शयन कक्ष यानी बेडरूम बनाते समय वास्तु के नियमों का पालन करने से उस शयन कक्ष में शयन करने वाले के साथ साथ गृह-स्वामी और परिवार के सभी सदस्य सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करते हैं. वास्तु अनुरूप शयन कक्ष होने पर जातक को नींद अच्छी आती है. इस कारण व्यक्ति मन से स्वस्थ्य अनुभव करता है. परिणामस्वरूप घर में रहने वाले सभी सदस्य सुखी अनुभव करते हैं.
इसी कारण शयन कक्ष के लिए दिशा का चुनाव वास्तु नियमों के आधार पर अवश्य ही करना चाहिए. शयन कक्ष का मुख्य संबंध शुक्र ग्रह से होता है. शुक्र ग्रह को सुख, आराम, सौंदर्य, प्रेम और वैवाहिक आनंद का कारक माना जाता है. अच्छी नींद और मानसिक शांति के लिए शयन कक्ष पर चंद्रमा का भी प्रभाव होता है. कुंडली का बारहवां और छठवां भाव इससे सीधा सम्बन्ध रखता है. शयन कक्ष ठीक होने पर स्वास्थ्य तथा मन की समस्याओं का निवारण शीघ्र होता है. इससे घर में आर्थिक समृद्धि बनी रहती है. घर के लोगों में आपसी तालमेल बना रहता है
शयन कक्ष के रंग और स्थान में किन बातों का ध्यान रखें?
सामान्य रूप से शयन कक्ष घर के नैऋत्य कोण में होना चाहिए. अगर नैऋत्य कोण में ऐसा नहीं कर सकते तो कम से कम पश्चिम दिशा का प्रयोग कर लें. अगर फ्लैट में रहते हैं तो सिर्फ सूर्य के प्रकाश का ध्यान रखें.शयन कक्ष का स्थान नियत होना चाहिए और उसे बार बार न बदलें. शयन कक्ष का रंग हल्का हरा, गुलाबी या श्वेत रखें, गाढ़े रंग से बचें. शयन कक्ष में प्रकाश की अच्छी व्यवस्था जरूर करें.
शयन कक्ष में वस्तुओं के लिए क्या व्यवस्था करें?
शयन कक्ष में बहुत ज्यादा भारी पलंग न रखें. हल्का और उपयोगी पलंग रखें. पलंग ऐसे रखें कि उसका सिरहाना दक्षिण या पूर्व की ओर हो. पलंग के दोनों तरफ साइड टेबल रख सकते हैं. सिरहाने बहुत सारी चीजे खास तौर से इलेक्ट्रॉनिक का सामान न रखें. शयन कक्ष में पानी और फूलों के चित्र लगा सकते हैं. शयन कक्ष में विवाह के समय का या परिवार के लोगों का चित्र लगाएं.
घर के शयन कक्ष में किस तरह की सावधानियों का ध्यान रखें?
शयन कक्ष में गंदगी न रखें. रोज वहां पर साफ-सफाई जरूर करें. शयन कक्ष में देवी-देवताओं और पूर्वजों के चित्र न लगाएं. इस स्थान पर अस्त्र-शस्त्र बिलकुल न रखें. अगर साथ में अटैच बाथरूम है तो बाथरूम का दरवाजा बंद रखें. शयन कक्ष में हल्की सुगंध और उत्तम प्रकाश की व्यवस्था रखें. अपने बिस्तर का प्रयोग हर व्यक्ति को न करने दें. साथ ही हर व्यक्ति को अपने शयन कक्ष में प्रवेश भी न करने दें.