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प्रार्थना हो स्वीकार

यहां गिरा था मां सती का दायां नेत्र, देखें प्रार्थना हो स्वीकार

21 अक्टूबर 2021

हिंदू धर्मग्रंथों में शक्तिपीठों को मां दुर्गा का सिद्धपीठ माना गया है. ऐसा ही एक शक्तिपीठ बिहार के सासाराम में है. माता का ये धाम ताराचंडी मंदिर के नाम से विख्यात है. 51 शक्तिपीठों में से एक मां ताराचंडी मंदिर सासाराम से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर कैमूर पहाड़ी की गुफा में बना है. वैसे तो माता के ताराचंडी भवानी धाम में साल भर लाखों भक्त आते है. लेकिन सावन और चैत्र नवरात्र में माता के दर पर श्रृद्धालुओं की भक्ति चरम पर होती है. माता ताराचंडी के इस धाम में माता सती के दाएं नेत्र के गिरने की मान्यता है. देखें प्रार्थना हो स्वीकार.

शाम को पेड़-पौधों से फूल, पत्ते क्यों नहीं तोड़ने चाहिए, जानें

20 अक्टूबर 2021

पेड़-पौधों से फूल, पत्ते तोड़ने की हमको ऐसी आदत हो गई है कि कभी-कभी लगता है कि हम वाकई भूल गए हैं कि इनमें भी जान होती है. साइंस ने तो पहले ही पेड़-पौधों को लिविंग की श्रेणी में रख रखा है. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भी पेड़-पौधों में प्राण होते हैं. अतः दिनभर में शाम का समय ऐसा माना गया है जब हमें पेड़-पौधों से फूल, पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. यह भी माना जाता है कि शाम को पीपल के पेड़ के पास नहीं जाना चाहिए और न ही उसके पत्ते तोड़ने चाहिए क्योंकि पीपल के पेड़ भगवान नारायण का आवास होता है. अधिक जानकारी के लिए देखिए ये Video.

इस दरबार में मराठा पगड़ी पहनकर विराजमान हैं भगवान काल भैरव, देखें

20 अक्टूबर 2021

मध्य प्रदेश उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थित काल भैरव मंदिर में  शिव अपने भैरव स्वरूप में विराजते हैं. काल भैरव का ये दरबार भक्तों के लिए भक्ति, आस्था और आराधना की वो मंजिल जहां सुबह शाम बजने वाली घंटों की ध्वनि निरंतर किसी चमत्कारी शक्ति का आभास करवाती है. वैसे तो काल भैरव के इस मंदिर में पैर रखते ही मन में एक अजीब सी शांति का एहसास होता है, लगता है मानो सारे दुख दूर हो गए लेकिन कालभैरव को ग्रहों की बाधा दूर करने के लिए जाना जाता है. इस दरबार में भगवान काल भैरव मराठा पगड़ी पहनकर विराजमान रहते हैं. देखें प्रार्थना हो स्वीकार.

बजरंगबली का ऐसा दरबार जहां भक्त पत्र भेजकर मांगते हैं मन्नत, देखें

19 अक्टूबर 2021

लखनऊ का हनुमान सेतु मंदिर गोमती नदी के किनारे स्थित है. इस वजह से यह पुल हनुमान सेतु एवं मंदिर हनुमान सेतु मंदिर कहलाता है. हनुमान सेतु मंदिर में सफेद प्रतिमा में बजरंगबली की शक्ति प्राण प्रतिष्ठित है. सप्ताह के मंगलवार की तिथि बजरंगबली को समर्पित है इसीलिए इस मंदिर में मंगलवार के दिन भक्तों की काफी भीड़ रहती है. लखनऊ में भगवान हनुमान पिछले 60 सालों से इस दरबार में चमत्कार करते आए हैं लेकिन इस दरबार की एक परंपरा अपने में काफी अनोखी है. यहां भगवान हनुमान उनका भी दुख दर्द सुनते हैं जो यहां साक्षात नहीं पहुंच पाते हैं. कहते हैं कि लोग अपने आराध्य को चिट्ठी लिख कर अपनी व्यथा सुनाते हैं और महाराज हनुमान उनके सारे संकटों को संकटमोचन बनकर हर लते हैं. देखें प्रार्थना हो स्वीकार.

भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग, एक हाजिरी भर से पूरे होते हैं सारे काम

18 अक्टूबर 2021

प्रार्थना हो स्वीकार के हमारे खास कार्यक्रम में आज हम आपको लेकर चलेंगे. भगवान शिव के उस मंदिर में. जिसके बारे में कहा जाता है कि ये मंदिर द्वापर युग से ही अधूरा है. आखिर ये मंदिर 5000 सालों से क्यों अधूरा है. जहां मिलता है भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग. जिसे उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है. भोलेनाथ के दिव्य दर्शन के लिए देश के कोने कोने से श्रद्धालु आते हैं. क्योंकि मान्यता है कि इस दरबार में लगने वाली बस एक हाजिरी आपके मन की हर एक कामना पूरी कर देती है. माना जाता है कि ये शिवलिंग द्वापर युग से यहां पर है. लेकिन इस मंदिर के जीर्णोद्धार की कथा परमार राजा भोज से जुड़ती है. भोजपुर के इस मंदिर की पहचान विशाल शिवलिंग से है. दावा किया जाता है कि एक ही पत्थर पर खड़ा यह विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है. जो वास्तुशास्त्र का अद्भुत नमूना है. साथ ही लाखों भक्तों की आस्था का केन्द्र जहां शिव अपने भक्तों का कल्याण करते है.

