सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि असम में एक मौलाना फुटबॉल खेल रहे लड़कों को हाफ पैंट की जगह लुंगी पहनने की सलाह दे रहे हैं। फैक्ट चेक में पता चला कि यह वीडियो असम का नहीं बल्कि बांग्लादेश का है। वीडियो में बांग्ला भाषा सुनाई दे रही है न कि असमिया। यह वीडियो बांग्लादेश के एक यूट्यूब चैनल पर 28 जनवरी 2026 को अपलोड किया गया था। इसके अलावा एक और वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि देर रात पार्टी के बाद एक लड़की को नाले में फेंक दिया गया। पड़ताल में यह साल 2017 में रिलीज हुई श्रीदेवी की फिल्म मॉम का एक दृश्य निकला। इस फिल्म में अक्षय खन्ना, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और सजल अली भी नजर आए थे। दोनों वीडियो गलत और भ्रामक दावों के साथ वायरल किए जा रहे हैं।
गुड न्यूज टुडे के विशेष कार्यक्रम 'फैक्ट चेक' में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तीन प्रमुख दावों की पड़ताल की गई. पहले दावे में एपस्टीन फाइल्स को लेकर अमेरिका में भारी विरोध प्रदर्शन का वीडियो दिखाया गया, जिसे जांच में एआई (AI) द्वारा निर्मित पाया गया. यह वीडियो असल में ईरान प्रदर्शनों के लिए एक डिजिटल ट्रिब्यूट था. दूसरे दावे में टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की हार पर बलूचिस्तान में जश्न का वीडियो वायरल हुआ, जो वास्तव में जनवरी 2026 में लाहौर की एक यूनिवर्सिटी के सांस्कृतिक उत्सव का निकला. तीसरे दावे में इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो के तिरुमला मंदिर दर्शन की बात कही गई, जिसे इंडोनेशियाई दूतावास ने पूरी तरह फर्जी करार दिया है. कार्यक्रम में दर्शकों को इन भ्रामक खबरों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई है.
गुड न्यूज टुडे के इस विशेष कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तीन प्रमुख दावों की पड़ताल की गई है. पहले दावे में एक वीडियो के जरिए यह कहा गया कि एपस्टीन फाइल्स जारी होने के बाद अमेरिका में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, लेकिन जांच में पाया गया कि यह वीडियो एआई (AI) द्वारा निर्मित है. दूसरे दावे में श्रीलंका में हुए भारत-पाकिस्तान टी-20 वर्ल्ड कप मैच के बाद बलूचिस्तान में जश्न का वीडियो वायरल हुआ, जो असल में जनवरी 2026 का लाहौर की एक यूनिवर्सिटी का कल्चरल डांस निकला. तीसरे दावे में इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो के तिरुमला मंदिर दर्शन की बात कही गई, जिसे इंडोनेशियाई दूतावास ने पूरी तरह फर्जी करार दिया है. कार्यक्रम में इन सभी भ्रामक खबरों का खंडन करते हुए दर्शकों को जागरूक रहने की सलाह दी गई है.
गुड न्यूज टुडे के 'फैक्ट चेक' कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो भ्रामक दावों की पड़ताल की गई. पहले मामले में एक वीडियो वायरल था जिसमें पुलिस एक मुस्लिम युवक पर लाठीचार्ज करती दिख रही थी, जिसे भारत का बताया जा रहा था. जांच में पाया गया कि यह वीडियो बांग्लादेश के ढाका के शाहबाग इलाके का है, जहां 'इंकलाब मंच' के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी. दूसरे मामले में एक फ्लाई ओवर के गिरने का वीडियो वायरल कर सरकार की आलोचना की जा रही थी. फैक्ट चेक टीम ने पाया कि यह वीडियो पूरी तरह से एआई (AI) जनरेटेड है और इसे एक एआई क्रिएटर द्वारा बनाया गया है. कार्यक्रम में दर्शकों को जागरूक किया गया कि वे सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे खबरों पर विश्वास न करें.
गुड न्यूज टुडे के इस विशेष बुलेटिन में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की पड़ताल की गई है. पहले दावे में एक वीडियो शेयर कर कहा गया कि एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद न्यूयॉर्क में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भारी प्रदर्शन हुआ. हालांकि, जांच में सामने आया कि यह वीडियो अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 के 'नो किंग्स' विरोध प्रदर्शनों का है, जिसका एपस्टीन फाइल्स से कोई संबंध नहीं है. दूसरे दावे में यमुना नदी में 'कालिया नाग' दिखने का वीडियो वायरल हुआ, जिसे एआई डिटेक्शन टूल की मदद से फर्जी पाया गया. यह वीडियो पूरी तरह से एआई जनरेटेड (AI Generated) है और इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है. कार्यक्रम में अन्य रोचक और वायरल वीडियो भी दिखाए गए हैं.
