शादी के दौरान कई कपल मिलकर घर खरीदने के लिए जॉइंट होम लोन लेते हैं. दोनों पति-पत्नी लोन में को-बॉरोअर बन सकते हैं. लेकिन अगर बाद में दोनों का तलाक हो जाता है, तो सवाल उठता है कि बची हुई EMI कौन भरेगा और घर पर किसका अधिकार होगा? तलाक होने से होम लोन अपने आप खत्म नहीं होता. बैंक के साथ किया गया लोन एग्रीमेंट तब तक लागू रहता है, जब तक बैंक खुद किसी व्यक्ति को लोन की जिम्मेदारी से फ्री न कर दे.
अगर पति-पत्नी दोनों जॉइंट होम लोन में को-बॉरोअर हैं, तो आमतौर पर दोनों की लोन चुकाने की जिम्मेदारी होती है. तलाक के समझौते में अगर यह तय हो जाए कि आगे की EMI सिर्फ एक व्यक्ति भरेगा, तब भी बैंक के सामने दूसरे व्यक्ति की जिम्मेदारी अपने आप खत्म नहीं होती. अगर EMI नहीं भरी जाती है, तो बैंक दोनों में से किसी भी को-बॉरोअर से बकाया रकम मांग सकता है.
यह एक आम गलतफहमी है. होम लोन चुकाने और घर का मालिक होना दोनों बात अलग-अलग है. घर का मालिकाना हक उसके रजिस्टर्ड टाइटल और प्रॉपर्टी दस्तावेजों से तय होता है. केवल EMI भरने से किसी व्यक्ति को अपने आप घर का पूरा मालिकाना हक नहीं मिल जाता. इसी तरह, जॉइंट लोन लेने का मतलब भी यह नहीं है कि दोनों की प्रॉपर्टी में बराबर हिस्सेदारी होगी.
अगर तलाक के बाद पति-पत्नी घर बेचने का फैसला करते हैं और उस पर होम लोन बाकी है, तो बिक्री से मिलने वाली रकम में से पहले बकाया लोन चुकाया जाता है. इसके बाद बची हुई रकम को प्रॉपर्टी में दर्ज मालिकाना हिस्से के अनुसार बांटा जा सकता है. घर बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स भी लग सकता है, जो खरीद मूल्य, बिक्री मूल्य और प्रॉपर्टी कितने समय तक रखी गई, जैसी बातों पर निर्भर करता है.
अगर तलाक के बाद एक व्यक्ति घर और लोन की पूरी जिम्मेदारी लेना चाहता है, तो केवल आपसी समझौता काफी नहीं है. बैंक से लोन रीफाइनेंस या दूसरी व्यवस्था के जरिए दूसरे व्यक्ति को लोन की जिम्मेदारी से औपचारिक रूप से फ्री कराना जरूरी हो सकता है. जब तक बैंक लिखित रूप से नाम नहीं हटाता, पुराने को-बॉरोअर की जिम्मेदारी बनी रह सकती है.
जॉइंट होम लोन लेते समय दोनों लोगों की हिस्सेदारी और पैसे देने की जिम्मेदारी साफ लिखित रूप में तय करनी चाहिए. EMI और प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को अलग-अलग समझना जरूरी है. तलाक की स्थिति में लोन और प्रॉपर्टी से जुड़े सभी मामलों को कानूनी समझौते में साफ तौर पर शामिल करना चाहिए. इससे भविष्य में पैसों और घर को लेकर विवाद की संभावना कम हो सकती है.