मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स में बिजनेस टुडे के BT MindRush 2025 का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में बिजनेस सेक्टर से जुड़ी कई हस्तियों ने शिरकत की. देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इक कार्यक्रम में शामिल हुए. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन समेत विदेश नीति के कई विषयों पर बात की.
यूक्रेन-रूस युद्ध
रूस-यूक्रेन युद्ध पर डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, मुझे लगता है कि क्रिकेट की तरह आपको बहुत सारी नेट प्रैक्टिस की आवश्यकता होती है. आज हमारे पास एक सरकार है जो अपने तीसरे कार्यकाल में है. राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मामले में बहुत अनुभव रखती है. जयशंकर ने कहा, जब युद्ध शुरू हुआ तो हमने कहा कि हम किसी के पक्ष में नहीं हैं बल्कि शांति के पक्ष में है. इसे बनाए रखना और दुनिया को यह दिखाना कि हम सही थे, यह एक बड़ी उपलब्धि है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इंडिया उन चुनिंदा देशों में से एक है जो यूक्रेन और रूस से बात कर सकता है.
भारतीय विदेश नीति
डॉ. जयशंकर ने भारतीय विदेश नीति की रणनीतियों पर चर्चा करते हुए कहा, हमने न केवल यूक्रेन की स्थिति को ट्रैक किया है बल्कि वैश्विक स्थिति को भी एक बहुत ही समझदार तरीके से देखा है. हमने अपने हितों के साथ-साथ विश्व के हितों को भी ध्यान में रखा है. विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाने की क्षमता ने इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार का सबका साथ सबका विकास मंत्री भारत की विदेश नीति पर भी लागू होती है.
भारतीय कूटनीति की सांस्कृतिक जड़ें
विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने भारतीय कूटनीति की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों पर जोर देते हुए कहा, 'हमारी रणनीतिक सोच रामायण, महाभारत और चाणक्य कौटिल्य से प्रेरित है' उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारतीय इतिहास और परंपराओं को समझने से विदेश नीति के निर्णयों में मदद मिलती है.
वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका
वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने चर्चा करते हुए कहा, भारत आज दुनिया के अन्य देशों के रडार पर बहुत अधिक मजबूती से दिखाई देता है. विशेष रूप से जब यह वैश्विक क्षमता केंद्रों की बात आती है. विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति का उद्देश्य अधिक से अधिक दरवाजे खुले रखना है.
विदेश मंत्रालय की कार्यशैली
भारतीय विदेश मंत्रालय की कार्यशैली पर डॉ. जयशंकर ने कहा, हमारी कार्यशैली बहुत लचीली है. हम अपने राजदूतों से न केवल यह अपेक्षा करते हैं कि वे हमें जो कुछ हो रहा है बताएं. बल्कि यह भी बताएं कि इसका समाधान क्या है. विदेश मंत्री ने बताया कि मंत्रालय की कार्यशैली और गिनती का तरीका इसे अन्य देशों के मंत्रालयों से अलग बनाता है. चर्चा के दौरान सोने को लेकर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि वे फोन देखने के बाद भी अच्छी नींद ले सकते हैं और यह उनके काम का हिस्सा है.
पसंदीदा विदेश मंत्री
वैश्विक व्यवस्था और भारत की भूमिका पर चर्चा करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में कई समस्याएं हैं. भारत ने हमेशा इन समस्याओं को उजागर किया है. पसंदीदा विदेश मंत्री के सवाल पर डॉ. जयशंकर ने कहा कि वे किसी एक नाम को लेकर अपने अन्य दोस्तों को नहीं खोना चाहते.