सोशल मीडिया पर इन दिनों दो वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। पहले वीडियो में दावा किया जा रहा है कि नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने पुलिस की गाड़ी पर पथराव किया। फैक्ट चेक में यह दावा झूठा साबित हुआ है। असल में यह वीडियो अक्टूबर 2025 में गोरखपुर में हुई एक घटना का है, जहां ग्रामीणों ने पुलिस वैन पर हमला किया था। वहीं, दूसरे वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान केंद्रों के 600 मीटर के दायरे में बंगाल पुलिस की तैनाती पर रोक लगा दी है और केवल केंद्रीय बलों को तैनात किया जाएगा। हमारी पड़ताल में यह दावा भी पूरी तरह से गलत निकला। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मतदान केंद्रों पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य पुलिस की ही होती है और केंद्रीय बल उनके साथ मिलकर काम करते हैं।
गुड न्यूज टुडे के 'फैक्ट चेक' कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तीन प्रमुख दावों की पड़ताल की गई. पहले दावे में नोएडा में सैलरी बढ़ोतरी को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस वैन पर पथराव का वीडियो वायरल हुआ, जो जांच में गोरखपुर की पुरानी घटना निकला. दूसरे दावे में कहा गया कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों के 600 मीटर के दायरे में राज्य पुलिस को प्रतिबंधित कर दिया है, जिसे आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर गलत पाया गया. तीसरे दावे में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के हवाले से मस्जिदों को ध्वस्त करने और भारत को रामराज्य घोषित करने की शर्त पर हाथ मिलाने की बात कही गई, जो पूरी तरह फर्जी साबित हुई. कार्यक्रम में तथ्यों के साथ स्पष्ट किया गया कि ये सभी दावे भ्रामक और निराधार हैं.
सोशल मीडिया पर इन दिनों कई भ्रामक वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। गुड न्यूज़ टुडे के 'फैक्ट चेक' कार्यक्रम में ऐसे ही दो बड़े दावों की पड़ताल की गई है। पहले वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि नोएडा सेक्टर 62 में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मजदूरों ने एक फैक्ट्री में आग लगा दी। लेकिन जांच में यह दावा गलत साबित हुआ। असल में यह वीडियो 9 मार्च 2026 को महाराष्ट्र के ठाणे स्थित अंबरनाथ की श्री गणेश केमिकल फैक्ट्री में लगी आग का है। वहीं, दूसरे वीडियो में दावा किया गया कि ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइल के हमले से तेल अवीव के पास इजरायली सैनिकों को ले जा रहा दुबई का एक विमान क्रैश हो गया। एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से की गई पड़ताल में यह वीडियो 95 प्रतिशत से ज्यादा एआई जनरेटेड निकला। इसके अलावा बुलेटिन के आखिर में बच्चों के कुछ मजेदार और मनोरंजक वायरल वीडियो भी दिखाए गए हैं।
गुड न्यूज़ टुडे के शो फैक्ट चेक में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक दावों की पड़ताल की गई है। एक वायरल वीडियो में दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में सेना ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आंसू गैस के गोले छोड़े। लेकिन जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। असल में यह वीडियो ग्यारह मार्च को मणिपुर के इमा कैथेल में एनआरसी लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन का है। इसके अलावा, इजरायली सैनिकों द्वारा फिलिस्तीनी बंधकों को फांसी से पहले यातना देने का दावा भी फर्जी साबित हुआ; यह इराक के टीवी शो बेत उम लैला का दृश्य है। शो के आखिरी हिस्से में कई रोचक वायरल वीडियो भी दिखाए गए। इनमें बिहार में सड़क किनारे परीक्षा लेते शिक्षक, गुजरात में एक बीएचके बनी कार, थाईलैंड में हाईवे पर दौड़ते शुतुरमुर्ग, फिल्म धुरंधर की रंगोली और नारियल पर उकेरी गई भगवान राम की मूर्ति के वीडियो शामिल हैं। यह बुलेटिन अफवाहों की आंधी के बीच तथ्यों की रोशनी में सच और झूठ की पहचान कराता है।
सोशल मीडिया पर नेपाल के प्रधानमंत्री को लेकर एक पोस्ट वायरल है. दावा किया जा रहा है कि उन्होंने नेपाल में सभी ईदगाहों, मस्जिदों और दरगाहों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है. पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने भारत सरकार के सामने देश को रामराज घोषित करने की शर्त रखी है. फैक्ट चेक टीम की पड़ताल में यह दावा पूरी तरह फर्जी साबित हुआ. नेपाल के प्रधानमंत्री की तरफ से ऐसा कोई आदेश या बयान नहीं दिया गया है. नेपाल में अतिक्रमण हटाने का अभियान जरूर चला था, लेकिन किसी धार्मिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया. इसके अलावा, एक अन्य वायरल वीडियो में दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान सेना ने एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया. जांच में यह दावा भी झूठा निकला. असल में यह वीडियो बांग्लादेश की राजधानी ढाका का है, जहां एक छात्र नेता की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी. अन्य रोचक वायरल वीडियो भी दिखाए गए हैं.
