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अगर आपने कभी होटल में ठहरने या ट्रेन में सफर किया है, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. ज्यादातर जगहों पर बिस्तर पर सफेद चादर ही बिछी होती है. रंगीन चादरें बहुत कम देखने को मिलती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर सफेद चादर का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है. क्या यह सिर्फ देखने में अच्छी लगती है या इसके पीछे कोई और वजह भी है? सच यह है कि सफेद चादर चुनने के पीछे कई कारण होते हैं.
सफेद चादर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उस पर धूल, दाग या गंदगी तुरंत दिखाई देती है. इससे होटल और रेलवे के कर्मचारियों को भी आसानी से पता चल जाता है कि चादर पूरी तरह साफ है या नहीं. अगर उस पर हल्का सा भी दाग दिख जाए, तो उसे दोबारा धोया जाता है या नई चादर बिछा दी जाती है.
होटलों और ट्रेनों में हर दिन बड़ी संख्या में चादरों की धुलाई होती है. सफेद चादरों को एक साथ मशीन में धोया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर उन पर ब्लीच का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे जिद्दी दाग आसानी से निकल जाते हैं. अगर रंगीन चादरों पर ब्लीच का इस्तेमाल किया जाए, तो उनका रंग फीका पड़ सकता है. यही वजह है कि सफेद चादरों को साफ रखना ज्यादा आसान और सस्ता पड़ता है.
रंगों का असर हमारे मन पर भी पड़ता है. सफेद रंग को साफ-सफाई, शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है. जब कोई व्यक्ति सफेद चादर वाला बिस्तर देखता है, तो उसे वह ज्यादा साफ और आरामदायक लगता है. इससे मन को सुकून मिलता है और ठहरने का अनुभव भी बेहतर बन जाता है. यही कारण है कि बड़े और लग्जरी होटल भी सफेद चादरों को ही पसंद करते हैं.
अगर होटल या रेलवे अलग-अलग रंगों की चादरें इस्तेमाल करें, तो उन्हें अलग-अलग धोना पड़ेगा. इससे समय, मेहनत और खर्च तीनों बढ़ जाएंगे. सफेद चादरों के साथ यह परेशानी नहीं होती. सभी चादरों को एक साथ धोया जा सकता है, जिससे काम आसान हो जाता है. इसके अलावा सफेद रंग रोशनी को अच्छी तरह लौटाता है, जिससे होटल का कमरा या ट्रेन का केबिन ज्यादा उजला और साफ दिखाई देता है.