गुड न्यूज़ टुडे के विशेष कार्यक्रम 'फैक्ट चेक' में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की पड़ताल की गई. पहले मामले में दावा किया गया था कि महिला यात्री से बदसलूकी करने पर बस कंडक्टर की पिटाई की गई. जांच में सामने आया कि यह बांग्लादेश का एक स्क्रिप्टेड वीडियो है. वहीं दूसरी खबर में सांसद चंद्रशेखर आजाद द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दावा किया गया था कि उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में पुल न होने के कारण बच्चे गोगा नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं. फैक्ट चेक टीम की जांच में पाया गया कि यह वीडियो रामपुर का नहीं बल्कि उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र का है, जहां बच्चे सोंग नदी पार करके स्कूल जाते हैं. इसके अलावा बुलेटिन में कई सकारात्मक और भावुक करने वाले वायरल वीडियो भी दिखाए गए.
सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनका फैक्ट चेक टीम ने सच सामने लाया है। पहले वीडियो में दावा किया जा रहा था कि महिला यात्री से बदसलूकी के बाद बस कंडक्टर को एक यात्री ने पीटा। हालांकि, पड़ताल में पता चला कि यह वीडियो बांग्लादेश का एक स्क्रिप्टेड वीडियो है और इसमें दिख रहे लोग एक्टिंग कर रहे हैं। वहीं दूसरे वीडियो में दावा किया जा रहा था कि उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में पुल न होने के कारण बच्चे गोगा नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने भी इसे शेयर कर सरकार पर तंज कसा था। गुड न्यूज टुडे की टीम की जांच में यह दावा भी झूठा साबित हुआ। यह वीडियो रामपुर का नहीं, बल्कि उत्तराखंड के टिहरी जिले का है, जहां बारिश के मौसम में बच्चे सौंग नदी को पार करके स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं।
गुड न्यूज टुडे के खास शो 'फैक्ट चेक' में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की पड़ताल की गई. पहले वायरल वीडियो में दावा किया गया कि बांग्लादेश में 40 साल से पढ़ा रहे एक हिंदू शिक्षक को चप्पलों की माला पहनाकर प्रताड़ित किया गया. फैक्ट चेक टीम की पड़ताल में यह दावा झूठा साबित हुआ. वीडियो में दिख रहे व्यक्ति पूर्व कम्युनिटी मेडिकल ऑफिसर अहमद अली हैं, जिन पर पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के आरोप में जून 2025 में भीड़ ने हमला किया था. दूसरे वायरल वीडियो में दावा किया गया कि बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉक्टर मेहरंग बलोच ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाया. पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो जनवरी 2024 की क्वेटा रैली का है और मेहरंग बलोच वर्तमान में जेल में बंद हैं. इस तरह सोशल मीडिया पर किए जा रहे दोनों ही दावे पूरी तरह भ्रामक पाए गए.
