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हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने में दो एकादशी एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष को पड़ती है. इस तरह से एक साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है.
एकादशी के दिन भक्त व्रत रखते और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से भक्तों के सभी पापों का नाश हो जाता है.
एकादशी का दिन पितरों के मुक्ति दिलाने के लिए भी खास होता है क्योंकि जिन पितरों को मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ है, इस दिन पितृ तर्पण करने से मोक्ष प्राप्त होता है.
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन व्रत की कथा सुनने मात्र से यह उपवास करने के बराबर फल देता है.
एकादशी का व्रत करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं. यह व्रत मोक्ष व जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है.
एकादशी का व्रत रखने से व्रतधारी के अलावा उसके परिवार के लोगों को भी इसका पुण्यफल मिलता है. यह व्रत दो प्रकार से रखा जाता है. निर्जला और फलाहारी या जलीय व्रत.
एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए. इस व्रत में पूरी रात जाग कर भगवान विष्णु की भक्ति करनी चाहिए.
एकादशी का व्रत रखने से दुर्भाग्य, दरिद्रता और कष्ट दूर हो जाते हैं. जीवन खुशहाल हो जाता है.
एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति, मोक्ष प्राप्ति, धन-वैभव पाने के लिए उत्तम माना जाता है.