सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब तेजी से वायरल हो रहा है. कुछ यूजर्स इसे शेयर कर दावा कर रहे हैं कि ये वीडियो वेनेजुएला से आ रहे रूसी झंडे वाले तेल टैंकर पर अमेरिकी सेना के कब्जे का है. वायरल वीडियो की क्या सच्चाई है पड़ताल करती हमारी ये रिपोर्ट देखिए.
ट्रंप सरकार ताकत के दम पर या कीमत देकर ग्रीनलैंड हासिल करने पर अड़ी है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बार-बार इंकार करने के बावजूद ट्रंप अपनी मांग दोहराते रहे हैं...इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है...जिसमें डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन और संसद सदस्यों को किसी बात पर हंसते हुए देखा जा रहा है..कुछ यूजर्स इस वीडियो को शेयर करते हुए ये दावा कर रहे हैं कि डेनमार्क के संसद में ट्रंप के ग्रीनलैंड खरीदने के बयान पर जमकर ठहाके लगे...वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है पड़ताल करती हमारी ये रिपोर्ट देखिए।
सड़क पर भगवा झंडे लहराती भीड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक व्यक्ति दुकान के टीनसेड पर चढ़कर वहां लगे हरे रंगे के झंडे को हटाकर जय श्री राम लिखे भगवान हनुमान वाले भगवा झंडे को लगाता है. कुछ यूजर वीडियो को इस दावे से शेयर कर रहे हैं कि बजरंग दल के लोग बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा करने के लिए वहां सड़क पर उतर गए हैं. वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है. पड़ताल करती हमारी ये रिपोर्ट देखिए.
3 जनवरी को अमेरिका ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया था. अब इसी से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर दो वीडियो वायरल हो रहा है..
सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब तेजी से वायरल किया जा रहा है. वीडियो में सड़क पर पुलिस वालों और लोगों की भीड़ देखी जा रही है... वीडियो में कुछ लोग डंडों से युवकों की सरेआम पिटाई करते हुए नजर आ रहे हैं.कुछ यूजर्स इस वीडियो को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि ये घटना असम की है, जहां बांग्लादेशियों को पीटा जा रहा है।वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है पड़ताल करती हमारी ये रिपोर्ट देखिए.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक बहुमंजिला इमारत में जोरदार धमाका होते हुए देखा जा रहा है...धमाके के बाद आसपास मौजू लोग दहशत में इधर से उधर भागते हुए नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को शेयर करते हुए ये दावा कर रहे हैं कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा से जुड़ा हुआ ये लेटेस्ट वीडियो है...लेकिन जब वायरल वीडियो का फैक्ट चेक किया गया तो क्या सच और झूठ सामने आया देखिए पड़ताल करती हमारी ये रिपोर्ट।
गुड न्यूज टुडे के 'फैक्ट चेक' शो में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई भ्रामक दावों की सच्चाई सामने लाई गई. जांच में सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को नजरअंदाज करने का दावा गलत पाया गया; दोनों नेता एक कार्यक्रम में साथ मौजूद थे. इसी तरह, राजस्थान के डीडवाना में महिलाओं के एक प्रदर्शन को गलत तरीके से बिहार के सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ बताया गया, जबकि यह कस्टोडियन जमीन विवाद से जुड़ा था. एक अन्य पड़ताल में, उत्तर प्रदेश का बताकर शेयर किया जा रहा बुलडोजर पर पत्थर फेंकती महिला का वीडियो नेपाल के काठमांडू का निकला. शो ने एआई-जनरेटेड कंटेंट के बढ़ते खतरे को भी उजागर किया, जिसमें बांग्लादेशी युवक और एक एमआरआई हादसे से जुड़े वायरल वीडियो को जांच में 99.9% तक एआई-जनरेटेड पाया गया. इसके अलावा, अरावली संरक्षण का बताया जा रहा वीडियो असल में छत्तीसगढ़ में सीमेंट प्लांट के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन था. यह शो दर्शकों को डिजिटल दौर में अफवाहों से बचने और तथ्यों पर भरोसा करने के लिए जागरूक करता है.
गुड न्यूज टुडे के खास शो 'फॅक्ट चेक' में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तीन प्रमुख दावों की सच्चाई उजागर की. पहला दावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से जुड़ा है, जिसमें कहा गया कि योगी उन्हें नजरअंदाज कर मंच से चले गए. पड़ताल में पाया गया कि यह वीडियो 24 दिसंबर 2025 को लखनऊ में आयोजित अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती कार्यक्रम का है, जिसे भ्रामक रूप से काटकर शेयर किया गया. दूसरा वीडियो अरावली संरक्षण के नाम पर वायरल हो रहा है, जो असल में छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में श्री सीमेंट प्लांट के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन है. तीसरा, बांग्लादेशी हिंदू युवक का वीडियो पूरी तरह एआई (AI) जनरेटेड पाया गया. अंकित शुक्ला ने स्पष्ट किया कि 'सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और झूठे दावों का सच सामने लाना ही हमारा मकसद है.'
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें मुस्लिम महिलाओं को रैली निकालते हुए दिखाया गया है. कुछ यूजर्स वीडियो को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि मुस्लिम महिला डॉक्टर के हिजाब हटाने मामले में नीतीश के खिलाफ राजस्थान के डीडवाना में मुस्लिम महिलाओं ने रैली निकाली. सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ये वीडियो इसी मिलते-जुलते दावे के साथ लगातार शेयर किया जा रहा है. वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है. पड़ताल करती हमारी ये रिपोर्ट देखिए.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की सच्चाई उजागर की है. पहले दावे में एक वीडियो के जरिए यह कहा गया कि बांग्लादेश में पश्चिमी कपड़े पहनने और दाढ़ी न रखने वाले छात्रों के बाल काटे जा रहे हैं. शुभम सिंह ने बताया कि 'यह वीडियो तीन महीने पुराना है और इसका हालिया प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है.' जांच में पाया गया कि यह मयमनसिंह में एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन का वीडियो था.