प्रयागराज में आयोजित सत्संग के दौरान भोजन को प्रसाद बनाने और भगवान की भक्ति का महत्व समझाया गया। प्रवचन में बताया गया कि माताओं को भोजन बनाते समय फिल्मी गाने सुनने के बजाय भगवान का ध्यान करना चाहिए, जिससे भोजन प्रसाद बन सके। प्रसाद का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया गया कि 'प्र' का अर्थ प्रत्यक्ष, 'सा' का अर्थ साक्षात् और 'द' का अर्थ दर्शन है। इसके साथ ही पुरानी परंपराओं को याद करते हुए पहली रोटी गाय को और अंतिम रोटी कुत्ते को देने की बात कही गई। वर्तमान समय में इस परंपरा के लुप्त होने पर चिंता व्यक्त की गई। इसके अलावा, माता जानकी और हनुमान जी के प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति को बाहर से संसारी और अंदर से सन्यासी होना चाहिए। अंत में 'सुंदर है नाम राम का' भजन के माध्यम से संतों के संग बैठकर भगवान का नाम जपने और सत्संग के महत्व पर जोर दिया गया।
Badrinath Dham: श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बद्रीनाथ धाम का कपाट गुरुवार सुबह 6:15 बजे से खुल गया है. इससे पहले गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट भी खुल चुके हैं. इस तरह से अब चारधाम की यात्रा पूरी तरह से चालू हो गई है. हम आज आपको बता रहे हैं बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास और आप यहां कैसे पहुंच सकत हैं?
अच्छी बात के इस एपिसोड में पंडित धीरेंद्र शास्त्री राम राज्य और रावण राज्य के बीच का अंतर बता रहे हैं. कथा में बताया गया कि जहां नेता और अधिकारी केवल अपना स्वार्थ देखते हैं और भ्रष्टाचार करते हैं, वह रावण राज्य है, जबकि जहां वे जनता का भरण-पोषण करते हैं, वह राम राज्य है. इसके अलावा, मांसाहार को बढ़ावा देने वाले समाज को रावण राज्य और फलाहार को अपनाने वाले समाज को राम राज्य का प्रतीक बताया. सुंदरकांड के प्रसंगों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति को बाहर से सांसारिक जिम्मेदारियां निभानी चाहिए, लेकिन अंदर से भगवान के प्रति समर्पित और संन्यासी की तरह रहना चाहिए. इस दौरान संगम नगरी में संतों और श्रद्धालुओं का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला. देखिए अच्छी बात.
गंगा सप्तमी का अवसर शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां गंगा धरती पर आई थीं. इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है. जानें क्या है इस दिन स्नान और दान का शुभ मुहूर्त.
हिन्दू धर्म में चंदन को अत्यंत पवित्र माना जाता है. पूजा के हर कार्य में चंदन की लकड़ी, चंदन का लेप और चंदन के इत्र का प्रयोग किया जाता है. चंदन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने में भी सहायक है.
उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले आज शंकराचार्य गद्दी, तेल कलश यात्रा, उद्धव और कुबेर की डोली के साथ मुख्य पुजारी रावल जी का दल धाम पहुंच गया.
Kedarnath Kapat Open: केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को खुल गए हैं. अब श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे. यदि आप भी केदारनाथ धाम की यात्रा पर जाने वाले हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि कौन-कौन सी जरूरी बातें आपको जाननी जरूरी है?
जिन पर माता लक्ष्मी की कृपा होती है, उनके जीवन में धन, सौभाग्य और सफलता की कोई कमी नहीं रहती. वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जिनमें सकारात्मक और आकर्षक ऊर्जा होती है, जो धन प्राप्ति और आर्थिक उन्नति में सहायक मानी जाती हैं.
श्री केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ हम सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं. मंदिर के बाहर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं.
वृंदावन के एक सिद्ध संत और उनके शिष्य की यह कथा गुरु और शिष्य के बीच के समर्पण को दर्शाती है. संत नियम के बहुत पक्के थे. एक दिन जब शिष्य ठाकुर जी के लिए प्रसाद बना रहा था, तब कुछ बाहरी लोगों ने झोपड़ी में झांक लिया. इस पर क्रोधित होकर गुरुजी ने शिष्य को बहुत पीटा, लेकिन शिष्य ने बिना किसी शिकायत के दोबारा प्रसाद बनाया. जब शिष्य रोया, तो इसलिए नहीं कि उसे मार पड़ी, बल्कि इसलिए कि ठाकुर जी को भोग मिलने में देरी हुई. उसकी इस भक्ति को देखकर गुरुजी ने उसे आशीर्वाद दिया. अगले दिन वृंदावन की परिक्रमा के दौरान शिष्य की तबीयत बिगड़ गई. अपने अंतिम समय में उसने गुरुजी का चरणामृत पिया और उन्हें देखते हुए प्राण त्यागने की इच्छा जताई. अंत में शिष्य को साक्षात भगवान के दर्शन हुए. यह कथा बताती है कि यदि सच्चा गुरु मिल जाए, तो ईश्वर स्वयं चले आते हैं. देखिए अच्छी बात.
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल सुबह 8:00 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. कपाट खोले जाने को लेकर सभी तरह की तैयारी जोरों-शोरों से चल रही है. इसके बाद 23 अप्रैल को भगवान बद्री विशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे.