अगर आप किसी जगह ट्रैवल करने की सोच रहे हैं, और फ्लाइट और ट्रेन के 1AC का किराया दोनों ही बराबर है, तो मन में सवाल पैदा हो सकती है कि आखिर किससे ट्रैवल करें. जहां फ्लाइट जल्दी पहुंचाती है, तो वहीं ट्रेन प्राइवेसी देती है. ऐसे में फैसला लेना मुश्किल हो जाता है.
15 अगस्त का दिन कई लोग केवल छुट्टी के तौर पर घर में रहकर बिताते हैं. लेकिन आप इस दिन राजधानी की कई खास जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं, जो सीधा स्वतंत्रा के संबंध रखती है. परिवार के साथ इन जगहों पर समय बिताने से यह दिन आप लिए काफी खास हो जाएगा.
भारतीय रेलवे में 3AC और 3E दोनों AC कोच होते हैं, लेकिन दोनों में बर्थ की संख्या, जगह और किराए में अंतर होता है. टिकट बुक करने से पहले जानिए 3AC और 3E में क्या फर्क है और आपके लिए कौन सा कोच बेहतर रहेगा.
15th August Delhi Metro Timing: DMRC ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने वाले लोगों और आम यात्रियों को बड़ी राहत दी है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को दिल्ली मेट्रो की सेवाएं तड़के 4 बजे से ही शुरू हो जाएंगी. शुरुआती घंटों में ट्रेनें हर 30 मिनट के अंतराल पर चलेंगी. यहां आप दिल्ली मेट्रो का शेड्यूल जान सकते हैं.
आईआरसीटीसी एक शानदार हवाई टूर पैकेज लेकर आया है. यह पैकेज 4 रात एवं 5 दिन का है. इसमें उज्जैन, ओम्कारेश्वर, महेश्वर, मांडू और इंदौर का भ्रमण कराया जाएगा. यहां आप इस टूर पैकेज के बारे में जान सकते हैं.
मंत्रालय का कहना है कि सफर शुरू होने से पहले एक्स्ट्रा पेमेंट के लिए इस तरह के मैसेज मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 के नियमों का उल्लंघन करते हैं.
पहाड़ी इलाकों में मौसम अचानक बदलने के साथ ही तेज बारिश, भूस्खलन, सड़क बंद होने और अचानक बढ़ते जलस्तर जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसे में अगर आप बारिश के मौसम में पहाड़ों घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
DMRC के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो की सबसे बड़ी खासियत इसकी समय की पाबंदी है. 2003 में दिल्ली मेट्रो की 98.27 फीसदी ट्रेनें समय पर चलती थीं. साल 2005 में यह आंकड़ा बढ़कर 99.64 फीसदी हो गया. इसके बाद से दिल्ली मेट्रो ने लगातार 99.9 फीसदी से ज्यादा समय पर ट्रेन चलाने का रिकॉर्ड बनाए रखा है.
भारतीय रेलवे में साल 1989 से 2010 तक लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों के लिए चार अंकों वाली नंबरिंग व्यवस्था इस्तेमाल होती थी. इन्हें यूनिवर्सल नंबर कहा जाता था.
सावन का पवित्र माह चल रहा है. बाबा बैद्यनाथ धाम जाने के लिए हर दिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर कांवड़ियों की भीड़ उमड़ रही है. पूरा स्टेशन परिसर बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज रहा है. कोई दशकों से तो कोई कई पीढ़ियों से इस कावड़ यात्रा में शामिल हो रहा है.
कई बार लोग स्लीपर का टिकट लेकर एसी कोच में सीट देख बैठ जाते हैं. वह सोचते हैं कि अगर सीट खाली है तो वह वहां बैठ सकते हैं और कोई उन्हें कुछ नहीं कहेगा. लेकिन रेलवे के नियम इसको लेकर कुछ और ही कह सकते हैं.