18 July 2026
- by Good News Today
(Photo Credit: unsplash)
रात में आंखें चमकती जरूर हैं, लेकिन वे खुद रोशनी नहीं छोड़तीं. टॉर्च, गाड़ी की हेडलाइट या चांद की रोशनी आंखों से टकराकर वापस लौटती है.
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कई जानवरों की आंखों के रेटिना के पीछे टेपेटम लुसिडम (Tapetum Lucidum) नाम की एक चमकदार परत होती है. यही उनकी आंखों को चमकने में मदद करती है.
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यह खास परत रोशनी को दोबारा रेटिना तक पहुंचाती है, जिससे कम रोशनी में भी जानवर बेहतर देख पाते हैं.
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बिल्ली, बाघ और दूसरे निशाचर जानवर इसी वजह से अंधेरे में आसानी से शिकार कर लेते हैं.
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सिर्फ शिकार करने वाले ही नहीं, बल्कि कई दूसरे जानवर भी इस वजह से रात में खतरे को जल्दी पहचान लेते हैं.
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किसी जानवर की आंखें हरी, किसी की पीली, नारंगी या सफेद चमक सकती हैं. यह उसकी आंखों की बनावट और रोशनी के कोण पर निर्भर करता है.
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इंसानों की आंखों में टेपेटम लुसिडम नहीं होता. इसलिए हमारी आंखें रात में जानवरों की तरह नहीं चमकतीं.
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कैमरे की फ्लैश में इंसानों की आंखें लाल दिखना और जानवरों की आंखों का चमकना एक जैसी बात नहीं है. रेड आई खून की नसों से रोशनी के परावर्तन की वजह से होती है.
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जिन जानवरों की आंखों में यह खास परत नहीं होती, उनकी आंखें रात में नहीं चमकतीं.
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टेपेटम लुसिडम जानवरों को अंधेरे में बेहतर देखने की ताकत देता है. यही वजह है कि वे रात में आसानी से घूमते, शिकार करते और खुद को सुरक्षित रखते हैं.
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