यहां नई नवेली दुल्हन जैसा होता है मां हरसिद्धि का श्रृंगार, देखें

16 अक्टूबर 2021

मध्य प्रदेश के उज्जैन में हरसिद्धि माता का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. माता हरसिद्धि इस दरबार में वैष्णवी स्वरूप में विराजमान रहती हैं. देवी भागवत पुराण के अनुसार माता के इस दरबार मे मां भगवती सती की कोहनी गिरी थी. तभी से ये दरबार शक्ति पीठ रूप में पूजित होता आ रहा है. हरसिद्धि माता के इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता ये भी है कि द्वारका में मां हरसिद्धि हर्षद माता रूप में विराजान हैं. जिनको उज्जैन के राजा विक्रमादित्य प्रसन्न कर उज्जैन लाए थे. माता रानी इस धाम में आने वाले हर एक भक्त की झोली भरती हैं. देखें प्रार्थना हो स्वीकार.

यहां नहीं होता रावण का दहन, दशहरे पर होती है पूजा, देखें

15 अक्टूबर 2021

आज दशमी तिथि पर पूरा देश दशहरा मना रहा है. शक्ति के इस त्योहार पर पूरा देश जश्न के माहौल में डूबा है. देश में दशहरे का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है और आज देश के कई शहरों में रावण दहन होगा. एक तरफ जहां देश में रावण दहन की तैयारी की जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ देश में कई हिस्से ऐसे हैं जहां रावण को जलाया नहीं पूजा जाता है. मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक ऐसा ही गांव है जहां के निवासी रावण को अपना आराध्य मानते हैं. कानपुर में भी दशानन का मंदिर है जो साल में एक ही दिन, विजयादशमी के दिन खुलता है और यहां रावण की विधिवत पूजा अर्चना की जाती है. देखिए ये रिपोर्ट.

पूरे देश में दशहरे की धूम, मां दुर्गा की विदाई का दिन भी आज

15 अक्टूबर 2021

आज दशमी तिथि पर पूरा देश दशहरा मना रहा है. शक्ति के इस त्योहार पर पूरा देश जश्न के माहौल में डूबा है. रावण के साथ साथ मेघनाद और कुंभकरण के पुतले तैयार है. इंतजार शुभ मुहूर्त का है जब भगवान राम अग्नि बाण छोड़ेंगे और बुराई जल कर राख हो जाएगी. लेकिन आज मां की विदाई का भी दिन है. मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के बाद दशमी तिथि आती है और इसी दिन मूर्ति के विसर्जन की भी परंपरा है. मां की विदाई से पहले विवाहित महिलाएं सिंदूर खेला करती हैं. देखें प्रार्थना हो स्वीकार.

नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को इन चीजों का भोग लगाकर करें प्रसन्न, देखें प्रार्थना हो स्वीकार

13 अक्टूबर 2021

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. इस बार शारदीय नवरात्र में एक तिथि की क्षय होने की वजह से 8 दिन का ही नवरात्र है. 7 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्र का कल नौवां दिन है. नवरात्रि के नौवें दिन देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों की सभी तकलीफें दूर हो जाती हैं. मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से यश, बल और धन की प्राप्ति होती है. प्रार्थना हो स्वीकार में जानें मां सिद्धिदात्री को भोग में क्या पसंद है.

ये है अंबाजी का वो दरबार जहां मां सती का हृदय गिरा था, देखें प्रार्थना हो स्वीकार

12 अक्टूबर 2021

गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले में अंबा देवी का दरबार स्थित है. इस दरबार में मां का साकार स्वरूप नहीं दिखता है. यानी कि देवी मां के इस मंदिर के गर्भगृह में मां की न तो किसी प्रतिमा की पूजा होती है और न ही मां का कोई विग्रह प्राण प्रतिष्ठित है. यहां मां के निराकार स्वरूप के पूजन का विधान है. सफेद संगमरमर से बना मां का ये दरबार अनोखा है जिसकी बनावट मन को मोह लेती है. मां का ये दरबार सिद्ध धाम होने के साथ-साथ शक्ति पीठ भी है. पौराणिक मान्यता है कि मां अंबा का ये वही दरबार है जहां मां सती का हृदय गिरा था. देखें प्रार्थना हो स्वीकार.

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को लगाएं इन चीजों का भोग, देखें

12 अक्टूबर 2021

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. ज्‍योतिषीय गणना कहती है कि नवरात्र का पहला दिन और अंतिम दिन तय करता है कि नवरात्र में मां का आगमन किस सवारी पर होगा और मां की विदाई किस वाहन पर होगी. इस बार शारदीय नवरात्र में एक तिथि की क्षय होने की वजह से 8 दिन का ही नवरात्र है. 7 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्र का कल आठवां दिन है. नवरात्रि के आठवें दिन मां अंबे के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है. प्रार्थना हो स्वीकार में जानें कैसे करें मां महागौरी की पूजा.