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Astrology Tips: क्यों होता है किसी के विवाह में विलंब, कौन से ग्रह होते हैं इसमें दोषी? जानें कब बनते हैं शादी के शीघ्र योग 

ज्योतिष में विवाह के लिए जन्म कुंडली में सातवां भाव मुख्य माना गया है. इस भाव पर ग्रहों के प्रभाव स्वरूप अनेक स्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिनके चलते शादी में देरी या बार-बार बनते रिश्तों का टूटना सहना पड़ता है. आइए जानते हैं कौन से ग्रह विवाह में विलंब के दोषी होते हैं और कब शादी के शीघ्र योग बनते हैं? 

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:09 PM IST

ज्योतिष में विवाह के लिए जन्म कुंडली में सातवां भाव मुख्य माना गया है. इस भाव पर ग्रहों के प्रभाव स्वरूप अनेक स्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिनके चलते शादी में देरी या बार-बार बनते रिश्तों का टूटना सहना पड़ता है. आइए पंडित शैलेंद्र पांडेय से जानते हैं कौन से ग्रह विवाह में विलंब के दोषी होते हैं और कब शादी के शीघ्र योग बनते हैं? 

शनि से संबंधित विवाह में विलंब का कौन सा है योग 
शनि चन्द्र का विष योग अक्सर विवाह में विलम्ब करवाता है. इस योग के कारण व्यक्ति पहले विवाह करना नहीं चाहता, बाद में काफी विलम्ब हो जाने पर विवाह हो पाता है. यह योग विवाह हो जाने के बाद भी अक्सर अकेलेपन का कारण बनता है. इस योग के होने पर शिव जी की उपासना उत्तम होती है. साथ ही सात्विकता से लाभ होता है. 

विवाह में देरी होने का कौन सा है दूसरा योग
विवाह में विलम्ब का दूसरा कारण बनता है सप्तम भाव में बृहस्पति. यह महिलाओं की कुंडली में ज्यादा खराब होता है. अक्सर यह विवाह नहीं होने देता. अगर विवाह होता भी है तो तालमेल की समस्या रहती है या पति-पत्नी को अलग-अलग रहना पड़ता है. इस योग के होने पर गुरु रूप में शिव जी की उपासना करें. साथ ही नियमित रूप से दान करते रहें. 

विवाह में विलंब का कौन सा है तीसरा योग 
विवाह में विलम्ब का तीसरा योग शुक्र चन्द्र की युति है. यह वैसे तो ज्योतिष का बड़ा राजयोग है लेकिन विवाह के लिए अच्छा नहीं माना जाता. इस योग के होने पर विवाह हो पाना काफी कठिन होता है. अगर विवाह हो गया तो वैवाहिक जीवन में सुख नहीं रहता. इस योग के होने पर श्री हरि और माता लक्ष्मी की उपासना करें. साथ ही सलाह लेकर एक पीला पुखराज धारण करें. 

विवाह में देरी का कौन सा है चौथा योग 
विवाह में विलम्ब की चौथी स्थिति शुक्र की अशुभ स्थिति है. शुक्र विवाह के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है. इसका अशुभ होना, विवाह में विलम्ब का बड़ा कारण बनता है. नवांश में शुक्र की कमजोर स्थिति विवाह के लिए सबसे अशुभ है. यह विवाह और वैवाहिक जीवन पर खराब असर डाल देता है. इस स्थिति के होने पर माता लक्ष्मी की उपासना करें. सलाह लेकर एक ओपल धारण करें. 

विवाह में विलंब होने पर क्या करें
विवाह में विलंब होने पर पूरे वर्ष बृहस्पति देव के मन्त्र का जप करें. पीला पुखराज बृहस्पति का रत्न है और बृहस्पति महिलाओं के विवाह का कारक हैं इसलिए अगर बृहस्पति अनुकूल है और कमजोर है तो पीला पुखराज धारण करने से लाभ हो सकता है. लेकिन हर स्थिति में महिलाओं के पुखराज धारण करने से उनका शीघ्र विवाह नहीं हो सकता. जिन जातकों के विवाह में विलम्ब हो रहा है या जिनकी शादी में रुकावटें आ रही हो उनको पारद शिवलिंग की पूजा जरूर करनी चाहिए. शिवलिंग भगवान शिव और मां पार्वती का अवतार यानी एकल रूप है. शिवलिंग के इस स्वरूप को अत्यंत शुभ माना जाता है.पारद शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के विवाह में आने वाली बाधाएं शीघ्र ही समाप्त हो जाती हैं.

 

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