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Shri Hari को Narayan क्यों कहा जाता है ? जानें शेषनाग पर शयन और गुरुवार पूजा का रहस्य

धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना जाता है. पुराणों में उनके दो रूप बताए गए हैं, जिनमें से एक में वे क्षीर सागर में काल स्वरूप शेषनाग पर शांत भाव से विराजमान हैं. जल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पैरों से हुई है और जल को 'नर' भी कहा जाता है. जल में निवास करने के कारण ही उनका नाम 'नारायण' पड़ा. वहीं, 'हरि' का अर्थ है पापों और कष्टों को हरने वाला, इसलिए सच्चे मन से स्मरण करने पर श्री हरि सभी दुखों को दूर करते हैं. गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है. इस दिन स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर, पीले फूलों से उनकी पूजा करनी चाहिए. श्री हरि के सामने घी का दीपक जलाकर 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ओम नमो नारायणाय' मंत्र का जाप करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.