साल 2026 में बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, यानी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन देशभर में सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है और विद्यार्थी, शिक्षक व कला से जुड़े लोग विशेष रूप से मां सरस्वती का आशीर्वाद लेते हैं.
Basant Panchami 2026 Date: इस साल बसंत पंचमी की तिथि को लेकर बहुत से लोग असमंजस हैं. कोई 23 जनवरी तो कोई 24 जनवरी को बसंत पंचमी बता रहा है. तो चलिए आपको बताते हैं 23 या 24 जनवरी कब है बसंत पंचमी.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के 40 दिन बाद होली का त्योहार मनाया जाता है. इसी वजह से इसे होली पर्व की शुरुआत भी माना जाता है. साथ ही, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए बसंत पंचमी को बेहद शुभ दिन माना गया है.
माघ मेले में किन्नर अखाड़े ने तुला दान की परंपरा निभाई. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंद गिरी को उनके वजन के बराबर अनाज और सिक्कों से तोला गया. इस परंपरा का उद्देश्य आत्मशुद्धि, पापों का नाश और आध्यात्मिक उन्नति है.
Basant Panchami 2026: कई लोग मां सरस्वती की पूजा करते समय उनके सामने अपनी पेन और कॉपी-किताब रखते हैं और उसकी भी पूजा करते हैं. वहीं कई लोग तो मां सरस्वती की पूजा करने के बाद बसंत पंचमी के दिन पढ़ाई नहीं करते और न ही पेन और कॉपी-किताब छूते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि ऐसा करना सही है या गलत? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं.
अच्छी बात के इस एपिसोड में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अहमदाबाद में आयोजित नवरात्रि कथा के दौरान मां काली के प्राकट्य और महिमा का वर्णन किया. उन्होंने बताया कि जब महादेव ने संसार के कल्याण के लिए विषपान किया, तो वही विष उनके कंठ में स्थित होकर शक्ति के रूप में प्रकट हुआ, जिन्हें हम मां काली के नाम से जानते हैं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'अगर सनातन के काम के लिए तुम विष भी पी लोगे तो हमें अपने आराध्य पर भरोसा है, वो विष भी अमृत बन जाएगा.' उन्होंने दुर्गा सप्तशती के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे देवी ने शुंभ-निशुंभ और चंड-मुंड जैसे राक्षसों का संहार किया. कथा के अंत में उन्होंने भजनों के माध्यम से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सनातन धर्म की रक्षा के लिए प्रेरित किया. देखिए अच्छी बात.
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलने को लेकर डोम राजा का क्या कहना है? डोम राजा विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि हमारे समाज के लोगों ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी तो इस घाट के सुंदरीकरण की मांग की थी. उसकी सहमति से ये सबकुछ हो रहा है.
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बचपन का नाम उमाशंकर उपाध्याय है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी पैतृक गांव में ही हुई थी. उसके बाद वो वाराणसी में पढ़ाई की. इस दौरान वो छात्र राजनीति में एक्टिव रहे. साल 2003 में उन्होंने संन्यास ग्रहण किया.
ॐ नमः शिवाय सिर्फ शांति पाने का मंत्र नहीं है. यह एक गहरा सत्य स्वीकार करने का साहस है. यह मंत्र हमें जीवन से भागने नहीं, बल्कि जीवन को वैसे ही देखने की शक्ति देता है जैसा वह है. हममें से कई लोग आज भी इस मंत्र का जाप करने के बाद भी इसका मतलब नहीं जानते. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि ॐ नमः शिवाय का असल में मतलब क्या है.
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हनुमान चरित्र और प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर प्रकाश डाला. उन्होंने रावण वध के बाद मंदोदरी और श्रीराम के बीच हुए एक भावुक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा, 'एक मेरा पति था जो दूसरों की स्त्री को अपना बनाना चाहता था और एक राम तुम हो जो छाया देखकर भी मां कहकर संबोधित करते हो.' शास्त्री ने समझाया कि रावण बल, वैभव और परिवार में बड़ा होने के बावजूद केवल अपने चरित्र की कमी के कारण हारा. उन्होंने श्रोताओं को प्रेरित किया कि चित्र के बजाय चरित्र को शुद्ध करने पर ध्यान दें, क्योंकि अंत समय में केवल कर्मों की कमाई ही साथ जाती है. उन्होंने जीवन की नश्वरता पर जोर देते हुए कहा कि सांसों का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए अभी से राममय जीवन जीना शुरू करें.
हिंदू धर्म में मूर्ति को ईश्वर का प्रतीक माना जाता है. यह माना जाता है कि भगवान किसी एक रूप या आकार में सीमित नहीं हैं. ईश्वर अनंत हैं और उन्हें कई रूपों में पूजा जा सकती है. इसलिए एक ही भगवान की एक से अधिक मूर्तियां घर में रखना गलत नहीं माना जाता. यहां सबसे महत्वपूर्ण चीज संख्या नहीं, बल्कि आपकी श्रद्धा और भावना है.