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हेयर ट्रांसप्लांट एक मेडिकल सर्जिकल प्रोसीजर है, जिसमें सिर के पीछे या साइड से स्वस्थ बालों की जड़ों को निकालकर गंजे हिस्से में लगाया जाता है.
हेयर ट्रांसप्लांट की दो मुख्य तकनीकें होती हैं. FUT और FUE. दोनों को मेडिकल साइंस में सुरक्षित माना जाता है.
FUT तकनीक में सिर की त्वचा की पतली पट्टी निकालकर उससे बालों की जड़ों को अलग किया जाता है.
FUE तकनीक में बालों की जड़ों को एक-एक करके निकालकर सीधे जरूरत वाली जगह पर लगाया जाता है.
अब तक की वैज्ञानिक रिसर्च में हेयर ट्रांसप्लांट और कैंसर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है.
इस प्रक्रिया में व्यक्ति के अपने ही बालों की जड़ों का इस्तेमाल होता है, इसलिए शरीर में कोई खतरनाक बदलाव नहीं होता.
हेयर ट्रांसप्लांट में न रेडिएशन का इस्तेमाल होता है और न ही ऐसे केमिकल्स का, जो कैंसर का कारण बनें.
सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी और अफवाहों की वजह से लोगों में हेयर ट्रांसप्लांट को लेकर डर फैल जाता है.
कई लोग हर तरह की कॉस्मेटिक सर्जरी को जोखिम भरी मानते हैं, इसलिए इसे गंभीर बीमारियों से जोड़ देते हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही और प्रशिक्षित डॉक्टर से कराया गया हेयर ट्रांसप्लांट सुरक्षित होता है और इससे कैंसर होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.