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व्रत के दौरान लोग सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसके पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी कारण भी बताए जाते हैं. आइए जानते हैं कि व्रत में सेंधा नमक खाने की परंपरा क्यों है.
सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से चट्टानों से प्राप्त होता है. इसे कम प्रोसेस किया जाता है, इसलिए इसे शुद्ध और सात्विक माना जाता है.
हिंदू धर्म में व्रत के दौरान तामसिक और अधिक प्रोसेस्ड चीजों से बचने की सलाह दी जाती है. सेंधा नमक सात्विक आहार का हिस्सा माना जाता है.
साधारण नमक की तुलना में सेंधा नमक में रासायनिक प्रोसेसिंग कम होती है, इसलिए व्रत में इसका सेवन किया जाता है.
सेंधा नमक में कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं.
व्रत में हल्का भोजन किया जाता है. सेंधा नमक पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है.
दिनभर उपवास रखने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है. सेंधा नमक इसे बनाए रखने में सहायक माना जाता है.
इसमें मौजूद पोटैशियम शरीर में सोडियम के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, हालांकि इसका सेवन भी सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.