सोशल मीडिया पर मणिपुर में भारतीय सेना के काफिले पर उग्रवादी हमले और आठ जवानों की मौत का दावा करने वाला एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो वास्तव में मणिपुर के सेकमाई में बीएसएफ के एक ट्रक में तकनीकी खराबी के कारण लगी आग का है, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ था. इसके अलावा, कश्मीर के सोनमर्ग में हालिया हिमस्खलन का बताकर साझा किया जा रहा एक अन्य वीडियो एआई (AI) द्वारा निर्मित पाया गया है. हालांकि सोनमर्ग में वास्तविक हिमस्खलन हुआ था, लेकिन वायरल विजुअल फर्जी हैं. साथ ही, बर्फीले तूफान में हनुमान जी की आकृति दिखने वाला वीडियो भी एआई डिटेक्शन टूल्स द्वारा कृत्रिम पाया गया है. दर्शकों को सलाह दी गई है कि वे ऐसी भ्रामक खबरों पर बिना जांच-पड़ताल के विश्वास न करें.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो चौंकाने वाले वीडियो की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. पहले वीडियो में दावा किया गया कि भारत में एक धर्म विशेष के व्यक्ति पर हमला कर उसे गोली मार दी गई. हालांकि, जांच में पाया गया कि वीडियो में दिख रही बस पर 'ढाका' लिखा है और यह बांग्लादेश का एक स्क्रिप्टेड वीडियो है, जिसमें न तो गोली का निशान है और न ही खून के धब्बे. दूसरे वीडियो में आसमान से सांपों की बारिश होने का दावा किया गया, जिससे लोग दहशत में दिख रहे हैं. फैक्ट चेक टीम ने एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से पुष्टि की कि यह वीडियो 96.5% से 99% तक एआई जनरेटेड है. बिजली के तारों के आर-पार होते सांप और इंसानी हाथों की बिगड़ी बनावट इसके फर्जी होने के पुख्ता सबूत हैं.
गुड न्यूज टुडे के 'फैक्ट चेक' कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के वायरल वीडियो की सच्चाई दिखाई गई. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि सीएम ने 'ढाई हजार करोड़ लोगों' द्वारा लोन लेने की बात कही है, जबकि पड़ताल में सामने आया कि उन्होंने 'ढाई हजार करोड़ रुपये' के कुल लोन आवंटन की बात की थी. उनके आधे-अधूरे बयान को गलत संदर्भ में वायरल किया गया. इसके अलावा, बारामती विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले कैप्टन सुमित कपूर के नाम पर वायरल हो रही तस्वीर की भी पड़ताल की गई. जांच में पाया गया कि वायरल तस्वीर असल में कैप्टन साहिल मदान की है, जो सुरक्षित हैं और उस विमान में सवार नहीं थे. कार्यक्रम में दर्शकों से अपील की गई कि वे सोशल मीडिया पर बिना जांचे-परखे किसी भी खबर पर भरोसा न करें.
गुड न्यूज टुडे के इस फैक्ट चेक एपिसोड में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो बड़े दावों की पड़ताल की गई. पहले दावे में यह कहा जा रहा था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र के दौरान कथित तौर पर कहा कि 'देश में कोई गरीब नहीं है, लोग गरीब होने का नाटक कर रहे हैं.' जांच में यह दावा पूरी तरह फर्जी पाया गया; असल में यह एक एडिटेड ग्राफिक था जिसे 'पॉलिटिक्स इंडिया' के एक पुराने पोस्ट को बदलकर बनाया गया था. दूसरा वायरल वीडियो हिमालय में बर्फीले तूफान के बीच हनुमान जी की आकृति दिखने का था. एआई डिटेक्शन टूल्स (Hype Moderation और AI or Not) की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो 98 प्रतिशत एआई द्वारा निर्मित है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है. दर्शकों को ऐसी भ्रामक खबरों से सावधान रहने की सलाह दी गई है.
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी और राहुल गांधी की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि बजट सत्र 2026 के दौरान दोनों संसद में आमने-सामने आ गए. हालांकि, फैक्ट चेक में यह दावा पूरी तरह से झूठा पाया गया है. जांच के दौरान एआई डिटेक्शन टूल्स ने पुष्टि की है कि यह तस्वीर 99 प्रतिशत से अधिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा निर्मित है. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद रवि किशन का एक पुराना वीडियो भी गलत संदर्भ में वायरल हो रहा है. दावे के अनुसार वे यूजीसी के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं, जबकि असल में यह वीडियो सितंबर 2025 का है जब वे गोरखपुर में जीएसटी दरों में कटौती के बाद व्यापारियों से संवाद कर रहे थे. दर्शकों को सलाह दी गई है कि वे ऐसी भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें.