अच्छी बात के इस एपिसोड में पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने माता सती से पार्वती के प्रकट होने की कथा सुनाई. रामचरितमानस के अनुसार, त्रेता युग में भगवान शंकर माता सती के साथ कुंभज ऋषि के पास कथा सुनने गए. कुंभज ऋषि ने भगवान शंकर का पूजन किया, जिससे माता सती के मन में संदेह उत्पन्न हुआ. उन्होंने कहा कि 'भगवान परीक्षा से प्राप्त नहीं होते हैं, भगवान प्रतीक्षा से प्राप्त होते हैं.' उन्होंने माता सबरी और शूर्पणखा का उदाहरण देकर समझाया कि शूर्पणखा ने परीक्षा ली और परिणामस्वरूप दंड पाया, जबकि सबरी ने प्रतीक्षा की और भगवान राम स्वयं उनकी झोपड़ी में आए. कथा आगे बढ़ी जब रास्ते में राम जी मिले तो भगवान शंकर ने उन्हें प्रणाम किया. माता सती को संदेह हुआ कि जिनकी पत्नी गुम गई उन्हें शंकर जी प्रणाम क्यों कर रहे हैं. देखिए अच्छी बात.
Bageswar Dham: अच्छी बात के इस एपिसोड में पंडित धीरेंद्र शास्त्री कह रहे हैं कि 'माया के गुलाम बनोगे तो तुम्हें नाचना पड़ेगा, माधव के गुलाम बनोगे तो भगवान तुम्हारे साथ नाचेंगे'. देखिए अच्छी बात पंडित धीरेंद्र शास्त्री के साथ.
Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है. आइए जानते हैं इस साल चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हो रही है और क्या है घटस्थापना का शुभ मुहूर्त?
एक धार्मिक प्रवचन में सुंदरकांड के पांच फलों और लाभों का विस्तार से वर्णन किया गया। वक्ता ने बताया कि सुंदरकांड पढ़ने से राम जी की भक्ति की प्राप्ति होती है, संकट का निवारण होता है, और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। प्रवचन में कहा गया कि हनुमान जी ने सुंदरकांड में वानरों, माता सीता और राम जी के संकट दूर किए। वक्ता ने समझाया कि हनुमान जी संकट हरने वाले हैं और भगवान पर विपत्ति आने पर वे हनुमान जी को पुकारते हैं। प्रवचन में यह भी बताया गया कि सुंदरकांड से आत्मविश्वास और लक्ष्य पर केंद्रित रहना सीखा जा सकता है। वक्ता ने बच्चों को संस्कार देने और कट्टर हिंदू बनाने पर जोर दिया। लंका दहन की कथा को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि हनुमान जी असली सोने के समान हैं जो अग्नि में नहीं जलते।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है. श्रद्धालु घर पर बैठे रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा की शुरुआत हो रही है. इस दिन गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे. जबकि 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे.
अच्छी बात के इस एपिसोड में पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भक्ति के महत्व और भगवान को प्राप्त करने के तरीकों पर चर्चा की. प्रवचन में एक चरवाहे की कहानी सुनाई गई जो 'ओम गोविंदाय नमः' मंत्र भूल गया और 'ओम गप्पू जी नमः' बोलने लगा, लेकिन उसकी सच्ची भक्ति और भाव के कारण भगवान कृष्ण प्रसन्न हो गए. प्रवचन में बताया गया कि भगवान भाव के भूखे हैं और प्रेम लक्षणा भक्ति के पांच लक्षण हैं - अनन्य भाव, प्रेमपूर्वक भाव, निष्काम भाव, अहर्निश ध्यान और संपूर्ण समर्पण. हनुमान चालीसा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि सौ बार पाठ से बंधन से मुक्ति मिलती है. तुलसीदास जी और हनुमान जी की मुलाकात की कथा भी सुनाई गई, जिसमें बताया गया कि गुरु कृपा से भगवान की प्राप्ति होती है. मीराबाई, प्रहलाद, सूरदास जैसे भक्तों का उदाहरण देते हुए सच्ची भक्ति का मार्ग बताया गया.
हरिद्वार के श्री राधा रसिक बिहारी मंदिर में अखण्ड परशुराम अखाड़े के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने एकत्रित होकर विशेष पूजा-पाठ किया. इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों और क्रिकेट प्रेमियों की भीड़ देखने को मिली. सभी ने भारतीय टीम की जीत के लिए भगवान से प्रार्थना की और टीम इंडिया के समर्थन में जयकारे लगाए.
Rang Panchami 2026: रंग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं. चौकी पर राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. इसके बाद भगवान को पुष्पमाला पहनाएं और नए वस्त्र अर्पित करें.
अच्छी बात के इस एपिसोड में वृंदावन के पास एक गरीब लड़की लक्ष्मी की कथा सुनाई गई है. आठ साल की उम्र में भागवत कथा सुनकर लक्ष्मी ने बाल मुकुंद की मूर्ति को अपना भाई मानकर सेवा शुरू की. सौतेली मां के अत्याचारों के बावजूद उसने भगवान की भक्ति जारी रखी. विवाह के बाद जब वह पहली बार वृंदावन आई तो यमुना किनारे एक बालक ने उसका घूंघट उठाया, बाद में बांके बिहारी मंदिर में उसे पता चला कि वही बालक साक्षात बांके बिहारी जी थे. प्रवचन में हनुमान जी, राम जी और पांडुरंग विट्ठल की भक्ति का भी उल्लेख है. देखिए अच्छी बात.
होली के पावन अवसर पर आयोजित एक भव्य संगीतमय कार्यक्रम की झलकियां हैं. 'आज बिरज में होली रे रसिया' और 'होली खेले रघुवीरा अवध में' जैसे पारंपरिक और लोकप्रिय होली गीत गाए जा रहे हैं. वहां मौजूद श्रद्धालु इन भजनों पर झूमते और 'होली है' के जयकारे लगाते नजर आ रहे हैं. देखिए अच्छी बात.
Holi Stubborn Color Remedies: होली रंगों का त्योहार है. इस दिन लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल और रंग लगाते हैं लेकिन रंग खेलते समय अपनी त्वचा का भी विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है. आपकी जरा सी लपरवाही स्किन को खराब कर सकती है. आइए जानते हैं होली पर रंग खेलने के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है.