Immunity: क्या होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता, इसे ज्योतिष से कैसे समझें? यहां जानिए

रोग प्रतिरोधक क्षमता लग्न से सम्बन्ध रखती है. ज्योतिष में सूर्य, चन्द्रमा और मंगल सीधे तौर से रोग प्रतिरोधक क्षमता से सम्बन्ध रखते हैं. राहु केतु और शनि रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:15 AM IST

प्रतिरक्षा प्रणाली में शरीर के अंग, कोशिकाएं और अन्य हिस्से शामिल होते हैं. ये मानव शरीर को सही तरीके से काम करने में सहायता करते हैं. साथ ही मानव शरीर को बीमारियों से लड़ने में सहायता करते हैं. ये तभी सही काम करके व्यक्ति को स्वस्थ रख सकते हैं, जब रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो. पंडित शैलेंद्र पांडेय ने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता लग्न से सम्बन्ध रखती है. ज्योतिष में सूर्य, चन्द्रमा और मंगल सीधे तौर से रोग प्रतिरोधक क्षमता से सम्बन्ध रखते हैं. राहु केतु और शनि रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं. अलग-अलग लग्नों के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग-अलग तत्वों के अनुसार अलग-अलग होती है. 

अग्नि तत्व: मेष, सिंह और धनु लग्न 
आम तौर पर इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्तम होती है. ये आम तौर पर कम बीमार होते हैं. इनको चोट-चपेट ज्यादा लगती है. अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए एक माणिक्य धारण करें. 

जल तत्व: कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न 
इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. ये बहुत जल्दी इन्फेक्शन के शिकार हो जाते हैं. कुछ न कुछ बीमारी इनको लगी रहती है. अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता लिए एक देसी मूंगा धारण करें. 

पृथ्वी तत्व: वृष, कन्या और मकर लग्न 
इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है. सामान्यतः ये जल्दी बीमार नहीं होते. इनको लाइफस्टाइल से सम्बंधित समस्याएं हो जाती हैं. वैसे इनको पेट, हड्डियों और लिवर का ध्यान रखना चाहिए. अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए एक पन्ना धारण करें.

वायु तत्व: मिथुन, तुला और कुम्भ लग्न 
इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मिश्रित होती है. सामान्यतः इनको जल्दी इन्फेक्शन हो जाता है. इनको वहम, चिन्ता और मानसिक समस्याएं होती हैं. अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए एक ओपल धारण करना लाभकारी होगा. 

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के सरल और अचूक उपाय 
1. नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करें. 
2. सूर्य की रोशनी में कुछ देर जरूर बैठें.
3. प्रातः खाली पेट गिलोय का सेवन करें.
4. ताम्बे के पात्र से जल पीने का प्रयास करें.
5. भोजन हमेशा शांत और प्रसन्न मन से करें.
6. प्रातः काल उठने के तुरंत बाद और रात्रि में सोने के पूर्व प्रार्थना जरूर करें. 


 

 

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