सनातन धर्म में किसी भी पूजा या अनुष्ठान से पहले संकल्प लेने का विशेष महत्व है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, बिना संकल्प के की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। संकल्प के दौरान व्यक्ति अपना नाम, गोत्र, स्थान और मनोकामना का उच्चारण करता है, जिससे पूजा का उद्देश्य स्पष्ट होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य और संकल्प में सबसे पहले उनका ध्यान किया जाता है। इसके साथ ही पूजा के कुछ विशेष नियम भी होते हैं। दीपक, शिवलिंग, शालिग्राम और शंख जैसी पवित्र वस्तुओं को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। पूजा के बाद देवी-देवताओं की परिक्रमा या प्रदक्षिणा करने का भी विधान है। परिक्रमा हमेशा दाहिने हाथ की ओर से शुरू करनी चाहिए। हर देवी-देवता की परिक्रमा की संख्या अलग-अलग होती है, जैसे सूर्य देव की सात, श्री गणेश और भगवान विष्णु की चार, हनुमान जी की तीन और शिवजी की आधी परिक्रमा की जाती है। दान का संकल्प लेने के बाद उसे समय पर पूरा करना चाहिए।