गणेश उत्सव की तैयारी के लिए मूर्ति खरीदने पहुंचे प्रशांत ने बताया कि बाजार में भगवान गणेश की कई खूबसूरत प्रतिमाएं देखने को मिलीं, लेकिन शिवलिंग के साथ गणेश की एक प्रतिमा उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आई.
प्रवचन के दौरान जीवन में ईश्वर की प्राप्ति और रोजमर्रा की परेशानियों से निपटने के तौर-तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई. इसमें कहा गया कि परमात्मा को बाहर खोजने के बजाय अपने भीतर अनुभव करने की आवश्यकता है, जैसे बादलों के हटने पर सूर्य का प्रकाश दिखाई देने लगता है. जीवन में समस्याओं का क्रम कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए हर परिस्थिति में शांत और सकारात्मक रहकर ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए. संकट के समय विचलित होने के बजाय धैर्य से काम लेने और हर स्थिति में मुस्कुराते रहने की सलाह दी गई. इसके साथ ही बताया गया कि किसी भी धमकी या बाधा से डरे बिना अपने लक्ष्य और भक्ति पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए. जीवन के प्रश्नों के उत्तर खोजने के बजाय व्यक्ति को स्वयं समाधान बनने का प्रयास करना चाहिए.
गणेश चतुर्थी पर लोग मूर्ति खरीदते वक्त कई बातों का ध्यान रखते हैं. उन्हीं में से एक है गणपति के सूंड की स्थिति. लोगों के मन में ये सवाल अकसर आता रहता है कि गणेश जी की सूंड किस ओर रहनी चाहिए.
हरतालिका तीज शुक्ल पक्ष की तृतीया और गणेश चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को होती है. इस साल तृतीया तिथि 14 सितंबर की सुबह करीब 7:06 बजे तक है और इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाती है, इसलिए कैलेंडर में दोनों त्योहार एक ही तारीख पर दिखाई दे रहे हैं.
जैन धर्म का प्रमुख पर्व पर्युषण 8 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं पर्युषण पर्व कब से कब तक चलेगा और इस दौरान किन नियमों का पालन किया जाता है.
मूर्तिकारों के लिए ये सिर्फ रोज़गार का जरिया नहीं… बल्कि आस्था और कला को एक साथ पेश करने का मौका भी है. दो बहनें 20 साल से एक साथ गणेश प्रतिमा तैयार कर रही हैं. पहले ये काम उनके पिता करते थे लेकिन उनके गुजरने के बाद दोनों बहनों ने मोर्चा संभाल रखा है.
जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में 9 दिवसीय गणेश चतुर्थी महोत्सव की भव्य शुरुआत हो चुकी है. ये आयोजन खास रहने वाला है, क्योंकि 7 से 15 सितंबर तक पूरा माहौल भक्तिमय हो जाएगा, जिसके चलते श्रद्धालुओं को खूब आनंद आने वाला है.
गणपति स्थापना के बाद रोज सुबह और शाम पूजा-अर्चना और आरती करना परंपरा का हिस्सा है. पूजा के दौरान दीपक जलाएं, फूल और दूर्वा अर्पित करें और भगवान गणेश की आरती करें.
भारतीय परंपरा में 'सोलह श्रृंगार' केवल रूप-सौंदर्य तक सीमित नहीं है. धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिर से पैर तक धारण किए जाने वाले ये आभूषण ग्रहों को मजबूती प्रदान करते हैं, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं और सेहत को संतुलित रखते हैं.
एक प्रवचन के दौरान सांसारिक बंधनों, मानवीय मोह और भक्ति के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई. इस दौरान ऊंट के दृष्टांत के जरिए समझाया गया कि मनुष्य अपने मन में गढ़े गए काल्पनिक बंधनों और झूठे रिश्तों में उलझकर रह जाता है. इन बंधनों से मुक्ति का सबसे सरल मार्ग परमात्मा से नाता जोड़ना और देह के प्रति अहंता को त्यागना बताया गया. जीवन जीने का सहज सूत्र देते हुए कहा गया कि व्यक्ति को तन से सांसारिक रहते हुए भी मन से संन्यासी की तरह विरक्त भाव में रहना चाहिए. इसके साथ ही यह संदेश दिया गया कि अज्ञान के अंधकार को केवल ज्ञान और भक्ति के प्रकाश से ही दूर किया जा सकता है. जिस प्रकार बिना पानी के नदी और बिना मिठास के मिठाई का कोई अर्थ नहीं होता, उसी प्रकार ईश्वर की भक्ति और इंसानियत के बिना मानव जीवन व्यर्थ है. अंत में बच्चों को केवल उच्च शिक्षा और डिग्रियां दिलाने के बजाय उन्हें श्रेष्ठ संस्कार देने पर विशेष बल दिया गया.
एक तरफ इंजीनियरिंग की डिग्री, आकर्षक करियर और मोटी सैलरी वाली नौकरी का मौका था, तो दूसरी तरफ अध्यात्म का मार्ग. ऐसे में कोई भी इंसान अच्छी और सुलभ जिंदगी चुनेगा. लेकिन ये अनोखी कहानी आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या पैसा ही सब कुछ है या आत्मा की शांति भी जरूरी है.