आज के दौर में ऑनलाइन शॉपिंग ने खरीदारी को बहुत आसान बना दिया है, लेकिन यही सुविधा कभी-कभी लोगों के लिए मुसीबत भी बन जाती है.
बढ़ रही ऑनलाइन शॉपिंग
जब किसी वेबसाइट पर 80%–90% तक का भारी डिस्काउंट दिखाई देता है, तो लोग बिना ज्यादा सोच-विचार किए तुरंत खरीदारी कर लेते हैं और यहीं ठगों को मौका मिल जाता है.
भारी डिस्काउंट का लालच
ठग नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को आकर्षित करते हैं और उनका बैंक या कार्ड डेटा चुरा लेते हैं. इसके बाद न तो सामान मिलता है और न ही पैसे वापस आते हैं.
नकली वेबसाइट का मकसद
ऐसी फर्जी वेबसाइट्स का सबसे बड़ा हथियार होता है 'बहुत सस्ता ऑफर'. महंगे मोबाइल, ब्रांडेड कपड़े या जूते बेहद कम कीमत पर दिखाकर लोगों को फंसाया जाता है.
हेवी डिस्काउंट
किसी वेबसाइट की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले उसके वेब एड्रेस (URL) को ध्यान से देखें. नकली साइट्स अक्सर असली वेबसाइट से मिलते-जुलते नाम का इस्तेमाल करती हैं.
URL
यह भी जांच लें कि वेबसाइट https से शुरू हो रही है या नहीं और ब्राउज़र में लॉक का निशान दिखाई दे रहा है या नहीं. अगर ऐसा नहीं है, तो उस साइट से दूर रहना ही बेहतर है.
URL
फर्जी वेबसाइट्स का डिजाइन अक्सर प्रोफेशनल नहीं होता. उनमें धुंधली तस्वीरें और लिखावट में गलतियां आसानी से नजर आ जाती हैं.
डिजाइन
किसी भरोसेमंद वेबसाइट पर कंपनी का पूरा पता, ईमेल और कस्टमर केयर की जानकारी आसानी से उपलब्ध होती है.
हेल्पलाइन
नकली वेबसाइट्स पर यह जानकारी अधूरी होती है या सिर्फ एक मोबाइल नंबर दिया होता है. कई बार 'About Us' पेज भी कॉपी-पेस्ट जैसा लगता है, जिससे शक बढ़ जाता है.
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