सोशल मीडिया पर इन दिनों कई भ्रामक वीडियो वायरल हो रहे हैं। 'गुड न्यूज़ टुडे' के 'फैक्ट चेक' कार्यक्रम में दो प्रमुख दावों की पड़ताल की गई। पहले वीडियो में दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद में सेना की गाड़ी पर पथराव किया गया। जांच में यह दावा झूठा निकला। वीडियो में दिख रही गाड़ी पर 'RMP' (रॉयट मैनेजमेंट पुलिस) लिखा है, जो पाकिस्तान के पंजाब की फोर्स है। साथ ही, वीडियो में दिख रही 'लवली कोल्ड कॉर्नर' दुकान लाहौर के समानाबाद की है। दूसरे वायरल वीडियो में दावा किया गया कि बेरूत में लेबनानी सेना ने ईरानी राजदूत को सड़क पर घसीटकर पीटा। पड़ताल में यह दावा भी फर्जी साबित हुआ। असल में यह वीडियो 15 मई 2022 का है, जिसमें चारबेल तोहमे नामक व्यक्ति को तत्कालीन लेबनानी राष्ट्रपति मिशेल औन के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने पर हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, बुलेटिन में ट्रेन में बने मंदिर और एक एयर होस्टेस के वायरल वीडियो का भी जिक्र किया गया।
सोशल मीडिया पर दो वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें ईरान द्वारा बड़े हमले करने के दावे किए गए हैं। पहले वीडियो में दावा किया गया है कि ईरान ने इजरायली रक्षा मंत्री की इमारत पर हमला किया है। गुड न्यूज़ टुडे की फैक्ट चेक टीम की पड़ताल में यह दावा पूरी तरह से गलत साबित हुआ। असल में यह वीडियो दिसंबर 2025 का है, जब ब्राजील के सेंटाना डो लिवरामेंटो शहर के एक सुपरमार्केट में आग बुझाते समय धमाका हुआ था। वहीं, दूसरे वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में घुसने की कोशिश कर रहे अमेरिकी नौसेना के जहाज पर ईरान ने हमला कर दिया। एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से की गई जांच में सामने आया कि यह वीडियो एआई द्वारा बनाया गया है और पूरी तरह से फर्जी है। इसके अलावा, हालिया आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने भारत सहित कुछ चुनिंदा देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। दोनों वायरल दावे भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों दो अलग-अलग दावों के साथ वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। पहले वीडियो में दावा किया जा रहा है कि इजराइल में एक नए कानून के तहत फिलिस्तीनी कैदी को बिजली के झटके देकर मौत की सजा दी गई। गुड न्यूज़ टुडे की फैक्ट चेक टीम ने जब इस वीडियो की पड़ताल की, तो सामने आया कि यह वीडियो लंदन के रिप्लीज बिलीव इट ऑर नॉट म्यूजियम का है, जहां एक इलेक्ट्रिक चेयर का मॉडल रखा गया था। यह कोई असली घटना नहीं बल्कि एक प्रदर्शनी का हिस्सा है। वहीं, दूसरे मामले में पश्चिम बंगाल चुनाव से जोड़कर दो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। इनमें दावा किया गया है कि बंगाल में पुलिस उपद्रवियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर रही है। जांच में यह दावा भी पूरी तरह से भ्रामक निकला। दरअसल, ये दोनों वीडियो भारत के नहीं बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजधानी ढाका के हैं, जिन्हें गलत संदर्भ में बंगाल का बताकर शेयर किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों दो भ्रामक वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। पहले वीडियो में दावा किया जा रहा है कि इजरायल में एक नए कानून के तहत फिलिस्तीनी कैदी को बिजली के झटके देकर मौत की सजा दी गई। 