Janma Nakshatra: ज्योतिष शास्त्र में ग्रह और नक्षत्रों के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसमें नौ ग्रह और 27 नक्षत्र बताए गए हैं. ग्रह और नक्षत्रों के आसपास ही इंसान के जीवन की कहानी घूमती है. इसी के आधार पर कुंडली बनाई जाती है. ग्रह और नक्षत्र इंसान के भाग्य और व्यक्तित्व के बारे में बताते हैं. लोग बच्चे के जन्म से पहले और बाद में ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति के बारे में जानते हैं. वैसे तो सामान्य स्थितियों में जन्म का समय निर्धारित नहीं किया जा सकता लेकिन अगर अवसर मिले तो सोच-समझकर समय का चुनाव करना चाहिए. किसी बच्चे का जन्म अगर मध्य दोपहर या मध्य रात्रि में हो तो सर्वोत्तम माना जाता है. सूर्यास्त के समय का जन्म, बच्चे के लिए कदापि अच्छा नहीं होता. ऐसे बच्चे को जीवन भर उतार-चढ़ाव झेलना पड़ता है. साथ ही स्वास्थ्य की समस्याएं लगी रहती हैं.
क्या बच्चे का जन्म नक्षत्र भी है महत्वपूर्ण
पंडित शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि बच्चे के जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही बच्चे का जन्म नक्षत्र होता है. बच्चे के जन्म के लिए चार नक्षत्र अश्विनी नक्षत्र, भरणी नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र और मघा नक्षत्र बहुत ही शुभ बताए गए हैं. अगर बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में है तो विशेष सावधानी रखें . मूल नक्षत्र में होने पर बच्चे के स्वास्थ्य तथा मानसिक स्थिति में समस्या आ सकती है. ऐसी स्थिति में तुरंत ही मूल नक्षत्र की शांति करवानी चाहिए.
बच्चे का चंद्रमा कितना होता है महत्वपूर्ण
बच्चे के चन्द्रमा से बचपन में उसके आयु तथा स्वास्थ्य का निर्धारण होता है. अगर चन्द्रमा खराब स्थानों में है तो बच्चे को शुभ परिणाम नहीं देगा. अगर चन्द्रमा बालारिष्ट योग बना रहा है तो यह बच्चे के आयु के लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसे में बच्चे की आयु रक्षा और स्वास्थ्य के लिए उपाय करना चाहिए.
बच्चे का नाम कितना है महत्वपूर्ण
बच्चे की राशि का जो अक्षर है, उससे बच्चे का नाम न रखें. बच्चे की कुंडली में जो ग्रह मजबूत है, उसके अक्षर से बच्चे का नाम रखना अनुकूल होगा. जिन नामों का कोई अर्थ न हो ऐसे नाम बिलकुल न रखें. अगर देवी-देवता के नाम पर बच्चे का नाम रखते हैं तो नाम के उच्चारण में सावधानी रखें.