सोशल मीडिया पर अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दावे के साथ एक वीडियो वायरल हो रहा है। फैक्ट चेक पड़ताल में यह दावा झूठा साबित हुआ है। वायरल वीडियो वास्तव में सिक्किम की राजधानी गंगटोक का है, जहां तिब्बती समुदाय और रीजनल तिब्बती युवा कांग्रेस के लोगों ने चीन के नए एथनिक यूनिटी कानून के खिलाफ और एक्टिविस्ट लोबगा रंगजेन की याद में प्रदर्शन किया था। वहीं, दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में आए 7.4 तीव्रता के भूकंप के बाद एक बहुमंजिला इमारत के मलबे में तब्दील होने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। जांच में सामने आया कि यह वीडियो कोलंबिया भूकंप का नहीं बल्कि एआई तकनीक से तैयार किया गया एक एडिटेड वीडियो है। इसके अलावा बुलेटिन में सोशल मीडिया की वायरल दुनिया के कई अन्य दिलचस्प और मजेदार वीडियो भी दिखाए गए।
गुड न्यूज टुडे के विशेष कार्यक्रम 'फैक्ट चेक' में एंकर नवजोत संधावा और जांच टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तीन भ्रामक दावों का सच उजागर किया है. पहले दावे में रांची में 10 अगस्त को हुए छात्रों के विधानसभा मार्च में पत्थरबाजी का वीडियो शेयर किया जा रहा था, जो पड़ताल में 21 फरवरी को इंदौर में बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की झड़प का निकला. दूसरे दावे में अतीक अहमद के बेटे अली अहमद द्वारा छोटे भाई अबान के जनाजे के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ से रहम की गुहार लगाने की बात कही गई, जबकि यह वीडियो अक्टूबर 2025 का है जब उसे नैनी जेल से झांसी जेल स्थानांतरित किया जा रहा था. तीसरे दावे में एक व्यक्ति के मोरक्को से तैरकर स्पेन के स्यूटा में अवैध प्रवेश का दावा किया गया, जो वास्तव में मोरक्को के अल जदीदा निवासी तैराक यासीन लगची का वीडियो है. इसके अतिरिक्त बुलेटिन में स्लो साइकिल रेस, अमेरिका से भारतीय दंपति की विदाई और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़ी खबरें शामिल हैं.
सोशल मीडिया पर नेपाल में अवैध घुसपैठियों के गांव को जलाकर राख करने के दावे के साथ एक वीडियो वायरल हो रहा है। फैक्ट चेक पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो नेपाल का नहीं बल्कि तुर्की के मुग्ला में जंगल में लगी आग का है। वहीं दूसरा वीडियो हरियाणा के चरखी दादरी में 6 अगस्त को हुई गोलीबारी से जोड़कर शेयर किया जा रहा था। पड़ताल के अनुसार इस वीडियो का पहला हिस्सा एआई टूल्स की मदद से तैयार किया गया है जबकि दूसरा हिस्सा चरखी दादरी की वास्तविक घटना से संबंधित है। इसके अलावा बुलेटिन में कई अन्य सोशल मीडिया वायरल वीडियो भी शामिल हैं, जिनमें एक छोटी बहन द्वारा भाई की देखभाल, जन्मदिन पर नए बैट का तोहफा, दादा-पोती का स्नेह, सेना की वर्दी में बच्ची का वीडियो, बेंगुलुरु के शिक्षक द्वारा गाकर पीरियोडिक टेबल सिखाने और कश्मीर में सीआरपीएफ जवान को बुजुर्ग महिला द्वारा फल भेंट करने का वीडियो शामिल है।
सोशल मीडिया पर नेपाल में मुस्लिम समुदाय के लोगों के उत्पीड़न के दावे के साथ वायरल हो रहे एक वीडियो की पड़ताल में सच सामने आया है। वीडियो में एक व्यक्ति पेड़ से बंधा दिखाई दे रहा था, जिसे नेपाल का बताकर शेयर किया जा रहा था। गुड न्यूज टुडे की फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल में पाया कि वीडियो में बांग्ला भाषा बोली जा रही है और इमारतों पर बांग्ला भाषा में दक्षिण भिंगला बाड़ी जामे मस्जिद लिखा हुआ है। जांच से स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो नेपाल का नहीं बल्कि बांग्लादेश के कोमिला जिले का है। वहीं, एक अन्य वायरल वीडियो में कांवड़ियों द्वारा सीआरपीएफ जवान को पीटने का दावा किया गया। फैक्ट चेक में सामने आया कि यह वीडियो हालिया नहीं बल्कि 19 जुलाई 2024 का है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन टिकट को लेकर हुए विवाद से जुड़ा था। इसके अलावा बुलेटिन में सोशल मीडिया पर वायरल कई अन्य रोचक और मनोरंजक वीडियो भी दिखाए गए।
सोशल मीडिया पर अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने के दावे के साथ साझा किए गए वीडियो की फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल की। जांच में वीडियो भारत-बांग्लादेश सीमा का मिला, जहां भारतीय सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेशी सीमा बल के बीच कहासुनी हुई थी. नेपाल में अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को भगाने के दावे वाला दूसरा वीडियो भी नेपाल का नहीं मिला. यह बांग्लादेश की राजधानी ढाका के गुलस्तान में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं की झड़प से जुड़ा था. कार्यक्रम में मां दुर्गा बनी बच्ची, पैरों से लिखने वाली कटिहार की लक्ष्मी, बच्ची के सामने झुकते अघोरी बाबा, छोटे भाई को खाना खिलाते बड़े भाई, मजदूर की नकल करते पपी, मां-बेटे के रसगुल्ला प्रसंग, दिल्ली मेट्रो में गाना गाते यात्री और बचाए गए हाथियों के वीडियो भी दिखाए गए.
