बिना वजह लगातार थकान, चिड़चिड़ापन और काम में मन न लगना डिप्रेशन या एंग्जायटी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. दिल्ली के सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. गौरव गुप्ता के अनुसार, यदि ये लक्षण 2 सप्ताह से अधिक रहें, तो विशेषज्ञ से सलाह लें. बेहतर मानसिक सेहत के लिए क्या कुछ जरूरी है, उसपर जानें डॉक्टर की सलाह.
समस्तीपुर में फ्री मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया. इसमें सैकड़ों गरीब मरीजों के इलाज मुफ्त में किया गया. फ्री में दवाइयां भी दी गईं. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री डॉक्टर राजभूषण चौधरी ने भी मरीजों का इलाज किया. जनरल फिजिशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ के साथ आंख-कान और नाक के डॉक्टर भी मौजूद रहे.
हरियाणा के रोहतक PGIMS में एक 8 साल का बच्चा पिछले 23 महीने से भर्ती था. जब वो अस्पताल लाया गया था तो उसके हाथ-पैर काम नहीं कर रहे थे, वो बेहोशी की हालत में था. लेकिन 2 साल तक डॉक्टरों ने उसका इलाज किया. इतना ही नहीं, डॉक्टरों की टीम ने मरीज की आर्थिक मदद भी की, क्योंकि बच्चे के पिता की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी.
हमारी आंखें सिर्फ देखने के लिए ही नहीं होती हैं, बल्कि शरीर की कई अंदरूनी स्थितियों और बीमारियों के संकेत भी देती हैं. इन्हें सुरक्षित रखने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करना जरूरी है.
यूपी के कानपुर में डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन करके एक मरीज की जान बचा ली. दरअसल वो मरीज पाइल्स का शिकार था. लेकिन झोलाछाप डॉक्टर की सलाह पर वो गर्म पत्थर से उसकी सिकाई कर रहा था. पत्थर उसके गुप्तांग में चला. हालांकि डॉक्टरों ने ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचा ली.
यह पूरी घटना ने तब चर्चा में आई जब रूस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोशल मीडिया पर पहले लिखा कि शिपिलोवा की मौत प्लेग से हुई है. हालांकि, कुछ ही देर बाद पोस्ट को एडिट करके उसमें संभवतः शब्द जोड़ दिया गया.
रोज की डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना जरूरी है. हालांकि, हर व्यक्ति को एक जैसी मात्रा में प्रोटीन की जरूरत नहीं होती. उम्र, वजन और शारीरिक गतिविधि के हिसाब से इसकी जरूरत बदलती रहती है. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर उम्र के हिसाब से कितना प्रोटीन लेना चाहिए.
दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों को बेचे जाने वाले मूल्य के बीच बड़े अंतर तथा अस्पताल फार्मेसियों में कीमत संबंधी जानकारी की पारदर्शिता की कमी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश (यूपीएफएसडीए) ने महत्वपूर्ण पहल की है.
इसके लागू होने के बाद ओपीडी में इलाज कराने वाले ऐसे मरीज, जिन्हें टेस्ट की जरूरत पड़ती है, वे निजी लैब से किफायती दर पर अपना टेस्ट करा सकेंगे और समय पर अपनी बीमारी का इलाज शुरू कर सकेंगे.
सूरत में एक ब्रेनडेड महिला का अंगदान किया गया. इससे 5 लोगों को नया जीवन मिलेगा. मंजुलाबेन की फैमिली ने किडनी, लिवर और आंखें दान की. मंजुलाबेन सड़क हादसे में घायल हुई थी, जिसके बाद उनको ब्रेनडेड घोषित किया गया था.
कई बार लोग दफ्तर से वर्क फ्रॉम होम ले लेते हैं. लेकिन इस दौरान वह काम तो करते हैं, पर अपने शरीर को नुकसान भी पहुंचाते हैं. गलत तरीके से बैठना, गलत तरीके से खाना-पीना. इस सबका का गहरा असर उनके शरीर पर पड़ता है.