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दशहरे पर रावण दहन, मेले और रामलीला के साथ जलेबी खाने का भी खास क्रेज रहता है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर दशहरे के दिन जलेबी खाने की परंपरा कहां से आई और इसके पीछे क्या कहानी है? आइए जानते हैं.
दशहरे के दिन कई जगहों पर लोग रावण दहन देखने के बाद जलेबी खाते हैं. बाजारों में मिठाई की दुकानों पर भी खूब भीड़ देखने को मिलती है.
दशहरे पर जलेबी खाने की परंपरा की शुरुआत किसी एक जगह से हुई थी, इसका पक्का ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता. यह अलग-अलग इलाकों में प्रचलित लोक परंपरा का हिस्सा बन गई.
भारत में त्योहारों पर मिठाई बांटने और खाने की पुरानी परंपरा है. दशहरे पर भी लोग खुशियां मनाने के लिए जलेबी जैसी मिठाइयां खाते हैं.
दशहरा भगवान राम की रावण पर जीत का प्रतीक है. इस दिन लोग उत्सव मनाते हैं और मिठाई खाकर अपनी खुशी जाहिर करते हैं.
कुरकुरी जलेबी और उसकी मीठी चाशनी इसे खास बनाती है. दशहरे के मेले और बाजारों में यह लोगों की पसंदीदा मिठाइयों में शामिल रहती है.
उत्तर भारत के कई इलाकों में दशहरे पर जलेबी खाने का रिवाज लोकप्रिय है. हालांकि, हर शहर और परिवार में इसे मनाने का तरीका अलग हो सकता है.
समय के साथ दशहरे का यह स्वाद लोगों की यादों और त्योहार की खुशियों से जुड़ गया है. यही वजह है कि कई परिवार आज भी इस दिन जलेबी खाना पसंद करते हैं.