Advertisement

सोने की मांग घटी, खर्च बढ़ा... चांदी से लेकर ऑनलाइन गोल्ड तक बदला खरीदारी का ट्रेंड

ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के मुताबिक इस धनतेरस पर सोने-चांदी के गहनों और सिक्कों की बिक्री करीब 66 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. संगठन ने बिक्री की वैल्यू में पिछले साल के मुकाबले करीब 10 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है. बिक्री की रकम बढ़ने का मतलब ये नहीं है कि बाजार में सोने और चांदी की मात्रा भी उतनी ही बढ़ेगी.

dhanteras 2026
आदित्य के. राणा
  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:44 AM IST

धनतेरस का त्योहार आज यानी 6 नवंबर को देशभर में मनाया जा रहा है. इस मौके पर सोने-चांदी की खरीदारी का उत्साह बना हुआ है, लेकिन इस बार बाजार की तस्वीर कुछ अलग है. ज्वैलर्स को बिक्री की वैल्यू में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े बताते हैं कि महंगे सोने की वजह से देश में गहनों की मांग वजन के हिसाब से घट रही है. दूसरी तरफ चांदी, डायमंड, गोल्ड कॉइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खरीदारी को लेकर भी नए ट्रेंड सामने आए हैं.

धनतेरस पर बढ़ जाती है सर्राफा बाजारों में रौनक-
धनतेरस आते ही देशभर के सर्राफा बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. इस दिन सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है. यही वजह है कि सोने की कीमतें कितनी भी ऊंची क्यों ना हो, बड़ी संख्या में लोग धनतेरस पर कुछ ना कुछ खरीदने की योजना जरूर बनाते हैं. लेकिन इस बार सोने की रिकॉर्ड ऊंचाई और कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने ग्राहकों के बजट से लेकर खरीदारी के फैसले तक को प्रभावित किया है. दिलचस्प बात है कि महंगे सोने के बावजूद ज्वैलर्स को इस धनतेरस पर कारोबार बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, बाजार में होने वाली बिक्री की कुल रकम और बिकने वाले सोने-चांदी की मात्रा में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा आंकड़े भी इसी बदलाव की तरफ इशारा कर रहे हैं.

धनतेरस पर 66 हजार करोड़ की बिक्री का अनुमान-
ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के मुताबिक, इस धनतेरस पर सोने-चांदी के गहनों और सिक्कों की बिक्री करीब 66 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. संगठन ने बिक्री की वैल्यू में पिछले साल के मुकाबले करीब 10 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है. बिक्री की रकम बढ़ने का मतलब ये नहीं है कि बाजार में सोने और चांदी की मात्रा भी उतनी ही बढ़ेगी. ऊंची कीमतों की वजह से कम वजन के गहने खरीदने पर भी ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. ज्वैलर्स का मानना है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट से खरीदारी का माहौल बेहतर हुआ है. खासकर वो ग्राहक, जो कीमतों में नरमी का इंतजार कर रहे थे, अब बाजार का रुख कर सकते हैं. हालांकि, बिक्री की मात्रा पिछले साल के आसपास या उससे कम रहने की आशंका है.

सोने की मांग घटी, खर्च बढ़ा-
सोने के बाजार में आए बदलाव को वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों से समझा जा सकता है. जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत में सोने के गहनों की मांग पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 20 फीसदी घटकर 99.9 टन रह गई. लेकिन इसी अवधि में गहनों पर खर्च 16 फीसदी बढ़कर करीब 1 लाख 48 हजार 700 करोड़ रुपये पहुंच गया यानी लोगों ने वजन के हिसाब से कम सोना खरीदा, लेकिन उस पर ज्यादा रकम खर्च की. इसकी बड़ी वजह सोने की ऊंची कीमतें रहीं. ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में सोने की खरीदारी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, बल्कि कीमतों के दबाव में उसका स्वरूप बदल रहा है. शादी-ब्याह और त्योहारों की मांग बनी हुई है, लेकिन ग्राहक अब पहले से ज्यादा सोच-समझकर पैसा खर्च कर रहे हैं. 

कीमतों में गिरावट से क्या बदला?
पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. ऊंचे स्तर से आई गिरावट ने उन ग्राहकों का ध्यान खींचा है, जो खरीदारी के लिए बेहतर मौके का इंतजार कर रहे थे. ज्वैलर्स के मुताबिक, कीमतों में नरमी आने से बाजार में पूछताछ बढ़ने और खरीदारी का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है. लेकिन महंगे सोने की वजह से ग्राहकों का बजट अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे में कुछ ग्राहक शादी के लिए जरूरी गहने खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग त्योहार की परंपरा निभाने के लिए सोने के छोटे सिक्के, अंगूठियां या दूसरी छोटी चीजें खरीदना पसंद कर रहे हैं. इसका असर ज्वैलरी बाजार पर भी दिख रहा है. दुकानदारों के लिए अब सिर्फ ज्यादा वजन के गहने बेचना ही अहम नहीं है, बल्कि अलग-अलग बजट में ग्राहकों को विकल्प देना भी जरूरी हो गया है.

