बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी कथा के दौरान हनुमान जी के जीवन से पांच महत्वपूर्ण शिक्षाएं साझा कीं. उन्होंने बताया कि जीवन में मंगल लाना, कार्य में डटे रहना, दूसरों को अच्छे कार्यों से जोड़ना, समाज को जोड़ना और विनम्रता अपनाना ही हनुमान जी की सच्ची भक्ति है. शास्त्री जी ने राजा सुकुंत की पौराणिक कथा के माध्यम से समझाया कि कैसे हनुमान जी ने भगवान राम के प्रण के बावजूद शरणागत की रक्षा की. उन्होंने कहा, 'जिसकी गारंटी हनुमान जी ले लें उसे कोई मार नहीं सकता, स्वयं राम जी भी नहीं. देखिए अच्छी बात.
Magh month: भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित माघ महीने का आरंभ 4 जनवरी से हो गया है और इसका समापन 1 फरवरी 2026 को होगा. ज्योतिष के मुताबिक माघ के पूरे महीने में स्नान-दान और उपवास से इंसान के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य बढ़ता ही चला जाता है. आइए माघ माह की महिमा जानते हैं.
Sakat Chauth 2026 Date and Time: सकट चौथ के दिन भगवान गणेश, चंद्र देव और मां सकट की आराधना की जाती है. इस दिन माताएं संतान की प्राप्ति और पुत्र की लंबी आयु की कामना करती हैं. सुख-समृद्धि के लिए सकट चौथ का व्रत रखती हैं. आइए जानते हैं 6 या 7 जनवरी, कब है सकट चौथ?
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रभु श्री राम के महान चरित्र और राम राज्य की अवधारणा पर प्रकाश डाला. उन्होंने रावण और मंदोदरी के बीच के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि 'जब मैं राम बनकर जाता हूँ तो तुमको छोड़कर बाकी स्त्रियां मुझे बहन के समान नजर आती हैं.' शास्त्री ने जोर देकर कहा कि राम राज्य में स्त्रियों को भोग्या नहीं बल्कि पूज्य माना जाएगा. उन्होंने पंचकूला के एक शिष्य का उदाहरण देते हुए हास्य के माध्यम से समझाया कि कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होती है. उन्होंने जीवन की नश्वरता पर चर्चा करते हुए कहा कि मृत्यु के बाद केवल कर्मों की कमाई ही साथ जाती है, धन-दौलत या परिवार नहीं. शास्त्री ने श्रोताओं को प्रेरित किया कि वे भगवान के चरणों में ध्यान लगाएं क्योंकि जीवन का कोई भरोसा नहीं है.
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निहंग सिंह संप्रदाय से मुलाकात की. सीएम सैनी ने कहा कि निहंग सिंह संप्रदाय नई पीढ़ी को गुरु साहिबान के आदर्शों से जोड़ें. उन्होंने कहा कि निहंग सिंह जहां खड़े हुए, वहां अधर्म नहीं ठहरा. उन्होंने कहा कि कभी समृद्ध रहा पंजाब आज कर्ज में डूबा है.
Shri Ram Raksha Stotra: राम रक्षा स्रोत का पाठ काल के गाल में समाए व्यक्ति को भी वापस लाने की क्षमता रखता है. इसके नियमित पाठ से न केवल अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है. राम रक्षा स्रोत का पाठ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और हर प्रकार की विपत्ति से रक्षा करता है. जानिए इसके ज्योतिषीय उपाय और चमत्कारी लाभ.
What is a Wolf Supermoon: खगोलविदों के अनुसार जनवरी महीने की पहली पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा जाता है. इसके पीछे एक ऐतिहासिक कारण है. प्राचीन काल में कड़ाके की ठंड के दौरान उत्तरी गोलार्ध में भेड़ियों के झुंडों की आवाजें अधिक सुनाई देती थीं, इसी वजह से इस पूर्णिमा को वुल्फ मून नाम दिया गया.
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए उन्हें प्रभु राम का 'पोस्टमैन' बताया है. उन्होंने कहा, 'हनुमान जी ही एक ऐसे देवता हैं जो तुम्हारी खबर राम जी तक और राम जी की खबर तुम तक ला सकते हैं.' शास्त्री जी ने कथा में पांच प्रमुख प्रसंगों का उल्लेख किया जहां हनुमान जी ने सेतु का कार्य किया, जिनमें सुग्रीव, विभीषण, माता जानकी, राजा सुकंत और गोवर्धन पर्वत की कथा शामिल है. उन्होंने विशेष रूप से गोवर्धन पर्वत का प्रसंग सुनाया कि कैसे हनुमान जी के माध्यम से उसे द्वापर युग में भगवान कृष्ण के दर्शन और उनकी उंगली पर स्थान पाने का वरदान मिला. उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि 'माया के गुलाम मत बनो, माधव के गुलाम बनो' क्योंकि सच्ची भक्ति से ही ईश्वर को पाया जा सकता है. शास्त्री जी ने जोर दिया कि इंसान साधनों से नहीं बल्कि साधना और उच्च आचरण से महान बनता है. अंत में उन्होंने कहा कि यदि युवा हनुमान जी के चरित्र को अपनाएं तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता.
साल 2026 की पहली पूर्णिमा पौष माह में 3 जनवरी को है. पौष महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा कहते हैं. पौष पूर्णिमा पर सूर्यदेव और चंद्रमा भगवान की उपासना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मोक्ष का वरदान मिलता है. इस दिन स्नान, दान और मंत्र जाप का विशेष महत्व है.
Magh Mela Sacred Bath Dates: प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक माघ मेला का आयोजन किया जाएगा. माघ मेले में साधु-संत से लेकर देश-विदेश से श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं. आइए जानते हैं पवित्र स्नान की प्रमुख तिथियां क्या-क्या हैं?
Kalpavas Rules: प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर कल्पवास की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है. कल्पवास एक पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें व्यक्ति संयम, तप और साधना का पालन करता है. कल्पवास में श्रद्धालु पूरे दिन में एक बार भोजन करते हैं और तीन बार स्नान. सुबह गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना से दिनचर्या शुरू होती है. आइए जानते हैं कल्पवास के 21 नियम क्या हैं?