Good News Today की एंकर नवजोत रंधावा ने सोशल मीडिया पर वायरल दो वीडियो की पड़ताल पेश की। पहले वीडियो को 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA गठबंधन की रैली के बाहर जुटी भीड़ का बताया गया था। जांच में वीडियो के टेंट, नदी और झंडों की गैरमौजूदगी जैसे संकेतों का विश्लेषण किया गया। जनवरी 2025 में अपलोड सामग्री से इसका संबंध प्रयागराज के महाकुंभ और त्रिवेणी संगम से मिला। नवजोत रंधावा ने कहा, ‘यह वीडियो असल में प्रयागराज में पिछले साल हुए महाकुंभ के दौरान का है।’ दूसरे वीडियो को तेल अवीव में बेंजामिन नेतन्याहू पर हमला बताकर साझा किया गया। चेहरे, मंच पर लिखी बुल्गारियाई भाषा और पुराने वीडियो की जांच से सामने आया कि यह जनवरी 2013 में बुल्गारिया के नेता अहमद डोगन पर हमले की कोशिश का दृश्य है। कार्यक्रम में दीपोत्सव, मेट्रो में बच्ची की मदद, फुटबॉल कोचिंग और अन्य वायरल वीडियो भी दिखाए गए।
सोशल मीडिया पर अरुणाचल प्रदेश सीमा और भारतीय रिजर्व बैंक के नए नोट को लेकर भ्रामक दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं. एक वायरल वीडियो में दावा किया गया कि अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ कर रही चीनी सेना को स्थानीय लोगों ने खदेड़ दिया, जबकि पड़ताल में यह वीडियो नेपाल के डोटी जिले में दशैं त्योहार का निकला. वहीं दूसरे वायरल दावे में कहा गया कि RBI ने मंदिर की तस्वीर वाला एक हजार रुपये का नया नोट जारी किया है. जांच में यह दावा भी पूरी तरह फर्जी पाया गया, क्योंकि सरकार और केंद्रीय बैंक ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है. बुलेटिन में इसके अलावा इंटरनेट पर चर्चा बटोर रहे प्रेरणादायक और भावुक वायरल वीडियो की भी समीक्षा की गई.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो वीडियो की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पहले दावे में कहा गया था कि बिहार में अवैध शराब के खिलाफ छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया। हालांकि, फैक्ट चेक पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो बिहार का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले का है, जहां शराब की दुकानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई थी। दूसरे वीडियो में दावा किया गया कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में ओवरलोड ट्रक गुजरने से पुल भरभराकर ढह गया। जांच में यह दावा भी भ्रामक निकला। असल में यह घटना जून 2020 की है, जब मुन्सियारी-मिलम मार्ग पर पोकलेन ले जा रहा ट्रक निकलने से पुल टूटा था। पिथौरागढ़ पुलिस ने भी हालिया घटना का खंडन करते हुए इसे पुराना मामला बताया है। दोनों मामलों में पुराने और अन्य जगहों के वीडियो गलत संदर्भ में फैलाए जा रहे थे।
सोशल मीडिया पर अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों से स्थानीय लोगों के भिड़ने के दावे के साथ एक वीडियो तेजी से वायरल किया गया. जांच-पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो 23 मई 2025 का है, जब अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले के बेगिंग गांव में प्रस्तावित सियांग बांध परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था. वीडियो में दिख रहे वर्दीधारी चीनी सैनिक नहीं बल्कि अरुणाचल प्रदेश पुलिस के जवान थे, जिनकी प्रदर्शनकारियों से तीखी बहस हुई थी. वहीं दूसरे मामले में शादी के जोड़े और चूड़े में महिला द्वारा ट्रेन चलाने का वीडियो वायरल हुआ. पड़ताल में पता चला कि यह वीडियो असली नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है. रेलवे नियमों के तहत लोको पायलट के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म अनिवार्य होती है और केबिन में असिस्टेंट लोको पायलट की मौजूदगी जरूरी होती है.
सोशल मीडिया पर वायरल दावों की पड़ताल में तीन वीडियो से जुड़ी जानकारी सामने रखी गई. अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय जवानों की तलाशी लेने का बताया गया वीडियो वास्तव में मई 2026 में बेंगलुरु में हुई आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल का हिस्सा बताया गया. फ्रांस के विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर साझा किए गए दो वीडियो भी वहां के नहीं निकले. महिला पर पुलिस की गोलीबारी वाला वीडियो ब्राजील के साओ पाउलो का और पुलिसकर्मियों से भिड़ती बुजुर्ग महिला का वीडियो अल्बानिया की राजधानी तिराना का बताया गया. कार्यक्रम में कर्नाटक के कलाकार अमर काली की हल्दी और मिर्च पाउडर से बनाई गई विशाल पेंटिंग, महाबोधि मंदिर के पास भिक्षु और जरूरतमंद व्यक्ति का वीडियो, बड़े आकार की स्कूल ड्रेस पहने बच्ची, खिलौना गाड़ियों की पूजा और 80 वर्षीय बुजुर्ग के योगासन भी दिखाए गए.
