14 July 2026
- by Good News Today
(Photo Credit: unsplash)
अगर कोई एस्ट्रोनॉट स्पेस में रोता है, तो उसके आंसू नीचे नहीं गिरते. इसकी वजह वहां ग्रैविटी का न होना है.
(Photo Credit: unsplash)
स्पेस में आंसू आंखों के आसपास ही चिपके रहते हैं और धीरे-धीरे पानी की एक गोल बूंद जैसी बन जाते हैं.
(Photo Credit: unsplash)
अगर आप सोचते हैं कि वह ऊपर जाएंगे या नीचे, तो जवाब है किसी भी दिशा में अपने आप नहीं जाएंगे. वे आंख और चेहरे से चिपके रहते हैं.
(Photo Credit: unsplash)
अगर एस्ट्रोनॉट लगातार रोता रहे, तो नए आंसू उसी बूंद में जुड़ते जाते हैं और वह बड़ी होती जाती है.
(Photo Credit: unsplash)
कई बार यह पानी आंखों के सामने आ जाता है, जिससे देखने में परेशानी हो सकती है.
(Photo Credit: unsplash)
ऐसे में एस्ट्रोनॉट को आंसुओं को हाथ या कपड़े से साफ करना पड़ता है, क्योंकि वे अपने आप नीचे नहीं बहते.
(Photo Credit: unsplash)
स्पेस में शरीर आंसू बनाना बंद नहीं करता. भावुक होने या आंख में धूल जैसी परेशानी होने पर वहां भी आंसू आ सकते हैं.
(Photo Credit: unsplash)
एस्ट्रोनॉट्स कहते हैं कि आंखों के पास जमा हुए आंसू कभी-कभी जलन या असहज महसूस करा सकते हैं.
(Photo Credit: unsplash)
अर्थ पर ग्रैविटी आंसुओं को गालों की ओर नीचे बहा देती है, लेकिन स्पेस में यही ताकत नहीं होने के कारण आंसू वहीं टिके रहते हैं.
(Photo Credit: unsplash)
इसलिए स्पेस में रोने पर आंसू न तो नीचे गिरते हैं और न ही किसी तय दिशा में बहते हैं. वे आंखों और चेहरे के पास ही तैरते या चिपके रहते हैं, जब तक उन्हें साफ न किया जाए.
(Photo Credit: unsplash)