महाशिवरात्रि पर कितने बजे करें शिवलिंग पर जलाभिषेक?

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आज उन्हीं महाकाल की महाशिवरात्रि है. इस दिन भक्त भोले बाबा और मां पार्वती की पूजा करते हैं. इसी दिन माता पार्वती और भोले बाबा का विवाह हुआ था.

आज के दिन भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करके पूरे विधि विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं और पूरे दिन का व्रत भी करते हैं. जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त.

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की तिथि 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी और 16 फरवरी को सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी.

शिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी रविवार को रखा जाएगा. इसके अलावा अगर आप महाशिवरात्रि का व्रत रख रहे है, तो उसका पारण 16 फरवरी की सुबह 6 बजकर 50 मिनट से दोपहर में 3 बजकर 24 मिनट के बीच किया जा सकता है.

महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर जल्दी नहा लें और व्रत करने का संकल्प लें. उसके बाद एक साफ कपड़े को चौकी पर बिछाकर उसके ऊपर चावल रख दें. 

चावल के ऊपर भगवान शिव को विराजमान करवाएं. अब एक कलश लें और उसके ऊपर स्वास्तिक बनाएं और उसमें जल भर लें.

कलश में सुपारी, सिक्का डालना न भूलें. अब उसके भगवान शिव के सामने रखकर वहां पर घी का दीपक जलाएं.

अगर आपके पास शिवलिंग है, तो उसका जलाभिषेक कर सकते हैं. अगर नहीं है, तो मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करें. जलाभिषेक करते वक्त ध्यान रहे कि 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करते रहें.

उसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा,भाग, शमी पत्र और फूल अर्पित करें. पूजा के बाद भगवान शिव की आरती करना बिल्कुल भी न भूलें. आरती के बिना आपकी पूजा और व्रत अधूरा माना जाता है.