सोशल मीडिया पर नेपाल और थाईलैंड में आई बाढ़ से जोड़कर दो अलग-अलग वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. पहले वीडियो में पानी के तेज बहाव में गाड़ियों के बहने का दृश्य दिखाकर दावा किया गया कि यह नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ का है. पड़ताल के दौरान वीडियो में गाड़ियों के अप्राकृतिक तरीके से तैरने और धुंधली नंबर प्लेट जैसी खामियां मिलीं. एआई डिटेक्शन टूल्स की जांच में यह वीडियो 80 से 89 प्रतिशत तक एआई जनरेटेड पाया गया. वहीं दूसरे वीडियो में थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बाढ़ के पानी में सड़कों पर मछलियों के तैरने का दावा किया गया. जांच में सुविधा स्टोर के साइन बोर्ड पर गलत वर्तनी, पानी की कम गहराई और स्थिर गाड़ियां दिखाई दीं. एआई डिटेक्शन टूल ने 97 प्रतिशत संभावना के साथ इसे भी एआई जनरेटेड बताया. इस तरह दोनों वायरल दावे पूरी तरह भ्रामक और फर्जी साबित हुए.
सोशल मीडिया पर बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़खानी मामले को लेकर वायरल हो रहे एक वीडियो की पड़ताल की गई. वीडियो में दो घायल युवकों को पुलिस हिरासत में दिखाकर दावा किया गया कि जमुई पुलिस ने दो और आरोपियों का एनकाउंटर किया है. जांच में यह दावा झूठा साबित हुआ. असल में यह वीडियो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का है, जहां पुलिस मुठभेड़ में दो आरोपी घायल हुए थे. इसके अलावा, नेपाल में पहाड़ ढहने और सड़क पर मलबा गिरने का बताकर शेयर किया जा रहा एक अन्य वीडियो भी जांच में फर्जी निकला. तकनीकी विश्लेषण और AI डिटेक्शन टूल्स की पड़ताल में सामने आया कि नेपाल लैंडस्लाइड का यह वीडियो वास्तविक न होकर पूरी तरह AI जनरेटेड है.
सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश में हिंदू युवक पर धारदार हथियार से हमले के दावे के साथ वायरल वीडियो की पड़ताल में सच सामने आया है. जांच के अनुसार यह वीडियो उत्तर प्रदेश का नहीं बल्कि बांग्लादेश के अशुलिया स्थित दारुल इसान और कुरान-ए-करीम फाजिल मदरसे में मार्च 2026 में हुई तोड़फोड़ व हमले की घटना का है. वीडियो में दिख रहे बोर्ड पर बांग्ला भाषा में मदरसे का नाम लिखा था. वहीं दूसरी ओर, अरणब चक्रवात के कारण अहमदाबाद एयरपोर्ट के रनवे पर विमान के बेकाबू होकर गोल-गोल घूमने का दावा भी पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है. फ्रेम-बाय-फ्रेम जांच और AI डिटेक्शन टूल के जरिए स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो असली नहीं बल्कि 83.3 प्रतिशत AI जनरेटेड है. गुजरात में चक्रवात का कोई प्रभाव नहीं था और एडिटेड वीडियो के जरिए केवल भ्रम फैलाया गया था.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की पड़ताल की गई. पहले दावे में एक तस्वीर शेयर कर कहा जा रहा था कि राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस एक शोरूम के सभी टीवी स्क्रीन्स पर दिखाई जा रही थी. पड़ताल में पता चला कि यह तस्वीर एडिटेड और एआई जनरेटेड है, जिसमें कई तकनीकी खामियां नजर आईं. दूसरे दावे में एक वीडियो शेयर कर दावा किया गया कि बिहार के जमुई मामले के आरोपियों को पुलिस ने सरेराह पीटा और उनका जुलूस निकाला. जांच में सामने आया कि यह वीडियो जमुई का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के बोरी क्षेत्र की पुरानी घटना का है, जहां डकैती और गैंगरेप के आरोपियों का पुलिस ने जुलूस निकाला था. दोनों ही वायरल दावे पूरी तरह भ्रामक और गलत साबित हुए.
