यूपीआई ने भारत में डिजिटल लेनदेन को बेहद आसान और तेज बना दिया है. आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह लोग बिना कैश या कार्ड के सिर्फ मोबाइल से भुगतान कर रहे हैं. ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या दिनभर में बार-बार यूपीआई इस्तेमाल करने से आपके सिबिल स्कोर पर कोई असर पड़ता है? क्योंकि इस तरह से लगातार पेमेंट करते रहने से आपके बैंक खाते की हिस्ट्री दिखती है. ऐसे में लोग सोचते हैं कि क्या बैंक उन्हें लोन देगा या नहीं.
सबसे पहले यह साफ कर देना जरूरी है कि यूपीआई पेमेंट्स का आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता. चाहे आप दिन में 5 बार ट्रांजैक्शन करें या 50 बार, इससे आपके स्कोर में न बढ़ोतरी होती है और न ही गिरावट. क्रेडिट स्कोर से आपके लोन और क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर आधारित होता है, न कि आपके रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट्स पर.
बैंक किन बातों पर गढ़ाता है नज़र?
जब आप किसी लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक केवल आपका सिबिल स्कोर नहीं देखते. वे आपके बैंक स्टेटमेंट को भी अच्छी तरह से जांचता हैं. इसमें आपकी आय, खर्च करने का तरीका और अकाउंट बैलेंस का पैटर्न शामिल होता है. यूपीआई ट्रांजैक्शन भी इसी स्टेटमेंट में दिखाई देते हैं, जिससे बैंक आपकी खर्च करने की आदतों को समझने की कोशिश करते हैं.
कब लोन अप्रूवल पर पड़ेगा असर?
यदि आपका बैंक अकाउंट बार-बार खाली या जीरो बैलेंस के करीब पहुंच जाता है, तो यह लेंडर्स के लिए एक संकेत हो सकता है कि आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग मजबूत नहीं है. खासकर अगर सैलरी आने के तुरंत बाद ही पैसा खत्म हो जाता है, तो बैंक इसे जोखिम के रूप में देख सकते हैं. हालांकि इससे आपका सिबिल स्कोर प्रभावित नहीं होता, लेकिन लोन अप्रूवल पर असर पड़ सकता है.
आपकी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री क्या बताती है?
यूपीआई पेमेंट्स भले ही स्कोर को प्रभावित नहीं करते, लेकिन आपकी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री आपके खर्च करने के व्यवहार का आईना होती है. इससे यह पता चलता है कि आप पैसे को कैसे मैनेज करते हैं. यही जानकारी बैंक यह तय करने में इस्तेमाल करते हैं कि आपको लोन दिया जाए या नहीं, और अगर दिया जाए तो किस ब्याज दर पर.