद के पैरों पर तो खड़ी ही हैं अपने परिवार की भी जिम्मेदारियां उठा रही हैं. 

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कदम से कदम मिलाकर चल रही लड़कियां 

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर जयसुख पटेल बताते हैं कि वैसे तो आम तौर पर आपने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में पुरुषों को ही काम करते हुए देखा होगा, लेकिन हमारे यहां लड़कियां भी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं. हमारा मकसद शुरू से ही यही था कि कैसे ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को रोजगार दे. यह हमारी ही सोच है कि लड़कियां यह काम नहीं कर सकती हैं और हमने हर काम को महिला और पुरुषों में बांट रखा है. लेकिन हमें खुशी है कि हम इस सोच को बदल रहे हैं. 

दूसरी लड़कियों के लिए बना प्रेरेणा का स्त्रोत

इसी फैक्ट्री में काम करने वाली भावना बताती हैं कि उन्हें शुरुआत में यहां आकर यह सब देखकर थोड़ा अजीब जरूर लगा था. लेकिन जैसे-जैसे ट्रेनिंग लेती रही वैसे वैसे उन्हें काम आता गया.

वे कहती हैं कि अब गांव की दूसरी लड़कियां भी उनके इस काम को देखकर उनसे प्रेरणा लेती हैं और उनके जैसा बनना चाहती हैं.