लोन लेते समय चुपचाप जुड़ जाता है इंश्योरेंस, बिल भरते वक्त बढ़ जाता है खर्च, जानिए क्या है Basket Sneaking, जिससे हर साल हजारों करोड़ गंवा रहे भारतीय

Basket Sneaking ऐसा ही एक डार्क पैटर्न है, जिसमें कस्टमर की अनदेखी या जल्दबाजी का फायदा उठाकर अतिरिक्त सेवाएं जोड़ दी जाती हैं.

Basket Sneaking
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली ,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:38 AM IST
  • जानिए क्या है Basket Sneaking
  • डार्क पैटर्न से हर साल 28,000 करोड़ का नुकसान
  • कैसे लोन और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में छिपाकर जोड़ दी जाती हैं एक्स्ट्रा सर्विसेस?

मान लीजिए आपको 5 लाख रुपए का पर्सनल लोन चाहिए. बैंक या फिनटेक ऐप पर आवेदन करते हैं. ब्याज दर ठीक लगती है, EMI भी आपकी क्षमता के अनुसार होती है. आप जल्दी-जल्दी फॉर्म भरते हैं और लोन मंजूर हो जाता है. लेकिन कुछ दिन बाद पता चलता है कि आपके लोन के साथ एक इंश्योरेंस पॉलिसी, प्रोसेसिंग फीस, मेंबरशिप प्लान और कई दूसरी सेवाएं भी जोड़ दी गई हैं. इनका पैसा भी आपसे वसूला जा रहा है.

यहीं से शुरू होता है Basket Sneaking का खेल. यह डार्क पैटर्न का एक ऐसा तरीका है, जिसमें ग्राहक को बिना स्पष्ट जानकारी दिए उसके बिल या खरीदारी में अतिरिक्त सेवाएं और शुल्क जोड़ दिए जाते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक डार्क पैटर्न की वजह से भारत में उपभोक्ताओं को हर साल करीब 28,000 करोड़ रुपए का नुकसान होता है.

क्या होता है डार्क पैटर्न?
डार्क पैटर्न ऐसे डिजाइन या डिजिटल तरीके होते हैं, जिनका इस्तेमाल कंपनियां ग्राहकों को भ्रमित करने या उनसे उनकी इच्छा के बिना कोई फैसला करवाने के लिए करती हैं.

उदाहरण के लिए, कोई ऐप सदस्यता रद्द करने का विकल्प छिपा देता है, कोई वेबसाइट पहले से टिक किए गए बॉक्स के जरिए अतिरिक्त सेवा बेच देती है या फिर कोई प्लेटफॉर्म आखिरी भुगतान पेज पर अचानक अतिरिक्त शुल्क जोड़ देता है. Basket Sneaking इसी श्रेणी का एक प्रमुख डार्क पैटर्न है.

क्या है Basket Sneaking?
आसान भाषा में कहें तो जब कोई कंपनी ग्राहक की जानकारी या स्पष्ट सहमति के बिना उसके कार्ट, बिल या सेवा पैकेज में अतिरिक्त प्रोडक्ट या सर्विस जोड़ देती है, तो इसे Basket Sneaking कहा जाता है.

ग्राहक सोचता है कि वह सिर्फ एक सेवा खरीद रहा है, लेकिन अंतिम भुगतान के समय उसके खाते में कई अतिरिक्त शुल्क जुड़ चुके होते हैं.

लोन और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में कैसे होता है यह खेल?
फाइनेंशियल सेक्टर में Basket Sneaking सबसे ज्यादा देखने को मिलता है.

उदाहरण-1: लोन के साथ इंश्योरेंस
आपने 10 लाख रुपए का होम लोन लिया. आवेदन के दौरान एक छोटा-सा बॉक्स पहले से टिक होता है, जिसमें लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस शामिल होता है. ग्राहक अक्सर इसे पढ़े बिना आगे बढ़ जाता है. बाद में पता चलता है कि उसे हजारों रुपए अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं.

उदाहरण-2: क्रेडिट कार्ड में एड-ऑन सेवाएं
कई बार क्रेडिट कार्ड जारी करते समय कार्ड सुरक्षा योजना, SMS अलर्ट पैक, प्रीमियम सदस्यता या अन्य सेवाएं अपने आप जोड़ दी जाती हैं. ग्राहक को इसकी जानकारी तब मिलती है जब बिल आता है.

उदाहरण-3: निवेश और ट्रेडिंग ऐप्स
कुछ निवेश प्लेटफॉर्म एडवाइजरी पैकेज, रिसर्च सब्सक्रिप्शन या प्रीमियम टूल्स को डिफॉल्ट रूप से जोड़ देते हैं. ग्राहक को बाद में पता चलता है कि उसके खाते से अतिरिक्त राशि कट रही है.

कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?
Basket Sneaking का मुख्य उद्देश्य प्रति ग्राहक ज्यादा कमाई करना होता है. कई कंपनियां जानती हैं कि अधिकांश लोग लंबी शर्तें नहीं पढ़ते. वे जल्दबाजी में पेमेंट कर देते हैं. इसी आदत का फायदा उठाकर अतिरिक्त सेवाएं जोड़ दी जाती हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह प्रक्रिया इतनी सहज बनाई जाती है कि ग्राहक को महसूस भी नहीं होता कि वह किसी एक्स्ट्रा सर्विस के लिए भुगतान करने जा रहा है.

ग्राहकों को कितना नुकसान होता है?

  • नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं होता.

  • ग्राहक अनचाही सेवाओं के लिए भुगतान करता है.

  • लोन की वास्तविक लागत बढ़ जाती है.

  • EMI और कुल भुगतान का बोझ बढ़ता है.

  • सदस्यता रद्द करना मुश्किल हो सकता है.

  • कई बार लोगों को महीनों तक पता ही नहीं चलता कि उनके खाते से अतिरिक्त राशि कट रही है.

Basket Sneaking की पहचान कैसे करें?

  • भुगतान से पहले अंतिम राशि दोबारा जांचें.

  • पहले से टिक किए गए बॉक्स देखें.

  • Recommended या Best Protection जैसे ऑप्शंस को ध्यान से पढ़ें.

  • प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस और अन्य शुल्क की अलग सूची मांगें.

  • EMI और कुल भुगतान राशि का अंतर समझें.


इससे बचने के 5 आसान तरीके
1. हर दस्तावेज पढ़ें: जल्दबाजी में Accept या Proceed पर क्लिक न करें.

2. Final Amount जरूर देखें: भुगतान करने से पहले कुल राशि और शुल्क की जांच करें.

3. Pre-Checked Boxes हटाएं: अगर कोई अतिरिक्त सेवा पहले से चुनी हुई है तो उसे हटाने का विकल्प देखें.

4. सवाल पूछने से न हिचकें: बैंक या कंपनी से पूछें कि कौन-सी सेवाएं अनिवार्य हैं और कौन-सी वैकल्पिक.

5. स्टेटमेंट रोजाना जांचें: बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड और लोन स्टेटमेंट पर नजर रखें ताकि कोई अनचाहा शुल्क तुरंत पकड़ में आ सके.

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