कथावाचक ने लंका में हनुमान जी के प्रवेश और माता जानकी की खोज के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया. उन्होंने बताया कि रावण के महल से लेकर लंका के विभिन्न भवनों में तलाश के बाद हनुमान जी को विभीषण का आवास दिखा, जहां तुलसी का पौधा और राम नाम अंकित था. विभीषण के जागने और 'राम-राम' सुमिरन करने पर दोनों के बीच आत्मीय संवाद हुआ. कथा में स्पष्ट किया गया कि हनुमान जी ने पहले प्रभु श्रीराम की कथा सुनाई और बाद में अपना परिचय दिया. इसके साथ ही दैनिक जीवन में प्रातः काल ईश्वर स्मरण, माता-पिता के सम्मान और जीभ पर नियंत्रण रखने के नैतिक संदेश भी साझा किए गए.