सोशल मीडिया पर दो वायरल दावों की सच्चाई सामने आई है। पहले वीडियो में दावा किया गया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भारी भीड़ जुटी। पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो हाल का नहीं, बल्कि 31 जनवरी 2024 को ईवीएम के विरोध में आयोजित प्रदर्शन का है, जिसमें प्रदर्शनकारी सर्दियों के कपड़े पहने नजर आ रहे हैं। दूसरे वीडियो में दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश में एक दलित शिक्षिका पर जय श्री राम के नारे लगाकर अंडे फेंके गए। जांच में यह दावा भी भ्रामक निकला। पीड़ित महिला उत्तर प्रदेश की शिक्षिका नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले की माटीगाड़ा ग्राम पंचायत की उप-प्रधान रेखा मलिक हैं। उन पर राजनीतिक विवाद के चलते ग्राम पंचायत कार्यालय में अंडे फेंके गए थे। दोनों ही मामलों में सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ के साथ वीडियो फैलाए गए।
सोशल मीडिया पर भ्रामक दावों के साथ शेयर किए जा रहे दो अलग-अलग वीडियो की पड़ताल की गई है. पहले दावे में बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के एक पुराने बयान को बिहार के जमुई छेड़खानी कांड से जोड़कर वायरल किया जा रहा था, जिसमें वह खुद को सुरक्षित बता रही हैं. जांच में सामने आया कि यह बयान अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के बयान पर दी गई प्रतिक्रिया का हिस्सा था. दूसरे दावे में कर्नाटक में गणपति विसर्जन रोकने के लिए नदी किनारे लगी जालियों को तोड़ने का दावा किया गया. पड़ताल में पता चला कि यह वीडियो कर्नाटक का नहीं, बल्कि हैदराबाद के टैंक बंड का है, जहां भाग्यनगर गणेश उत्सव समिति के सदस्यों ने हुसैन सागर में मूर्तियों के विसर्जन पर लगी रोक के विरोध में लगाए गए अस्थायी बैरिकेड हटा दिए थे.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो अलग-अलग दावों की पड़ताल की गई है. पहले दावे में कहा गया कि कोलकाता एयरपोर्ट के पास स्थित 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद को तोड़ा गया है. पड़ताल में सामने आया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं बल्कि बांग्लादेश के पाबना का है, जहां एक बच्ची की हत्या के आरोपी के मकान को भीड़ ने तोड़ा था. दूसरे दावे में आरोप लगाया गया कि गुरुग्राम हिट एंड रन मामले के मुख्य आरोपी कल्याण बैंसला के समर्थन में एक कार रैली निकाली गई. जांच में यह दावा भी भ्रामक पाया गया, क्योंकि रैली का वायरल वीडियो साल 2025 का है और इसका गुरुग्राम की घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है.
सोशल मीडिया पर वायरल दो बड़े दावों का फैक्ट चेक सामने आया है. पहले दावे में राहुल गांधी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की नाश्ते की मुलाकात की तस्वीर में मल्लिकार्जुन खरगे को अलग बैठा हुआ दिखाया गया. पड़ताल में सामने आया कि यह तस्वीर एडिटेड है और मूल तस्वीर में खरगे मौजूद नहीं थे. दूसरे दावे में एक पुराने वीडियो को भारत-पाकिस्तान के हालिया युद्धपोत टकराव से जोड़कर शेयर किया गया. फैक्ट चेक में वीडियो के पुराने होने की पुष्टि के बाद इसे हालिया घटना से जोड़ने वाले दावे को गलत पाया गया.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो के दावों की फैक्ट चेक में पड़ताल की गई. पहले वीडियो को स्वतंत्र भारद्वाज की जेल से बाहर आने के बाद का बताकर शेयर किया गया, लेकिन जांच में वीडियो पुराना निकला. वहीं दूसरे वीडियो को भारत में धर्म विशेष के व्यक्ति पर हमले का बताकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, जबकि यह घटना बांग्लादेश के ढाका की सामने आई. दोनों वायरल दावे जांच में भ्रामक और झूठे साबित हुए.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की पड़ताल में सच सामने आया है। पहले दावे में दावा किया जा रहा था कि इंदौर में राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में भारी जनसैलाब उमड़ा। जांच में पाया गया कि वायरल वीडियो असल में 9 अगस्त को इंदौर में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर निकाली गई रैली का है, जिसे गलत संदर्भ में जोड़ा गया। दूसरे मामले में यह दावा किया गया कि सहारनपुर में मस्जिद तोड़े जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने योगी सरकार को फटकार लगाई और अधिकारियों को जेल भेजने की बात कही। पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो 2022 का है, जिसमें पटना हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप कुमार बिहार में एक मकान तोड़े जाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे। दोनों ही वायरल वीडियो भ्रामक दावों के साथ साझा किए जा रहे थे।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो प्रमुख दावों की फैक्ट चेक पड़ताल की गई है. पहले मामले में दावा किया गया कि राजस्थान निकाय चुनाव में सिर्फ एक वोट मिलने पर बीजेपी प्रत्याशी फूट-फूट कर रोने लगे. पड़ताल में सामने आया कि पर्वतसर नगर पालिका के वार्ड 13 से बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चंद्र को एक वोट मिलने की बात सच है, लेकिन रोते हुए व्यक्ति का वायरल वीडियो उनका नहीं है. वीडियो में दिख रहे शख्स राजद नेता शिवचंद्र राम हैं, जो टिकट न मिलने पर रोए थे. दूसरे मामले में रेलवे ट्रैक पर फंसे हाथी के बच्चे को रेस्क्यू करने का वीडियो वायरल हुआ, जो एआई डिटेक्शन टूल्स और फ्रेम विश्लेषण की जांच में पूरी तरह एआई जनरेटेड साबित हुआ. इसके अलावा बुलेटिन में सोशल मीडिया के विभिन्न दिलचस्प और भावनात्मक वायरल वीडियो भी दिखाए गए.