हिंदू धर्म में मूर्ति को ईश्वर का प्रतीक माना जाता है. यह माना जाता है कि भगवान किसी एक रूप या आकार में सीमित नहीं हैं. ईश्वर अनंत हैं और उन्हें कई रूपों में पूजा जा सकती है. इसलिए एक ही भगवान की एक से अधिक मूर्तियां घर में रखना गलत नहीं माना जाता. यहां सबसे महत्वपूर्ण चीज संख्या नहीं, बल्कि आपकी श्रद्धा और भावना है.
बचपन से ही हम सबने देखा है कि लोग अपने घरों, दुकानों, गाड़ियों तक पर भी नींबू और मिर्च लटका देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा हैं कि आखिर इसका मतलब क्या है?
मौनी अमावस्या पर रविवार को संगम नगरी प्रयागराज, धार्मिक नगरी हरिद्वार और महादेव की नगरी काशी में आस्था का भव्य संगम देखने को मिला. कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह-सुबह लाखों की संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे और पवित्र स्नान किया. श्रद्धालुओं आस्था की डुबकी लगाने के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन में लीन रहे. गरीबों को दान किया.
मौन व्रत धारण कर श्रद्धालुओं ने सरयू की पावन धारा में आस्था की डुबकी लगाई और पुण्य लाभ अर्जित किया.
इस साल मौनी अमावस्या पर काफी शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. इस अवधि में स्नान-दान और तर्पण करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति हो सकती है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या की तिथि, दान- स्नान का शुभ मुहूर्त, मंत्र सहित अन्य जानकारी…
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है. इस दिन मौन रहकर स्नान और दान करने का महत्व है. आइए जानते हैं क्यों मौनी अमावस्या के दिन लोग गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और फिर दान देते हैं?
मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को है. इस दिन मौन रहकर स्नान और दान करने का विशेष महत्व है. इस बार मौनी अमावस्या पर चंद्र और गुरु का गजकेसरी योग बन रहा है, जो इसकी पवित्रता को और बढ़ाएगा. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर स्नान और दान का शुभ मुहूर्त क्या है?
Mauni Amavasya: मौनी अमावस्या 18 जनवरी दिन रविवार को है. इस दिन शिववास योग सहित कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र सहित और कौन से पत्ते चढ़ाने पर धन लाभ होता है और महादेव की सालों भर कृपा बनी रहती है.
Mauni Amavasya Maun Vrat: मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को है. इस दिन मौन व्रत रखा जाता है. गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. गरीबों को दान किया जाता है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर स्नान-दान और मौन व्रत का क्या है महत्व?
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. मौनी अमावस्या पर 4 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना के बीच प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं.
श्री सत्यनारायण भगवान के व्रत की महिमा और उसकी सटीक विधि का वर्णन कर रहे हैं. धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, 'सत्यनारायण का व्रत मतलब सत्य के व्रत को जो करेगा, सत्य के पालन को जो करेगा, उसकी सर्वत्र विजय होगी.' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कथा के लिए सायंकाल यानी गोधूलि बेला का समय सबसे उत्तम होता है, जब गायों के खुर से धूल उड़ती है. कथा में गेहूं के चूर्ण (पंजीरी), केले के फल, घी, दूध और शक्कर के महत्व को बताया गया है. इसके साथ ही, स्कंद पुराण के रेवाखंड से निर्धन ब्राह्मण और लकड़हारे की कथा सुनाई गई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे भक्ति और सत्य के संकल्प से उनकी दरिद्रता दूर हुई. वक्ता ने जोर दिया कि केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि जीवन में सत्य बोलना और सत्य के मार्ग पर चलना ही इस व्रत का वास्तविक उद्देश्य है.