गुड न्यूज टुडे के खास शो 'फैक्ट चेक' में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो दावों का सच दिखाया गया. पहले दावे में टीएमसी सांसद सायनी घोष का एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि बीजेपी के करीब आते ही उनके बोल बदल गए. पड़ताल में सामने आया कि वायरल वीडियो की दोनों क्लिप्स संसद में दिए गए उनके एक ही भाषण का हिस्सा हैं, जब वह टीएमसी में ही थीं. दूसरी खबर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक वायरल वीडियो से जुड़ी है, जिसमें समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हिंदुओं के घर पर हमले का दावा किया गया. पुलिस जांच और फैक्ट चेक में पता चला कि यह मामला सरकारी रास्ते से अतिक्रमण हटाने को लेकर दो मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद का है और इसमें कोई धार्मिक कोण नहीं है.
गुड न्यूज टुडे की फैक्ट चेक टीम ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे कई दावों की पड़ताल कर उनका सच सामने लाया है. पहले दावे में नेपाल की मस्जिद का बताकर शेयर किया गया लाठीचार्ज का वीडियो वास्तव में मार्च 2020 का कर्नाटक के बेलगावी का निकला, जहां कोरोना लॉकडाउन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की थी. वहीं दूसरे मामले में इंदौर के बाजार में पुलिस से बचने के लिए चोर के बस और होर्डिंग पर चढ़ने का दावा करने वाला वीडियो AI डिटेक्शन टूल की जांच में 99.8% एआई जनरेटेड पाया गया. तीसरे मामले में केरल बाढ़ का बताकर वायरल किया गया वीडियो अगस्त 2025 का पाकिस्तान के कराची का निकला. इसके अलावा बुलेटिन में फ्लोरिडा में बेटी की पहली सोलो फ्लाइट, दिल्ली की बारिश में महिला की मदद करते बाइकर, जर्मन नागरिक के हिंदी बोलने और ईवी चार्जर के केबल में फंसे बच्चे को बचाती हथिनी के सीसीटीवी फुटेज जैसे वायरल वीडियो भी शामिल हैं.
गुड न्यूज टुडे के फैक्ट चेक शो में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो बड़े दावों की सच्चाई सामने लाई गई. पहले दावे में कहा गया कि रांची में JPSC और JSSC परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने SDO और ADM को जमीन पर बैठकर बातचीत के लिए मजबूर कर दिया. पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो रांची का नहीं बल्कि धनबाद के विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय का है, जहां AISA छात्रों ने 27 जुलाई को अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था. दूसरे दावे में एक वीडियो शेयर कर कहा गया कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी हिंदुओं की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. फैक्ट चेक टीम ने पाया कि यह वीडियो असम के गोसाईं गांव का है, जहां जमीन विवाद को लेकर नूरुल खान और गनी शेख नामक दो मुस्लिम गुटों के बीच झड़प हुई थी. इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। इसके अलावा बुलेटिन में सोशल मीडिया पर वायरल अन्य प्रेरक और मनोरंजक वीडियो दिखाए गए.