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2050 तक पिघल जाएंगे दुनिया के एक तिहाई ग्लेशियर, UNESCO ने दी चेतावनी

यूनेस्को (UNESCO) की रिपोर्ट के अनुसार हर साल 58 बिलियन टन बर्फ पिघल रही है. जिसे देखते यूनेस्को ने चेतावनी देते हुए कहा कि हमने अगर CO2 उत्सर्जन के स्तर में कमी नहीं लाया गया तो 2050 तक 50 विश्व धरोहर स्थलों में से एक तिहाई ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल जाएंगे.

Glacier Glacier
हाइलाइट्स
  • 50 विश्व धरोहर स्थलों में से एक तिहाई में ग्लेशियर 2050 तक गायब हो सकते हैं

  • किलिमंजारो नेशनल पार्क और माउंट केन्या ग्लेशियर शामिल

कई ग्लेशियर 2050 तक पूरी तरह से पिघल जाएंगे. इसके बारे में यूनेस्को (UNESCO) अपनी एक रिपोर्ट में बताया है. यूनेस्को के अनुसार येलोस्टोन और किलिमंजारो नेशनल पार्क सहित कई विश्व धरोहर स्थलों के ग्लेशियर 2050 तक पूरी तरह से पिघल जाएंगे. इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने गुरुवार को चेतावनी देते हुए बाकी ग्लेशियर को को बचाने के लिए तेजी से कार्य करने का आग्रह किया है. 

2050 तक गायब हो सकते हैं एक तिहाई ग्लेशियर
यूनेस्को के मुताबिक एक अध्ययन में पता चला है कि ग्लेशियर CO2 उत्सर्जन के कारण 2000 से त्वरित दर से पिघल रहे हैं. जिसके चलते तापमान और भी तेजी से गर्म हो रहा है. इस अध्ययन में ये भी बताया गया है कि हर साल 2000 से त्वरित दर से बर्फ पिघल रही है. जिसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि 50 विश्व धरोहर स्थलों में से एक तिहाई में ग्लेशियर 2050 तक गायब हो सकते हैं. यूनेस्को की तरफ से आगे बताया गया है कि अगर तापमान में वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होती है, तो शेष दो तिहाई स्थलों में ग्लेशियर को बचाया जा सकता है. 

पूरी तरह पिघल सकते हैं यहां के ग्लेशियर 
यूनेस्कों के रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीका में, सभी विश्व धरोहर स्थलों में ग्लेशियर 2050 तक पूरी तरह पिघल जाएंगे. जिसमें किलिमंजारो नेशनल पार्क और माउंट केन्या शामिल हैं. इसके साथ ही यूरोप में, पाइरेनीज़ और डोलोमाइट्स में कुछ ग्लेशियर भी शायद तीन दशकों के बाद पूरी तरह से गायब हो जाएंगे. यहीं नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में येलोस्टोन और योसेमाइट राष्ट्रीय उद्यानों में ग्लेशियरों का भी हाल हो सकता है. 

7 नवंबर को COP 27 जलवायु शिखर सम्मेलन
मिस्र में सोमवार से शुरू होने वाले COP 27 जलवायु शिखर सम्मेलन से पहले यूनेस्को प्रमुख ऑड्रे अज़ोले ने कहा कि कई ग्लेशियर का 2050 तक पूरी तरह पिघलने वाली रिपोर्ट हमें सीधा संकेत देती है कि CO2 उत्सर्जन के स्तर में तेजी से कमी लानी होगी. ताकि असाधारण जैव विविधता को बचाया जा सके. इस मुद्दे के समाधान खोजने में मदद करने के लिए COP27 की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.