सोशल मीडिया पर दो भ्रामक दावों वाले वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनकी पड़ताल गुड न्यूज टुडे की फैक्ट चेक टीम ने की है. पहले मामले में दावा किया जा रहा था कि जेल से रिहा होने के बाद कोकड़ो जना पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके मंच पर रो पड़े. जांच में यह दावा भ्रामक साबित हुआ. पड़ताल के अनुसार यह वीडियो 18 जुलाई 2026 का है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस जबरन अस्पताल ले गई थी, जिस पर अभिजीत दीपके भावुक हुए थे. दूसरे मामले में दावा किया गया कि फ्रांस की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए 'पिग स्क्वाड' तैयार किया है. जांच में पाया गया कि यह वीडियो पूरी तरह से एआई जनरेटेड है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख वीडियो की पड़ताल में बड़े तथ्य सामने आए हैं। पहले दावे में बिहार के बेगूसराय में राहुल गांधी की हालिया पदयात्रा का बताकर एक वीडियो साझा किया जा रहा था, जिसमें भारी भीड़ दिख रही है। पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो हाल का नहीं बल्कि अप्रैल 2025 में आयोजित 'पलायन रोको, नौकरी दो' यात्रा का है। वहीं, दूसरे मामले में फ्रांस में प्रदर्शनों के दौरान एफिल टॉवर पर फिलिस्तीनी झंडा फहराने का दावा किया गया। वीडियो की तकनीकी जांच और विभिन्न एआई डिटेक्शन टूल्स के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की मदद से तैयार किया गया है और इसका वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है। बुलेटिन में इसके अलावा सोशल मीडिया पर पसंद किए जा रहे कई सकारात्मक और भावनात्मक वीडियो भी दिखाए गए।
Fact Check | सोशल मीडिया पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े दो अलग-अलग वीडियो भ्रामक दावों के साथ वायरल हो रहे हैं. पहले दावे में कहा गया कि लंदन में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में पाकिस्तानी झंडे लहराए गए. जांच में सामने आया कि यह वीडियो 15 अगस्त को लंदन के पिकाडिली सर्कस पर आयोजित भारत-पाकिस्तान के संयुक्त स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का था, जिसे भ्रामक दावे से जोड़ा गया. दूसरे दावे में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जुटने की बात कही गई. पड़ताल में पता चला कि वीडियो में दिख रहा बोर्ड और पुलिस बैच मध्य प्रदेश का है. यह वीडियो जुलाई 2026 में भोपाल में मूंग खरीद और खाद वितरण को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हुए किसानों के प्रदर्शन का है. फैक्ट चेक में दोनों ही दावे पूरी तरह झूठे साबित हुए हैं.
सोशल मीडिया पर भ्रामक दावों के साथ वायरल हो रहे दो प्रमुख वीडियो की गुड न्यूज टुडे की फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल की है. पहले मामले में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने बीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका की पिटाई कर दी. पड़ताल में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला. असल में यह वीडियो मुंबई के मीरा रोड स्थित एक क्विक कॉमर्स स्टोर का है, जहां महिला कर्मचारियों से छेड़छाड़ के आरोप में मनसे कार्यकर्ताओं ने स्टोर मैनेजर जय पाठक की पिटाई की थी. वहीं दूसरे मामले में एक वीडियो को फ्रांस में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के संयम का बताकर भारतीय पुलिस पर तंज कसा जा रहा था. जांच में सामने आया कि यह वीडियो फ्रांस का नहीं, बल्कि सितंबर 2025 में इंडोनेशिया के मेदान में हुए हिंसक प्रदर्शन का है. इसके अलावा बुलेटिन में सोशल मीडिया पर वायरल अन्य प्रेरक और रोचक पलों को भी दिखाया गया.
सोशल मीडिया पर भ्रामक दावों के साथ शेयर किए जा रहे दो अलग-अलग वीडियो की पड़ताल की गई है. पहले मामले में 16 अक्टूबर को दिल्ली के सेंट्रल पार्क में कांग्रेस जनता पार्टी द्वारा निकाले गए तिरंगा मार्च के नाम पर एक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें बस पर तिरंगा लिए लोग दिख रहे हैं. पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो दिल्ली का नहीं बल्कि 19 अगस्त 2026 को पटना में राष्ट्रीय जनता दल द्वारा निकाले गए राजभवन मार्च का है, जहां तेजस्वी यादव को हिरासत में लिया गया था. दूसरे मामले में पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद अंबाला हाईवे पर पुलिस द्वारा गोलियां और आंसू गैस के गोले चलाने का दावा किया गया. जांच में यह दावा भी पूरी तरह गलत साबित हुआ. यह वीडियो अगस्त 2026 में पंजोखरा साहिब विवाद के बाद अंबाला हाईवे पर लगे जाम को हटाने के दौरान हुई पुलिस झड़प का है, जिसका परविंदर सिंह हत्याकांड या पंजाब बंद से कोई संबंध नहीं है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की पड़ताल इस विशेष रिपोर्ट में की गई है. पहले मामले में दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान गुंडों के लिए फर्जी पुलिस वर्दी लाने का दावा किया गया. जांच में सामने आया कि यह वीडियो दिल्ली का नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का है, जहां नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को वर्दी बांटी जा रही थी. दूसरे मामले में दावा किया गया कि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और तेल भंडारों पर हमला कर भीषण आग लगा दी. पड़ताल में यह दावा भी भ्रामक पाया गया. वायरल वीडियो सितंबर 2026 की किसी हालिया घटना का नहीं, बल्कि मार्च 2022 का है, जब जेद्दा स्थित सऊदी अरामको के भंडारण संयंत्र को निशाना बनाया गया था.