Income Tax Free: टैक्सपेयर्स ध्यान दें! न्यू रिजीम में 14 लाख सैलरी पर भी नहीं लगेगा एक भी रुपया टैक्स... लेकिन कैसे... यहां जानिए 

How to Save Income Tax: यदि आप नौकरी करते हैं और आपको सैलरी में से टैक्स कटने की चिंता सता रही है तो आप इस चिंता को छोड़ दीजिए. हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप 14 लाख रुपए तक की सीटीसी पर भी इनकम टैक्स जीरो कर सकते हैं. टैक्स बचाना है तो तुरंत इस खबर को पढ़ लीजिए.

How to Save Income Tax
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST

हर साल टैक्सपेयर्स (Taxpayers) को इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरना होता है. अधिकांश करदाताओं को टैक्स कटने की चिंता सताते रहती है. यदि आप नौकरी करते हैं और आपको सैलरी में से टैक्स कटने की चिंता सता रही है तो आप इस चिंता को छोड़ दीजिए. हम आपको बता रहे हैं कि कैसे न्यू टैक्स रिजीम अपनाकर आप 14 लाख रुपए तक की सीटीसी (Cost to Company) पर भी इनकम टैक्स जीरो कर सकते हैं.

दरअसल, टैक्सपेयर्स यानी करदाताओं के लिए दो टैक्स रिजीम है. पहला ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) और दूसरा न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime). करदाता दोनों टैक्स रिजीम में से किसी भी एक को चुन सकते हैं. न्यू टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपए तक की सालाना आय (Income) पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. इसके अलावा स्टैंडर्ड डिडक्शन 75000 रुपए मिलता है. उधर, ओल्ड टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपए तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. हालांकि ओल्ड टैक्स रिजीम में ढेर सारी कटौतियां उपलब्ध हैं.

बचा सकते हैं अपनी मोटी सैलरी को 
सही टैक्स प्लानिंग करने पर आप न सिर्फ आज टैक्स बचाएंगे, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा फंड भी तैयार कर पाएंगे. यदि आपकी सीटीसी 14 लाख रुपए है तो भी आप अपनी पूरी सैलरी को टैक्स-फ्री बना सकते हैं. ऐसा आप किसी जुगाड़ से नहीं बल्कि सरकार के नए टैक्स नियमों, स्टैंडर्ड डिडक्शन और कुछ कानूनी छूटों का सही इस्तेमाल कर  ऐसा कर सकते हैं.

न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स में कटौती सिर्फ एम्प्लॉयर यानी नियोक्ता के ईपीएफ (EPF) और एनपीएस (NPS) योगदान पर मिलती है. इस योगदान का सही इस्तेमाल करके टैक्स जीरो किया जा सकता है. आपको मालूम हो कि कर्मचारी का ईपीएफ या एनपीएस निवेश न्यू रिजीम में कटौती योग्य नहीं है. अभी के नियमों के मुताबिक एम्प्लॉयर का ईपीएफ में योगदान (बेसिक का 12%) और एम्प्लॉयर का NPS में योगदान (बेसिक का 14% निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए, Section 80CCD(2) के तहत डिडक्टेबल) टैक्स‑फ्री है.

यहां समझिए टैक्स बचाने का पूरा गणित
सैलरीधारक न्यू टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स फ्री एम्प्लॉवर योगदान (इंपीएफ और एनपीएस) का सही कॉम्बिनेशन करके 14 लाख सीटीसी टैक्स फ्री कर सकते हैं. यदि सीटीसी 14 लाख है. बेसिक सैलरी 7 लाख है तो एम्प्लॉयर ईपीएफ में 12% बेसिक (84000 रुपए) और एनपीएस में 14% बेसिक (98000 रुपए) योगदान करता है. ये दोनों टैक्स फ्री योगदान होते हैं. कर्मचारी 75000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन ले सकता है. इस कॉम्बिनेशन से टैक्सेबल इनकम 12 लाख या उससे नीचे आ जाती है और इस तरह से एक भी रुपया टैक्स नहीं देना पड़ता है. दरअसल, टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपए या उससे नीचे आने पर Section 87A के तहत छूट मिल जाती है और टैक्स बिल जीरो हो जाता है.

