कुछ महीने पहले तक सोना और चांदी बढ़ती कीमतों में लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे थे. लगभग हर हफ्ते सोना नई ऊंचाई छू रहा था, जबकि चांदी ने भी कई सालों के मुकाबले कुछ महीनों में सबसे मजबूत तेजी देखी है. इन सब के बीच वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई की चिंता और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने बड़ी संख्या में सोना-चांदी की जगह कीमती धातुओं का रुख किया था.
लेकिन अब तस्वीर थोड़ी बदलती नजर आ रही है. हाल के हफ्तों में सोना और चांदी दोनों अपने ऑल टाइम हाई से नीचे आए हैं. गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी दोनों धातुओं में कमजोरी देखने को मिली.
मुनाफावसूली बनी गिरावट की सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली है. पिछले एक साल में सोना और चांदी ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है. ऐसे में कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए खरीदारी के बजाय बिकवाली शुरू कर दी. वहीं कमोडिटी बाजार में तेज उछाल के बाद कुछ समय की ठंडक को सामान्य माना जाता है. जब कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं तो ट्रेडर्स अक्सर अपने होल्डिंग का एक हिस्सा बेच देते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव आता है.
आमतौर पर सोना और चांदी की चाल अमेरिकी डॉलर के उलट मानी जाती है. हाल के दिनों में वैश्विक मौद्रिक नीति और आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी उम्मीदों ने डॉलर को मजबूती दी है. डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के खरीदारों के लिए सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं. इससे मांग प्रभावित होती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है. साथ ही निवेशकों का पैसा अलग-अलग एसेट क्लास में शिफ्ट होने लगता है.
क्या कह रहे हैं बाजार के संकेत?
Enrich Money के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक MCX Gold गैप-डाउन के साथ खुला और 1,50,000 रुपए के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है. उनका कहना है कि बाजार की धारणा बेहतर होने के लिए सोने का दोबारा 1,50,000 रुपए के ऊपर जाना जरूरी है. ऐसा होने पर कीमतें 1,54,000 से 1,55,000 रुपए के दायरे तक जा सकती हैं.
वहीं अगर सोना 1,46,000 रुपए से नीचे जाता है तो बिकवाली और बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में कीमतें 1,45,000 से 1,43,000 रुपए तक पहुंच सकती हैं.
चांदी पर भी दबाव बरकरार
चांदी की चाल भी फिलहाल कमजोर बनी हुई है. पोनमुडी आर के अनुसार MCX Silver निचले स्तर पर खुली और अभी 2,30,000 रुपए के आसपास सपोर्ट बनाए रखने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक मजबूती लौटाने के लिए चांदी को 2,36,000 रुपए के ऊपर टिकना होगा. इसके बाद कीमतें 2,40,000 रुपए और फिर 2,43,000 रुपए तक जा सकती हैं. लेकिन यदि 2,30,000 रुपए का स्तर टूटता है तो चांदी 2,28,000 से 2,25,000 रुपए के दायरे तक फिसल सकती है.
आगे क्या होगा?
फिलहाल सोना और चांदी की कमजोरी के पीछे मुनाफावसूली, मजबूत डॉलर, ऊंचे तेल दाम और सतर्क निवेश की भावनाएं मुख्य वजह मानी जा रही हैं. आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, सुरक्षित निवेश की मांग और बाजार की अस्थिरता इन दोनों धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. निवेशकों के लिए फिलहाल रोजाना की कीमतों पर ध्यान देने से ज्यादा अपनी लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी माना जा रहा है.
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