शनि को नवग्रहों में सेवक कहा जाता है. शनि को न्याय का अधिपति भी कहा जाता है. यह अनुशासन और कठोरता का ग्रह माना जाता है. यह कानून, नौकरी, तकनीक और संघर्ष से संबंध रखता है. इसके शुभ योग जीवन को प्रगति की ओर ले जाते हैं. हालांकि इसके शुभ योगों का प्रभाव थोड़ा विलम्ब से होता है. शनि वायु तत्व का सबसे प्रमुख ग्रह है. शनि दो राशियों मकर और कुंभ का स्वामी है. मकर पृथ्वी तत्व की और कुंभ वायु तत्व की राशि है. मकर राशि के लिए शनि धन और सम्पन्नता देता है जबकि कुंभ राशि के लिए ज्ञान और अध्यात्म देता है. शनि कुंभ राशि के ज्यादा निकट माना जाता है.
शनि की पहली राशि है मकर: इस पृथ्वी तत्व की राशि का स्वामी शनि है. इस राशि पर शनि और बुध, दोनों का प्रभाव होता है. बुध व्यक्ति को बुद्धिमान बना देता है. यह राशि व्यक्ति को चालाक, मौकापरस्त और धनवान बना देती है. इस राशि के लोग अपने विषय में माहिर होते हैं. यह राशि करियर और रोजगार को सीधा प्रभावित करती है. इस राशि की सबसे बड़ी कमजोरी अहंकार है. इस राशि के लोगों को सलाह लेकर एक पन्ना धारण करना चाहिए. इस राशि के लोगों के लिए सूर्य की उपासना फलदायी होती है.
शनि की दूसरी राशि है कुंभ: इस राशि का स्वामी शनि ही है इसलिए इनका जीवन शनि पर ही निर्भर करता है. इनके अंदर आध्यात्म अंतर्ज्ञान और कला के गुण होते हैं. ये लोग समाज के एक बड़े वर्ग को सीधा प्रभावित करते हैं. आम तौर पर सही दिशा मिलने पर ये जीवन में विशेष हो जाते हैं. इनकी सबसे बड़ी कमजोरी लापरवाही है. इनको नियमित रूप से शिव जी की उपासना करनी चाहिए. साथ ही गलत आदतों में पड़ने से बचना चाहिए.
आपकी राशि मकर है और जीवन में समस्या आ रही है तो क्या उपाय करें: इनको हमेशा करियर तथा परिवार में संतुलन रखना चाहिए. स्वास्थ्य के मामलों में लापरवाही नहीं करनी चाहिए. जीवन में बड़े जोखिम लेने से बचना चाहिए. इनको अधिक से अधिक शनि मन्त्र का जप करना चाहिए. साथ ही यथाशक्ति निर्धनों की सहायता करनी चाहिए.
आपकी राशि कुंभ है और जीवन में समस्या आ रही है तो क्या उपाय करें: इनको अपने आलस्य और लापरवाही से बचना चाहिए. एक साथ बहुत सारे कामों में हाथ नहीं डालना चाहिए. जीवन में जितना आध्यात्मिक होंगे, उतना ही उत्तम होगा. नियमित उपवास रखने और दान करने से लाभ होगा.
शश योग: यह शनि का पंचमहापुरुष योग है. शनि अगर कुंडली में मकर, कुम्भ या तुला राशि में हो तो यह योग बन जाता है. इसके लिए शनि लग्न से केंद्र में होना चाहिए. व्यक्ति को अपार धन संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. व्यक्ति बहुत निम्न स्तर से उठकर ऊंचाइयों तक पहुंच जाता है. यह योग व्यक्ति को धनवान तो बनाता है, लेकिन संघर्ष के बाद. अगर कुंडली में यह योग हो तो अपने से छोटों का हमेशा सम्मान करें.
सप्तमस्थ शनि: शनि सप्तम भाव में दिग्बली हो जाता है. यहां पर बैठा हुआ शनि सामान्यतः व्यक्ति को धनवान बनाता है. हालांकि यह शनि व्यक्ति के विवाह में विलम्ब भी करता है. इस शनि के होने पर व्यक्ति कर्मठ और अपने परिश्रम से बढ़ने वाला होता है. ऐसे शनि वाले लोगों का भाग्य विवाह के बाद उदित हो जाता है. इस शनि के होने पर नियमित रूप से शनि देव की पूजा करनी चाहिए.