देर से सोने का बच्चे की सेहत पर असर...

30 August 2026

- by Good News Today

(Photo Credit: unsplash)

बच्चे के सोने और जागने का समय रोज लगभग एक जैसा रखें. इससे शरीर को नींद का सही समय समझने में मदद मिलती है.

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अगर बच्चे को रात 9 बजे सुलाना है तो करीब एक घंटे पहले उसकी तैयारी शुरू कर दें. नहाना, दांत साफ करना, कहानी सुनना और फिर बिस्तर पर जाना अच्छा रूटीन हो सकता है.

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कोशिश करें कि बच्चा शाम को ज्यादा देर तक न सोए. खासकर दोपहर 3 बजे के बाद की नींद रात में सोने का समय आगे कर सकती है.

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बेडटाइम से करीब 1 से 2 घंटे पहले मोबाइल, टीवी और दूसरी स्क्रीन बंद कर दें. इसकी जगह कहानी पढ़ना या बच्चे से बात करना बेहतर है.

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बच्चे को दिन में खेलने और शारीरिक गतिविधि करने का मौका दें. दिनभर एक्टिव रहने से रात में नींद आने में मदद मिल सकती है.

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बच्चे के सोने के समय घर में शोर कम रखें. रोशनी धीमी करें और तेज आवाज में टीवी या दूसरी गतिविधियों से बचें.

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बच्चे को खेलते या टीवी देखते हुए अचानक सोने के लिए न भेजें. पहले से बेडटाइम रूटीन शुरू करने से उसे सोने के लिए तैयार होने का समय मिलता है.

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सोने से पहले बच्चे को छोटी कहानी सुनाएं या कुछ देर प्यार से बात करें. इससे उसका मन शांत करने में मदद मिल सकती है.

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एक-दो दिन रूटीन अपनाने से आदत नहीं बदलती. बच्चे को जल्दी सुलाने के लिए रोज एक ही समय और लगभग एक जैसा तरीका अपनाना जरूरी है.

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अगर बच्चे को देर से सोने की आदत है तो शुरुआत में वह जल्दी बिस्तर पर जाने से मना कर सकता है. ऐसे समय में डांटने के बजाय धैर्य रखें और धीरे-धीरे नई आदत बनाएं.

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