जून और जुलाई 2026 में एक महीने के भीतर दो बार मृत्यु पंचक का संयोग बन रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. जानिए मृत्यु पंचक की तिथि, समय, प्रभाव, किन कार्यों से बचना चाहिए और सालभर के पंचक कैलेंडर की पूरी जानकारी.
राजस्थान में आयोजित हनुमान कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भीषण गर्मी का जिक्र किया. कथा में बताया कि इतनी गर्मी के बावजूद हनुमान जी की भक्ति से मन को शीतलता मिलती है. इस दौरान समाज में आ रहे बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की. कथा में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आज के समय में लोगों को गाय पालने में शर्म आती है, जबकि कुत्ते पालने को स्टेटस सिंबल मान लिया गया है. घरों के बाहर अतिथि देवो भव की जगह कुत्तों से सावधान के बोर्ड लग गए हैं. सभी हिंदुओं से अपील की गई कि वे गौ माता की सेवा करें और यदि घर में जगह न हो तो गौशालाओं में गायों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाएं. इसके अलावा, हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया कि उनकी कृपा पाने के लिए चित्र नहीं बल्कि चरित्र सुधारने की आवश्यकता है.
हिंदू धर्म में शंख का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इसे पवित्रता, सुख-समृद्धि और विजय का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शंख समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक है. कहते हैं जहां शंख होता है वहां मां लक्ष्मी जरूर होती हैं.
मंदिर में दर्शन करने के 10 प्रमुख नियम बताए गए हैं, जिनका पालन हर श्रद्धालु को करना चाहिए। सबसे पहला नियम विनम्रता है; भगवान के दरबार में VIP प्रोटोकॉल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। दर्शन के दौरान झगड़ा या दिखावा करने से बचना चाहिए। यदि मंदिर प्रबंधन की ओर से कोई विशेष व्यवस्था मिलती है, तो उसे भगवान की कृपा मानकर स्वीकार करें, लेकिन खुद पीछे के रास्ते से जाने की जिद न करें। इसके अलावा, मंदिर में हमेशा भारतीय वेशभूषा और मर्यादा के वस्त्र पहनकर जाना चाहिए। भगवान को कभी भी खराब या सस्ती सामग्री अर्पित नहीं करनी चाहिए; जो वस्तुएं हम स्वयं उपयोग करते हैं, वही भगवान को भी चढ़ानी चाहिए। दर्शन के दौरान सांसारिक वस्तुओं के बजाय भगवान से भगवान को ही मांगना चाहिए। मंदिर परिसर में अपने गुरु मंत्र का जाप करना, स्नान, ध्यान और दान करना भी आवश्यक है। इन नियमों का पालन करने से ही मंदिर दर्शन का वास्तविक लाभ मिलता है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
मध्य प्रदेश का राजगढ़ किन्नर संत समाज का आध्यात्मिक केंद्र बन गया है. यहां आयोजित किन्नर महासम्मेलन में देशभर से किन्नर महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और संत समाज के प्रतिनिधि पहुंचे. इस महासम्मेलन में 50 से अधिक किन्नरों की विधि-विधान और शुद्धिकरण के साथ सनातन धर्म में घर वापसी कराई गई.
Parama Ekadashi: परमा एकादशी का व्रत हर 3 साल में एक बार अधिकमास में रखा जाता है. इस बार परमा एकादशी 11 जून को है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि परमा एकादशी का व्रत रखने से 100 यज्ञों के समान पुण्य मिलता है. आइए जानते हैं परमा एकादशी के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन कौन से उपाय करने से धन लाभ होता है?
हिंदू धर्म में तुलसी माला को बहुत पवित्र माना जाता है. यह भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है. मान्यता है कि तुलसी माला पहनते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.
June me Amavasya Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है. अमावस्या जब सोमवार के दिन पड़ती है तब इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है. जून में पड़ने वाली अमावस्या बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन एक साथ कई संयोग बन रहे हैं. सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है. इस दिन को पितरों की पूजा के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है.
Mrityu Panchak 2026: ज्योतिष में पंचक काल को बहुत ही अशुभ माना गया है. जून महीने का पंचक 6 जून से शुरू होकर 11 जून 2026 तक रहेगा.शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहा जाता है. ऐसे में इस बार यह सबसे अशुभ और कष्टकारी रहेगा. आइए जानते हैं कौन से काम पंचक में भूलकर भी नहीं करने चाहिए.
अक्सर कई लोगों के साथ होता है कि उनकी आमदनी तो ठीक होती है, लेकिन पैसा बचता नहीं. हो सकता है कि इसके पीछे लाइफस्टाइल एक वजह हो. लेकिन वास्तु भी इसके पीछे का एक कारण हो सकता है.
इस साल अधिक मास 15 जून 2026 को समाप्त हो रहा है. इसके बाद एक बार फिर विवाह समारोहों की शुरुआत होगी और कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे.