प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. मौनी अमावस्या पर 4 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना के बीच प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं.
श्री सत्यनारायण भगवान के व्रत की महिमा और उसकी सटीक विधि का वर्णन कर रहे हैं. धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, 'सत्यनारायण का व्रत मतलब सत्य के व्रत को जो करेगा, सत्य के पालन को जो करेगा, उसकी सर्वत्र विजय होगी.' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कथा के लिए सायंकाल यानी गोधूलि बेला का समय सबसे उत्तम होता है, जब गायों के खुर से धूल उड़ती है. कथा में गेहूं के चूर्ण (पंजीरी), केले के फल, घी, दूध और शक्कर के महत्व को बताया गया है. इसके साथ ही, स्कंद पुराण के रेवाखंड से निर्धन ब्राह्मण और लकड़हारे की कथा सुनाई गई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे भक्ति और सत्य के संकल्प से उनकी दरिद्रता दूर हुई. वक्ता ने जोर दिया कि केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि जीवन में सत्य बोलना और सत्य के मार्ग पर चलना ही इस व्रत का वास्तविक उद्देश्य है.
भगवान की पूजा करते समय कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर उन्हें क्या सभी भगवानों की पूजा करनी चाहिए? जानिए इसको लेकर स्वामी प्रेमानंद महाराज क्या कहते हैं.
प्रयागराज में माघ मेले में शिविर लगाने वाले सतुआ बाबा का चर्चा में हैं. सतुआ बाबा की लग्जरी जीवनशैली सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सतुआ बाबा 3 करोड़ की डिफेंडर कार और 5.5 करोड़ की पोर्शे कार से चलते हैं. उनकी चार्टर्ड प्लेन में आश्रम करने की तस्वीर भी वायरल हुई है. माघ मेले में सतुआ बाबा के शिविर में सीएम योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे.
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा के दौरान अपने जीवन की एक भावुक और चमत्कारिक घटना साझा की. उन्होंने बताया कि करीब 10-12 साल पहले जब उन्होंने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया था, तब वे भारी कर्ज में डूब गए थे. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'चौथी पांचवीं सीढ़ी पर जैसे ही पैर रखा पूज्य श्री सन्यासी बाबा बोल पड़े जा चिंता ना कर कल सुबह तक तेरी व्यवस्था हो जाएगी'. उन्होंने बताया कि कैसे अगले ही दिन झांसी से आए एक अनजान व्यक्ति ने रुपयों से भरा बैग देकर उनकी सारी उधारी चुका दी. शास्त्री ने भक्तों को भरोसा दिलाया कि यदि हनुमान जी पर सच्ची निष्ठा हो, तो वे कभी अपने भक्त का साथ नहीं छोड़ते. उन्होंने कैंसर अस्पताल बनाने के अपने संकल्प को भी दोहराया और कहा कि भगवान जिन्हें चुनते हैं, वही कथा में बैठ पाते हैं.
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भोलेनाथ हमें सिखाते हैं कि जीवन को सरल और निष्कपट भाव से जिया जाए. वहीं रुद्र यह याद दिलाते हैं कि हमारे भीतर का झूठ, अहंकार और मोह टिकने वाला नहीं है. शिव से प्रेम करने का अर्थ है परिवर्तन को स्वीकार करना. उनसे डरने का अर्थ है सत्य का विरोध करना.
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मकर संक्रांति के साथ ही इन गांवों में टीवी, रेडियो, डीजे और किसी भी तरह के शोर-शराबे पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाता है. न तो संगीत सुनाई देता है और न ही सीटी तक बजाई जा सकती है. मोबाइल फोन का उपयोग केवल साइलेंट मोड पर किया जा सकता है.