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घर में नहीं था पता, गोल्ड जीतकर पहुंची तो हर कोई रह गया हैरान, स्लम बस्ती की 2 बेटियों की गोल्ड वाली कहानी

बिहार के मुजफ्फरपुर की दो बेटियों ने 16वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर वुशु चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया. सिकंदरपुर स्लम बस्ती में रहने वाली 11 साल की माहिरा के पिता सब्जी बेचते हैं और मां मजदूरी करती है. जबकि 12 साल की संध्या अंबेडकरनगर स्ल्म बस्ती में रहती हैं और उनके पिता पलदारी का काम करते हैं.

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बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाले दो बेटियों ने राज्य स्तरीय वुशु चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया. दोनों बेटियों के घरवालों को उनके चैंपियनशिप में खेलने के बारे में पता नहीं था. जब बेटियां गोल्ड मेडल लेकर गांव पहुंचीं, तब जाकर परिवार और दूसरे लोगों को पता चला कि बेटियों ने कमाल कर दिया है. ये कहानी 11 साल की माहिरा कुमारी और उनकी दोस्त संध्या कुमारी की है. जिनको मुश्किल से स्कूल जाने की इजाजत मिली थी. लेकिन बेटियां गोल्ड जीतकर घर पहुंच गईं.

गांव की 2 बेटियों ने जीता गोल्ड-
भागलपुर के खेल भवन में आयोजित 16वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर एवं जूनियर वुशु चैंपियनशिप में सिकंदरपुर स्लम बस्ती की रहने वाली माहिरा और संध्या ने अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया. इस शानदार प्रदर्शन के बाद दोनों का चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है, जहां वे बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी.

अभाव के बीच वुशु की ट्रेनिंग-
माहिरा और संध्या दोनों अप्पन पाठशाला की छात्राएं हैं. सीमित संसाधनों और आर्थिक अभाव के बीच उन्होंने वुशु की ट्रेनिंग शुरू की. शुरुआत में खेल की ड्रेस और जरूरी उपकरण खरीदना भी उनके परिवारों के लिए आसान नहीं था. लेकिन प्रशिक्षकों और संस्थान के सहयोग से दोनों ने लगातार अभ्यास जारी रखा और राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया.

सब्जी बेचने वाले की बेटी बनी गोल्ड मेडलिस्ट-
11 वर्षीय माहिरा के पिता सब्जी बेचते हैं, जबकि मां मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाती हैं. माहिरा पिछले पांच वर्षों से अप्पन पाठशाला में पढ़ रही है और करीब डेढ़ साल से वुशु का प्रशिक्षण ले रही है. माहिरा बताती है कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसने सबसे पहले अपने शिक्षक को फोन कर यह खुशखबरी दी.

मां करती हैं चौका-बर्तन, पिता हैं पलदार-
12 वर्षीय संध्या अंबेडकर नगर स्लम बस्ती की रहने वाली है. उसके पिता पलदारी का काम करते हैं और मां घरों में चौका-बर्तन करती हैं. संध्या का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है. वह पिछले कई वर्षों से पढ़ाई के साथ-साथ वुशु का नियमित अभ्यास कर रही है.

अप्पन पाठशाला के संस्थापक सुमित कुमार ने बताया कि दो वर्ष पहले वुशु प्रशिक्षकों के सहयोग से बच्चों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था शुरू की गई थी. आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण और खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिसका परिणाम आज माहिरा और संध्या की सफलता के रूप में सामने है.

नेशनल लेवल की दी जा रही ट्रेनिंग- सुनील कुमार
वुशु प्रशिक्षक सुनील कुमार ने बताया कि दोनों खिलाड़ी बेहद प्रतिभाशाली हैं. राष्ट्रीय प्रतियोगिता को देखते हुए उन्हें प्रतिदिन विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर बिहार और मुजफ्फरपुर का नाम रोशन करेंगी.

स्लम बस्ती की तंग गलियों से निकलकर राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली माहिरा और संध्या की कहानी इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा संसाधनों की नहीं, अवसर और मेहनत की मोहताज होती है. अब पूरे जिले की निगाहें राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं.

(मणिभूषण शर्मा की रिपोर्ट)

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