किसी ने मोमोज फैक्ट्री खड़ी की, तो किसी ने हैंडीक्राफ्ट बिजनेस से 25 महिलाओं को दिया रोजगार, सरकारी योजना ने ऐसे बदली मेरठ के दो उद्यमियों की किस्मत

मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना और स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाओं का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है. मेरठ में राजकुमार ठाकुर और ममता गर्ग जैसे उद्यमियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचे तो छोटे स्तर का कारोबार भी बड़े उद्योग का रूप ले सकता है.

Meerut Entrepreneurs
उस्मान चौधरी
  • मेरठ,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार की स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाली योजनाएं अब मेरठ में जमीनी स्तर पर असर दिखा रही हैं. मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना और स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए युवा और महिला उद्यमी न सिर्फ अपना कारोबार खड़ा कर रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. मेरठ के राजकुमार ठाकुर और ममता गर्ग इसकी दो बड़ी मिसाल हैं, जिन्होंने सरकारी आर्थिक सहायता के दम पर छोटे कारोबार को सफल उद्यम में बदल दिया.

10 हजार रुपये से शुरू किया मोमोज का कारोबार
मेरठ के युवा उद्यमी राजकुमार ठाकुर पहले एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे. नौकरी के दौरान ही उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया. करीब चार-पांच साल पहले उन्होंने सिर्फ 10 हजार रुपये की पूंजी से मोमोज का छोटा स्टॉल शुरू किया. शुरुआत में वह और उनकी पत्नी खुद मोमोज बनाते और बेचते थे. धीरे-धीरे स्वाद और गुणवत्ता की वजह से ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी. स्थानीय रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स से भी ऑर्डर मिलने लगे. इसी दौरान उन्हें मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना की जानकारी मिली. योजना के तहत उन्हें 5 लाख रुपये का लोन मिला, जिससे उन्होंने मोमोज बनाने की मशीन खरीदी.

मशीन लगने के बाद उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई. आज उनकी फैक्ट्री में प्रतिदिन छह से सात हजार मोमोज तैयार किए जाते हैं. कंपनी ग्राहकों को 29 तरह के मोमोज उपलब्ध कराती है, जबकि छह प्रमुख वैरायटी बड़े पैमाने पर बनाकर मेरठ के 30 से 35 रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स तक सप्लाई की जाती हैं.

50 लोगों को मिला रोजगार
राजकुमार की फैक्ट्री में आठ महिलाएं और तीन पुरुष नियमित रूप से काम करते हैं. इसके अलावा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 लोगों को रोजगार मिला है. मंगल पांडे नगर और जागृति विहार स्थित उनके दोनों स्टॉल पर रोज दोपहर तीन बजे से रात नौ बजे तक ग्राहकों की भीड़ रहती है.

ग्रेजुएट राजकुमार और उनकी पोस्ट ग्रेजुएट पत्नी का कहना है कि अगर सरकारी योजना के तहत लोन नहीं मिलता तो महंगी मशीन खरीदना संभव नहीं होता. उनका मानना है कि सरकारी सहयोग ने उनके छोटे कारोबार को उद्योग का रूप दे दिया. अब उनका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाकर और अधिक लोगों को रोजगार देना है.

हैंडीक्राफ्ट बिजनेस से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं ममता गर्ग
मेरठ की महिला उद्यमी ममता गर्ग ने भी सरकारी योजना का लाभ उठाकर अपने छोटे व्यवसाय को नई ऊंचाई दी है. वह भगवान के पालने, सिंहासन, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, पूजा सामग्री और त्योहारों से जुड़े विभिन्न हैंडीक्राफ्ट उत्पाद तैयार करती हैं. उनका रिटेल स्टोर मेरठ में संचालित है, जहां से देशभर के व्यापारियों को थोक में सामान भेजा जाता है. उनके उत्पाद ऑनलाइन माध्यम से विदेशों तक भी पहुंच रहे हैं.

करीब 16 साल पहले उन्होंने महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण देकर काम शुरू किया था. कारोबार बढ़ने पर पूंजी की जरूरत पड़ी, जिसके बाद उन्होंने स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत 10 लाख रुपये का ऋण और एक लाख रुपये की कार्यशील पूंजी प्राप्त की. इसी राशि से कच्चा माल खरीदकर उत्पादन बढ़ाया गया.

25 महिलाओं को मिला रोजगार
ममता गर्ग बताती हैं कि बैंक ने व्यवसाय का मूल्यांकन करने के बाद ऋण स्वीकृत किया. आज उनका कारोबार पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा है. उन्होंने जीएसटी पंजीकरण भी कराया है और सभी लेनदेन बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से होते हैं.

वर्तमान में वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 25 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं. महिलाओं को प्रशिक्षण देने के बाद उनके घरों पर ही हैंडीक्राफ्ट उत्पाद तैयार कराए जाते हैं, जिससे कई परिवारों की नियमित आय सुनिश्चित हुई है.

एमएससी और एमफिल शिक्षित ममता गर्ग बताती हैं कि करीब 16 वर्ष पहले पति के निधन के बाद उन्होंने व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली. आज उनका बड़ा बेटा इंजीनियर होने के साथ कारोबार में सहयोग कर रहा है, जबकि छोटा बेटा दिल्ली में नया हैंडीक्राफ्ट स्टूडियो शुरू करने की तैयारी कर रहा है. उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब 32 लाख रुपये है और जल्द ही दिल्ली में नया स्टोर भी खोला जाएगा.

 

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