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क्या सांप वाकई में दूध पीता है और अपने साथी की मौत का बदला लेता है? ऐसे कई सवाल सांपों को लेकर रोचकता पैदा करते हैं, लेकिन विज्ञान इन्हें सच नहीं मानता है.
सबसे प्रचलित मिथों में से एक है कि सांप दूध पीता है. विज्ञान कहता है कि रेंगने वाले जीव दूध समेत कई डेयरी उत्पाद पचा ही नहीं पाते हैं.
सांप को दूध पीना पसंद ही नहीं है. ऐसा तब भी हो सकता है जब उसे प्यास लगी हो तो वो दूध ही नहीं दूसरे लिक्विड पी सकता है. लेकिन दूध पीना उसके सामान्य व्यवहार का हिस्सा नहीं है.
नाग पंचमी के मौके पर सांप को दूध पिलाने की परंपरा वास्तव में सांपों को नुकसान पहुंचाने का काम करती है. इससे उनके पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है.
क्या सांप बदला लेने के लिए वापस आते हैं? यह भ्रम भारतीय फिल्मों और टीवी सीरियल्स की कहानियों में गढ़े हैं. कहानियों में दिखाया गया कि नागिन अपने साथी की मौत का बदला लेती है.
विज्ञान कहता है कि सांपों में किसी तरह का सामाजिक बंधन नहीं होता, न ही इतनी बुद्धि या याददाश्त कि वे किसी हमलावर को पहचान सकें या याद रख सकें.
सपेरे की बीन सुनकर सांप के नाचने की बात सच नहीं है. सांपों के कान में इंसानों की तरह पर्दा नहीं होता, इसलिए वे बीन की धुन नहीं सुन पाते.
सपेरे की बीन के आगे-पीछे हिलने की गति ही असल में सांप को हरकत में लाती है. आवाज नहीं, बल्कि मूवमेंट पर सांप की प्रतिक्रिया होती है.
यदि किसी सांप का सिर काट दिया जाए, तो वह सूरज डूबने तक जिंदा रहता है. यह बात ऑस्ट्रेलिया के ग्रामीण इलाकों में प्रचलित है. यह बात इस आधार पर बनी हो कि सिर कटने के बाद भी सांप का शरीर कुछ देर तक तड़पता रहता है.