(Photo Credit: Pixabay, Pexels and Unsplash)
गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से शुरू होगा और यह 6 सितंबर 2025 तक चलेगा. गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा के भक्त अपने घरों, दफ्तरों और पंडालों में भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं.
हम आपको बता रहे हैं गणेश स्थापना और पूजा के दौरान किन-किन गलतियों से बचना चाहिए ताकि आपकी पूजा सफल और फलदायक हो.
गणेश जी की मूर्ति स्थापना के समय इसका मुख हमेशा उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. इस दिशा को सबसे शुभ माना जाता है.
गणेश जी की मूर्ति को सीधे फर्श या जमीन पर स्थापित करना शुभ नहीं माना जाता. मूर्ति को लकड़ी की चौकी, लाल या पीले रंग के साफ वस्त्र पर स्थापित करें.
कई बार लोग घर या पंडाल में एक से अधिक गणेश जी की मूर्तियों की स्थापना कर देते हैं, जो उचित नहीं है. एक ही स्थान पर एक मूर्ति की स्थापना करना चाहिए.
पूजा के लिए हमेशा गणेश जी की सुंदर और ठीक स्थिति में मौजूद मूर्ति का ही चयन करें. टूटी-फूटी या अधूरी मूर्ति का उपयोग करना अशुभ माना जाता है.
गणेश जी को तुलसी और केतकी के फूल अर्पित करना मना है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये फूल उनके लिए अशुभ माने जाते हैं.
पूजा के दौरान शंख का बजाना शुभ माना जाता है, लेकिन गणेश पूजा में दक्षिणावर्ती शंख बजाना वर्जित है.
गणेश चतुर्थी की पूजा का समापन विसर्जन से होता है, जिसे पूरी विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ करना चाहिए. बिना पूजा-पाठ के, जल्दबाजी में या नियमों की अनदेखी कर विसर्जन करना अशुभ माना जाता है.