'गुड न्यूज़ टुडे' की फैक्ट चेक टीम ने जब इस दावे की पड़ताल की, तो पता चला कि यह वीडियो लंदन के 'रिपली बिलीव इट ऑर नॉट' म्यूजियम का है, जहां एक इलेक्ट्रिक चेयर का मॉडल रखा हुआ था। यह म्यूजियम 2017 में बंद हो चुका है। वहीं, दूसरे मामले में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जोड़कर दो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं और उपद्रवियों पर पुलिस लाठीचार्ज कर रही है। जांच में सामने आया कि ये दोनों वीडियो पश्चिम बंगाल के नहीं, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजधानी ढाका के न्यू एस्काटन रोड और शाहबाग इलाके के हैं। हमारी पड़ताल में इजरायल और बंगाल चुनाव से जुड़े ये दोनों वायरल दावे पूरी तरह से झूठे साबित हुए हैं।
गुड न्यूज टुडे के इस विशेष बुलेटिन में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो बड़े दावों की पड़ताल की गई है. पहले दावे में एक वीडियो के जरिए कहा गया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय सेना ने उपद्रवियों के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है. हमारी जांच में यह दावा पूरी तरह गलत निकला; वायरल वीडियो असल में बांग्लादेश के ढाका का है, जहां चुनाव के दौरान बांग्लादेशी सेना तैनात थी. दूसरे दावे में तस्वीरों के जरिए बताया गया कि मध्य पूर्व युद्ध के कारण कुवैत से 20 भारतीयों के शव लाए गए हैं. पड़ताल में पता चला कि ये तस्वीरें जून 2024 की हैं, जब कुवैत की एक इमारत में आग लगने से भारतीय मजदूरों की मौत हुई थी. इसके अलावा, बुलेटिन में नागालैंड के अनुशासित बच्चे, 81 किलो वजन उठाने वाली 9 साल की लुसी मिलग्रिम और कच्छ के रण में हजारों फ्लेमिंगो के मनोरम दृश्यों जैसे सकारात्मक वायरल वीडियो भी दिखाए गए हैं.
गुड न्यूज टुडे के इस विशेष बुलेटिन में एंकर नवजोत संधावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख भ्रामक दावों का पर्दाफाश कर रही हैं। पहले मामले में, एक वीडियो साझा कर दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल के मालदा में बिगड़ते हालात के बाद भारतीय सेना ने मोर्चा संभाल लिया है और एक धर्म विशेष के लोगों पर लाठीचार्ज कर रही है। हालांकि, जांच में पाया गया कि यह वीडियो भारत का नहीं बल्कि बांग्लादेश के ब्राह्मणबारिया का है, जहां 2026 के चुनावों के दौरान सेना ने उपद्रवियों पर कार्रवाई की थी। दूसरे मामले में, एक जर्जर जुगाड़ू पुल पर ई-रिक्शा दौड़ने का वीडियो बिहार का बताकर वायरल किया गया। पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो भी बांग्लादेश के नरसिंग जिले का है, न कि बिहार का। बुलेटिन में इसके अलावा इंटरनेट पर चर्चा बटोर रहे कुछ अन्य दिलचस्प और भावुक वीडियो भी दिखाए गए हैं।