मसान की होली केवल काशी में ही नहीं पूरे देश-दुनिया में फेमस है. यह होली काशी के पवित्र मणिकर्णिका घाट में मनाई जाती है.
मसान की होली की होली का मतलब है चिताओं की राख से होली खेलना.
यह एक सदियों पुरानी रस्म का हिस्सा है जिसे 'मसान की होली' के नाम से जाना जाता है.
ऐसा माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव देवी गौरी को अपने दिव्य मिलन के बाद काशी लेकर आए थे.
काशीवासियों ने गुलाल और अबीर से होली खेलकर उनका स्वागत किया था.
उस दिन शिव आत्माओं, गणों और रहस्यमय प्राणियों के साथ होली नहीं मना सके.
अगले दिन, वे रंगों के बजाय पवित्र राख का उपयोग करते हुए उनके साथ होली मनाने के लिए श्मशान घाट लौट आए.
इस साल मसान की होली 28 फरवरी 2026 को प्रतिष्ठित मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा. यह अनुष्ठान हर साल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.
इस दिन मणिकर्णिका घाट पर करीब 20 हजार लोग इकट्ठा होतें है. उत्सव के दौरान डेढ़ क्विंटल से अधिक पवित्र राख का उपयोग किया जाता है. जिसे गुलाल के साथ मिलाकर खेला जाता है.