प्रशांत महासागर में गॉडजिला अल नीनो के सक्रिय होने से साल 2026 में भारत में मानसून के कमजोर रहने की आशंका जताई गई है. मौसम पूर्वानुमान रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है, जिसका सीधा असर देश की कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. उत्तर और पूर्व भारत में सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश होने का अनुमान है, जबकि सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल के कारण पश्चिमी राज्यों में स्थिति बेहतर रह सकती है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो का प्रभाव केवल खरीफ फसलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सर्दियों में बढ़ते तापमान से रबी की फसल, विशेषकर गेहूं की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है. इस स्थिति से निपटने के लिए किसानों को मोटे अनाज, मूंग और उड़द जैसी कम पानी वाली और सूखा सहने वाली फसलें उगाने की सलाह दी गई है. साथ ही, जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाना अनिवार्य बताया गया है.