इन कटौतियों से घटाएं अपना टैक्स
1. कुल सीटीसी: ₹14,00,000
2. स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000
3. नियोक्ता EPF (बेसिक का 12%): ₹84,000
4. नियोक्ता NPS (बेसिक का 14%): ₹95,000
5. टैक्सेबल इनकम: ₹11,43,000

यदि एम्प्लॉयर एनपीएस नहीं देता तो क्या है विकल्प 
यदि आपकी कंपनी या एम्प्लॉयर एनपीएस नहीं देता है तो न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स बचत के तरीके में स्टैंडर्ड डिडक्शन और एम्प्लॉपर का ईपीएफ योगदान ही रह जाता है. इससे कर्मचारी या तो कुछ टैक्स देने के लिए तैयार होगा या ओल्ड टैक्स रिजीम में जाएगा. यदि आपकी कंपनी केवल EPF की सुविधा देती है, तो भी आप लगभग ₹13.56 लाख तक की सैलरी को टैक्स-फ्री रख सकते हैं. आपको मालूम हो कि ओल्ड रिजीम में 80सी (ईपीएफ/पीपीएफ, ईएलएसएस), 80डी (हेल्थ इंश्योरेस) और 80 सीसीडी (1बी) (एनपीएस पर अतिरिक्त 50,000 रुपए) जैसी कटौतियां मिलती हैं. इन कटौतियों से टैक्सेबल इनकम बहुत कम हो सकती है.

सीटीसी स्ट्रक्चर बदलने का टैक्स और रिटायरमेंट पर असर
लेबर कोड अपडेट्स के चलते कई कंपनियां बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ा रही हैं (जैसे कम से कम 50% सीटीसी तक), जिसमें एम्प्लॉवर ईपीएफ-एनपीएस योगदान और रिटायरमेंट फंड दोनों बढ़ते हैं. इससे टेक होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है क्योंकि गैर-जरूरी अलाउंस घटा दिए जाते हैं. टेक होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है लेकिन टैक्सेबल इनकम कम होने से टैक्स बचत बढ़ती है. बेसिक सैलरी बढ़ाकर (अलाउंस घटाकर) कर्मचारी टैक्स बचा सकता है. बड़ा रिटायरमेंट फंड बना सकता है. हालांकि इससे टेक होम थोड़ा कम हो जाता है.

NPS और EPF से बन सकते हैं करोड़पति 
NPS की ताकत कम्पाउंडिंग और टैक्स छूट में है. यदि 25 साल की उम्र का कोई व्यक्ति हर महीने 10000 रुपए निवेश शुरू करे और हर साल 5% निवेश बढ़ाए. अनुमानित 12% सालाना रिटर्न रिटर्न के हिसाब से 60 की उम्र में 8.62 करोड़ रुपए का फंड बन सकता है. EPF भी भविष्य के लिए एक मजबूत स्तंभ है. यदि 25 की उम्र से आप 10000 रुपए महीना ईपीएफ में निवेश करते हैं तो 8.25% ब्याज की दर से रिटायरमेंट तक लगभग 4.05 करोड़ रुपए जमा हो सकते हैं.

बजट 2026 में टैक्स राहत की उम्मीद
सरकार ने पिछले बजट में सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपए तक की इनकम पर पूरा टैक्स माफ कर दिया था. इससे आम आदमी को बड़ी राहत मिली थी. इस बार संभावना है कि टैक्स फ्री इनकम लिमिट को और बढ़ाया जा सकता है. मिडिल क्लास को उम्मीद है कि यह सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपए तक की जा सकती है.

टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि टैक्स फ्री इनकम की लिमिट और बढ़े और 30 फीसदी टैक्स वाला स्लैब 30 लाख रुपए सालाना तक किया जाए. इतना ही नहीं सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की मांग लंबे समय से की जा रही है. यदि ऐसा होता है तो मिडिल क्लास के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा. पिछले बजट में न्यू टैक्स रिजीम के तहत इसे बढ़ाकर 75 हजार रुपए किया गया था. अब महंगाई और बढ़ते खर्च को देखते हुए उम्मीद है कि बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1 लाख रुपए तक किया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो बिना किसी निवेश के ही टैक्स बोझ कम हो जाएगा और टेक होम सैलरी बढ़ेगी.

 

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