मुश्किल हालात के आगे हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाने वाली गाजियाबाद के नंदग्राम की बबीता शर्मा आज कई महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं. पति का साथ छूटने के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. घर चलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने महज 5 हजार रुपए की पूंजी से पूजा सामग्री बेचने का काम शुरू किया. मंदिर के पास लगाए गए छोटे से ठेले से शुरू हुआ यह सफर अब एक दुकान तक पहुंच चुका है.
5 हजार रुपए से शुरू किया कारोबार
बबीता ने नंदग्राम में मंदिर के पास पूजा सामग्री का ठेला लगाना शुरू किया था. शुरुआत आसान नहीं थी. सीमित पूंजी, बच्चों की जिम्मेदारी और परिवार का खर्च चलाने की चुनौती के बीच उन्होंने कारोबार को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी. धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ी और उन्हें लगा कि इस छोटे कारोबार को और बड़ा किया जा सकता है.
इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिली. उन्होंने योजना के तहत 10 हजार रुपए के पहले ऋण के लिए आवेदन किया. ऋण मिलने के बाद उन्होंने पूजा सामग्री का स्टॉक बढ़ाया और कारोबार को आगे बढ़ाया. समय पर ऋण चुकाने के बाद उन्हें आगे 20 हजार रुपए और फिर करीब 50 हजार रुपए तक की आर्थिक मदद मिली.
ठेले से दुकान तक पहुंचा कारोबार
सरकारी मदद और अपनी मेहनत से बबीता ने कारोबार का विस्तार किया. अब मंदिर के पास उनकी अपनी पूजा सामग्री की दुकान है. दुकान से होने वाली आमदनी से वह तीनों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, घर का खर्च और परिवार की दूसरी जरूरतें पूरी कर रही हैं. कभी सड़क किनारे ठेले पर पूजा सामग्री बेचने वाली बबीता आज अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी खुद संभाल रही हैं. उनके लिए यह बदलाव सिर्फ कारोबार बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की यात्रा है.
PM मोदी ने मन की बात में सुनाई कहानी
बबीता के संघर्ष की कहानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 137वें एपिसोड में भी साझा किया. उन्होंने बबीता को महिला सशक्तीकरण और पीएम स्वनिधि योजना से मिली मदद की प्रेरक मिसाल के तौर पर पेश किया. कार्यक्रम में अपना नाम लिए जाने की जानकारी मिलने पर बबीता भावुक हो गईं. बबीता ने प्रधानमंत्री को अपना भाई और परिवार का हिस्सा बताते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं के लिए आभार जताया. उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं से मिले आर्थिक सहारे ने उनके कारोबार को नई दिशा दी. अगर यह मदद नहीं मिलती तो तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए काफी मुश्किल होता.
प्रशासन ने कहा- महिलाओं को योजनाओं का लाभ दिलाएंगे
गाजियाबाद प्रशासन ने भी बबीता की कहानी को महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल बताया है. प्रशासन का कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाया जाएगा. महिलाएं जिलाधिकारी कार्यालय, डूडा कार्यालय और नगर निगम जाकर स्वरोजगार और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं की जानकारी ले सकती हैं. किसी तरह की परेशानी होने पर वे प्रशासन से सीधे संपर्क भी कर सकती हैं.
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