Advertisement

Rahu-Ketu: कौन हैं राहु और केतु, इनका हमारे जीवन पर क्या शुभ और अशुभ पड़ता है प्रभाव, यहां जानिए सबकुछ 

राहु और केतु को नवग्रहों में छाया ग्रह कहा जाता है. यदि कुंडली में राहु-केतु की दशा हो तो व्यक्ति के जीवन में तरह-तरह की परेशानियों शुरू हो जाती है. ज्योतिष शास्त्र में भी इससे बचने के उपाय बताए गए हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं.

Rahu-Ketu
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:27 PM IST

राहु और केतु को नवग्रहों में छाया ग्रह कहा जाता है. सूर्य और चन्द्रमा के कटाव बिन्दुओं से इनका निर्माण होता है. सूर्य और चन्द्रमा पर ही जीवन आधारित है अतः इनके कटाव बिन्दु भी काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं. इनका प्रभाव अत्यन्त रहस्यमयी होता है और अक्सर समझ नहीं आता. ये छाया की तरह हर ग्रह के प्रभाव को कमजोर कर देता है. ये जीवन के जिस भाग पर असर डालता है उसमे विचित्र तरह की समस्या हो जाती है. यदि कुंडली में राहु-केतु की दशा हो तो व्यक्ति के जीवन में तरह-तरह की परेशानियों शुरू हो जाती है.  

राहु किस तरह व्यक्ति पर डालता है असर: राहु व्यक्ति के अन्दर नकारात्मक ऊर्जा भर देता है. व्यक्ति की सोच, खान-पान आदि दूषित हो जाते हैं. ऐसे लोग फास्ट फूड, शीतल पेय और नशे के आदी हो जाते हैं. इनकी जीवनचर्या बिल्कुल अनिश्चित होती है. 

राहु व्यक्ति के काम और रोजगार पर किस तरह डालता है असर: ऐसे लोग आकस्मिक धन कमाने के चक्कर में रहते हैं. लॉटरी, शेयर बाजार और जुए-सट्टे में लग जाते हैं. इन्हे इलेक्ट्रिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीक और शराब आदि के व्यवसाय में भी देखा जाता है. काम कुछ भी हो पर इन्हें बार-बार उतार-चढ़ाव और बदलाव का सामना करना पड़ता है. 

राहु पारिवारिक जीवन पर कैसे डालता है असर:  पारिवारिक जीवन अच्छा नहीं होता. अक्सर विवाह तनाव का कारण बनता है. एक से ज्यादा विवाह होने की सम्भावना होती है. विवाहेत्तर सम्बन्ध भी हो जाते हैं. पारिवारिक संपत्ति या तो नहीं मिलती या मुकदमों में फंस जाती है. संतान उत्पत्ति में देरी होती है और एक संतान समस्या का कारण बनती है. 

राहु किस तरह की देता है बीमारियां: त्वचा और मुंह के गंभीर रोग होने की सम्भावना. मूत्र रोग और कल्पना की बीमारियां. ऐसे लोगों को बड़ी बीमारियों के होने का वहम होता रहता है. कोई भी ऐसी बीमारी जो पकड़ में न आ रही हो. 

राहु की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए क्या करें
अपने आहार-विचार और व्यवहार का ध्यान रखें. नियमित रूप से स्नान करें, साफ-सफाई का ध्यान रखें. नित्य प्रातः और सायं शिव जी की उपासना करें. तुलसी और चन्दन का प्रयोग जरूर करें. पूजा स्थान को साफ सुथरा रखें. सलाह लेकर एक मोती या माणिक्य धारण करें. 

क्या है केतु ग्रह और क्या है ज्योतिष में इसका महत्व 
केतु को ज्योतिष में एक छाया ग्रह माना जाता है. इसकी परिकल्पना सूर्य और चन्द्रमा के आपसी संबंधों से की गयी है. सामान्यतः अकेले होने पर इसका स्वभाव मंगल की तरह माना जाता है. इसका गुण यह है कि जिस भी ग्रह के साथ बैठता है उसकी शक्तियों में वृद्धि कर देता है. गूढ़ज्ञान, आध्यात्म, मोक्ष, तंत्र-मंत्र,आकस्मिक परिणाम, हिंसा और विस्फोट का कारक होता है. व्यक्ति के जीवन के ऐसे रहस्य, जिनका सम्बन्ध पूर्व जन्म से है, केतु ही खोल सकता है किसी भी व्यक्ति की संपूर्ण क्षमताओं को प्रयोग करने के लिए केतु की तरफ जाना पड़ेगा.

कैसे जानें कि केतु हमारे जीवन में दे रहा खराब परिणाम: व्यक्ति का व्यक्तित्व उदास और मलिन सा हो जाता है. उसके अन्दर ऊर्जा का अभाव दिखता है. चीजों से मन भागने लगता है. स्नान करने की इच्छा समाप्त हो जाती है. रक्त सम्बंधित समस्याएं पैदा होती हैं. दुस्वप्न आने लगते हैं. ईश्वर और आध्यात्म से मन विमुख हो जाता है. व्यक्ति भोगवादी होने लगता है. देर से सोने और देर तक सोने की आदत पड़ जाती है. व्यक्ति से गलतियां होती हैं और व्यक्ति उनको खूब छिपाता भी है. 

केतु शुभ परिणाम दे तो क्या होता है
व्यक्ति शुरुआत में लापरवाह परन्तु बाद में अनुशासित हो जाता है. व्यक्ति का उच्चारण अच्छा होता है. व्यक्ति धार्मिक स्थान पर यात्रा करना पसंद करता है. व्यक्ति को अल्प आयु से ही धर्म आद्यात्म तथा गूढ़ विद्याओं में झुकाव हो जाता है. अगर ऐसे व्यक्तियों को सही मार्गदर्शन मिले तो इनकी छठवी इन्द्री जग जाती है. वास्तव में केतु अगर थोड़ा भी शुभ फल देता हो तो ऐसे लोग समाज के लिए वरदान होते हैं. बृहस्पति के अच्छा होने पर ऐसा केतु व्यक्ति को विद्वान ज्ञानी और अपूर्व तेजस्वी बनाता है. शनि और मंगल का साथ मिलने पर व्यक्ति साहसी और नायक होता है. 

केतु के दुष्प्रभावों से बचने के उपाय
केतु के तांत्रिक अथवा वैदिक मन्त्रों का जाप करें. शनिवार को काले कम्बल का दान करें. भैरव मंदिर में नारियल अर्पण करें. ज्योतिषीय परामर्श से बृहस्पति अथवा शुक्र का रत्न धारण करें. ब्रह्म मुहूर्त में ही जागें और सूर्य को अर्घ्य दें. नशा बिलकुल न करें. हरे पौधे न काटें. चन्दन, तुलसी दल और केसर का प्रयोग करें. किसी भी जल स्रोत को गन्दा न करें. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement