‘प्रार्थना हो स्वीकार’ कार्यक्रम में मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ता ने बताया कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का भी कल्याण होता है। कार्यक्रम में कहा गया, 'जीवन मृत्यु के बंधनों से उठकर ईश्वरीय ऊर्जा में विलीन होने की कामना हर कोई करता है।' इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, गीता का पाठ और दान करने की सलाह दी गई है। साथ ही, व्रत के दौरान चावल, मांस और मदिरा के सेवन से बचने और सात्विक जीवन जीने पर जोर दिया गया है।