चांदी और डायमंड की तरफ क्यों बढ़ रहा रुझान?
धनतेरस पर सोने के साथ चांदी खरीदने की भी पुरानी परंपरा रही है. लेकिन इस बार चांदी सिर्फ पूजा या शगुन तक सीमित नहीं है. ज्वैलर्स के मुताबिक, चांदी के गहनों और नए डिजाइन वाले उत्पादों में भी ग्राहकों की दिलचस्पी दिखाई दे रही है. खासतौर पर युवा खरीदार ऐसे गहनों को पसंद कर रहे हैं, जिन्हें त्योहार के बाद भी रोजमर्रा में पहना जा सके. पेंडेंट, अंगूठियां, चेन और आधुनिक डिजाइन वाले गहने इसी वजह से ग्राहकों का ध्यान खींच रहे हैं. बेंगलुरु के ज्वैलरी बाजार पर आई एक रिपोर्ट में भी सामने आया है कि ग्राहक पारंपरिक सोने के गहनों के साथ डायमंड और चांदी के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, चांदी की अपनी कीमतों में भी तेजी आई है. इसलिए इसे हर स्थिति में सस्ता विकल्प मानना ठीक नहीं होगा. सोने और चांदी की कीमत, वजन और डिजाइन के हिसाब से ग्राहक अपने बजट का फैसला कर रहे हैं.

ऑनलाइन भी बढ़ रही सोने की खरीदारी-
त्योहारी खरीदारी में एक और दिलचस्प बदलाव डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है. अब सोना खरीदने के लिए सिर्फ ज्वैलरी शोरूम जाना ही एकमात्र विकल्प नहीं रह गया है. Swiggy Instamart के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में उसके प्लेटफॉर्म पर सोने की खरीदारी में 258 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ये आंकड़ा बताता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी सोने की खरीदारी को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर छोटे गोल्ड कॉइन जैसे उत्पादों की उपलब्धता ने ग्राहकों के लिए खरीदारी का एक और रास्ता खोला है. लेकिन किसी एक प्लेटफॉर्म की बिक्री में बढ़ोतरी को पूरे देश के गोल्ड मार्केट की बिक्री में उतनी ही बढ़ोतरी नहीं माना जा सकता.

ज्वैलरी के अलावा गोल्ड में निवेश के विकल्प-
सोने की ऊंची कीमतों के बीच खरीदारी का एक दूसरा पहलू निवेश से जुड़ा है. हर ग्राहक सोना पहनने के लिए नहीं खरीदता. कुछ लोग इसे लंबे समय की बचत और निवेश के तौर पर भी देखते हैं. ऐसे निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प मौजूद हैं, जिनमें गहनों की तरह मेकिंग चार्ज नहीं देना पड़ता. हालांकि, इनमें बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम और फंड से जुड़े खर्च होते हैं. दूसरी तरफ फिजिकल गोल्ड खरीदने वालों के लिए शुद्धता, मेकिंग चार्ज, जीएसटी और दोबारा बेचने पर मिलने वाली कीमत महत्वपूर्ण हैं. यही वजह है कि गहने, सिक्के और गोल्ड ईटीएफ को एक जैसा निवेश नहीं समझना चाहिए. इनकी लागत, इस्तेमाल और बेचने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है.

खरीदते समय शुद्धता का भी सवाल-
धनतेरस पर खरीदारी के उत्साह के बीच सोने की शुद्धता को लेकर सतर्क रहना भी जरूरी है. मध्य प्रदेश के इंदौर से आई एक रिपोर्ट में सोने में भारी धातुओं का महीन पाउडर मिलाकर वजन बढ़ाने के मामलों का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी मिलावट की पहचान सामान्य कसौटी या एसिड टेस्ट से करना मुश्किल हो सकता है. कुछ मामलों में गहनों को गलाने के दौरान सोने की वास्तविक मात्रा कम निकलने से गड़बड़ी सामने आती है. ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वो हॉलमार्क वाली ज्वैलरी खरीदें, एचयूआईडी नंबर की जांच करें और बिल में सोने की शुद्धता, वजन, कीमत और मेकिंग चार्ज जैसी जानकारियां जरूर देखें.

ज्वैलर्स के लिए भी बदल रहा कारोबार का गणित-
महंगे सोने का असर सिर्फ ग्राहकों पर नहीं, बल्कि ज्वैलरी कंपनियों के कारोबार पर भी पड़ रहा है. सोने की कीमतें बढ़ने से कंपनियों को अपना स्टॉक खरीदने और बनाए रखने के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची कीमतों के बावजूद संगठित ज्वैलरी रिटेलर्स की वित्तीय स्थिति संभली रहने की उम्मीद है. हालांकि, महंगे सोने के कारण मांग के स्वरूप में बदलाव और स्टॉक में ज्यादा पूंजी फंसना कारोबार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं यानी ज्वैलर्स के सामने एक तरफ बिक्री की वैल्यू बढ़ाने का मौका है, तो दूसरी तरफ ग्राहकों की खरीदारी की क्षमता और सोने की ऊंची कीमतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी है.

इस धनतेरस पर क्या होगी बाजार की असली तस्वीर?
इस बार धनतेरस पर सोने-चांदी के कारोबार की सबसे अहम बात यही है कि बिक्री की रकम और बिकने वाली मात्रा अलग-अलग दिशा में जा सकती हैं. AIJGF को करीब 66 हजार करोड़ रुपये की बिक्री की उम्मीद है. वहीं WGC के आंकड़े बताते हैं कि महंगे सोने की वजह से देश में गहनों की मांग वजन के हिसाब से कम हुई है, लेकिन उन पर खर्च बढ़ा है. दूसरी तरफ चांदी, डायमंड, गोल्ड कॉइन और ऑनलाइन खरीदारी जैसे विकल्प बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं. कुल मिलाकर, धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा कायम है. फर्क सिर्फ इतना है कि अब ग्राहक कीमत, जरूरत, डिजाइन और निवेश के फायदे को ध्यान में रखकर फैसला कर रहे हैं. इस बार धनतेरस की बिक्री का असली आकलन भी सिर्फ कितने रुपये का कारोबार हुआ, इससे नहीं, बल्कि कितनी मात्रा में सोना-चांदी बिका, इससे होगा.

ये भी पढ़ें:

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement