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भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर हो और उनके मुकुट पर सजा मोरपंख न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि, आखिर कृष्ण को मोरपंख इतना प्रिय क्यों है? अगर नहीं तो आइए जानते हैं कृष्ण के मोरपंख धारण करने की वजह और इससे जुड़ी मान्यताएं.
हिंदू धर्म में मोरपंख को शुभता, सुंदरता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि इसका संबंध भगवान कृष्ण से भी जोड़ा जाता है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राधा के साथ रास के दौरान मोर नृत्य कर रहे थे. इस दौरान एक मोर का पंख जमीन पर गिर गया, जिसे कृष्ण ने अपने मुकुट में सजा लिया.
कहा जाता है कि कृष्ण को मोरों का नृत्य बहुत पसंद था. मोरपंख धारण करना प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति उनके प्रेम और सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है.
मोरपंख में नीला, हरा और सुनहरा जैसे कई रंग दिखाई देते हैं. धार्मिक व्याख्याओं में इन रंगों को प्रकृति और जीवन के अलग-अलग रूपों से जोड़ा जाता है.
मोर को सुंदरता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन उसके सिर पर सजा पंख कृष्ण के मुकुट में आने के बाद विनम्रता का संदेश भी देता है.
भगवान कृष्ण का श्याम या नीला स्वरूप और मोरपंख का नीला रंग एक खूबसूरत आध्यात्मिक संबंध दर्शाता है. भक्त इसे कृष्ण के दिव्य स्वरूप का हिस्सा मानते हैं.
कृष्ण की बांसुरी और मोरपंख उनके सबसे लोकप्रिय प्रतीकों में शामिल हैं. दोनों को उनके सरल, प्रेमपूर्ण और मनमोहक व्यक्तित्व से जोड़ा जाता है.