Income Tax Return Updates: टैक्सपेयर्स ध्यान दें! इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए जारी हो चुके हैं ITR-1 और ITR-4 फॉर्म, जानें आपको कौन सा भरना होगा Form?

ITR-1 vs ITR-4: टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दो फॉर्म ITR-1 और ITR-4 को जारी कर दिया है. अब करदाता इनकम टैक्स रिटर्न भरने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. यहां आप जान सकते हैं क्या होता है आईटीआर फॉर्म और ITR-1 व ITR-4 में आपको कौन सा भरना होगा? 

ITR-1 vs ITR-4 Forms
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:49 AM IST

Income Tax Department ITR 1 and ITR 4 Form Release: टैक्सपेयर्स (Taxpayers) बड़ी खबर है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दो फॉर्म ITR-1 और ITR-4 को जारी कर दिया है. अब करदाता इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) यानी आईटीआर (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन यूटिलिटी की सुविधा भी शुरू की है.

टैक्सपेयर्स पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन ही आईटीआर फाइलिंग कर सकते हैं या फिर एक्सेल डाउनलोड करके ऑफलाइन तरीके से भी दाखिल कर सकते हैं. आपको मालूम हो कि इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय सही ITR फॉर्म का चुनाव करना चाहिए क्योंकि गलत ITR Form दाखिल करने पर आईटीआर रिजेक्ट हो सकता है. आपको पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है. यहां आप जान सकते हैं क्या होता है आईटीआर फॉर्म और ITR-1 व ITR-4 में आपको कौन सा भरना है? 

क्या होता है ITR Form?
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म वह माध्यम है, जिसके जरिए एक व्यक्ति अपनी सालाना कमाई, डिडक्शन और उस पर लगने वाले टैक्स की जानकारी भरकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देता है. आयकर विभाग के मुताबिक कुल 7 प्रकार के आईटीआर फॉर्म ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4, ITR-5, ITR-6, ITR-7 होते हैं. किस करदाता को कौन सा फॉर्म भरना होगा यह उसकी इनकम पर निर्भर करता है. टैक्सपेयर्स की कुल सालाना  आय कितनी है और व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), कंपनी आदि में से कौन सी श्रेणी में आते हैं, इसे भी फॉर्म का चुनाव करते समय देखा जाता है.

क्या है ITR भरने की डेडलाइन? 
यदि किसी टैक्सपेयर्स के बैंक खातों का ऑडिट होना जरूरी नहीं है तो ऐसे करदाताओं के लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है. टैक्स ऑडिट वाले केस में रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 है. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंतिम समय की हड़बड़ी और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए टैक्सपेयर्स  को अभी से फाइलिंग शुरू कर देना चाहिए.

किसे और कौन सा भरना है आईटीआर फॉर्म?
टैक्सपेयर्स आपको मालूम हो कि आपकी कमाई की कैटेगरी के आधार पर कुल सात तरह के आईटीआर फॉर्म होते हैं. अभी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले दो फॉर्म ITR-1 और ITR-4 को भरने के लिए सुविधा शुरू की है.

ITR-1
आईटीआर-1 फॉर्म को सहज फॉर्म कहा जाता है. आईटीआर 1 फॉर्म उन लोगों के लिए है, जो भारत में रहते हैं और जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपए तक है. इसमें सैलरी, एक घर से होने वाली आय और बैंक ब्याज जैसी दूसरी आय शामिल होती हैं. 50 हजार रुपए की इनकम करने वाला किसान भी इस फॉर्म को भर सकता है.

ITR-2
किसी करदाता की सालाना आमदनी 50 लाख रुपए से अधिक है तो वे आईटीआर-2 फॉर्म भर सकते हैं. यह फॉर्म उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय हाउस प्रॉपर्टी या पूंजी के जरिए अर्जित होती है. शॉर्ट टर्म, कैपिटल गेन, एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी से कमाई करने वाले, खेती से 5000 रुपए से ज्यादा कमाई करने वाले, घुड़सवारी की सट्टेबाजी से इनकम, लॉटरी या लीगल गैंबलिंग से कमाई, किसी कंपनी में काम करने वाले या किसी कंपनी का डायरेक्टर आईटीआर-2 फॉर्म को भर सकते हैं. इसका मतलब यह है कि जो लोग ITR-1 दाखिल करने के लिए पात्र नहीं हैं, वे ITR-2 फाइल कर सकते हैं. कुछ खास शर्तों के तहत विदेशी भारतीय भी ITR-2 भर सकते हैं.

ITR-3 
आईटीआर-3 फॉर्म को वे लोग भर सकते हैं, जो खुद बिजनेस कर रहे हैं या किसी प्रोफेशन से आमदनी हासिल कर रहे हैं. इसे डॉक्टर, वकील, फ्रीलांसर, ट्रेडर आदि भर सकते हैं. इसे पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर और F&O या इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले भी भर सकते हैं. 

ITR-4
आईटीआर-4 फॉर्म को सुगम फॉर्म भी कहा जाता है. यह फॉर्म उन लोगों, एचयूएफ (HUF) और फर्म के लिए है, जिनकी सालाना इनकम 50 लाख रुपए तक है और उनकी कमाई बिजनेस या प्रोफेशन से होती है. ये फॉर्म खास तौर पर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम वालों के लिए होता है. सीधे शब्दों में कहें तो अगर आपकी इनकम सिंपल है तो ITR-1 भरें और यदि आप छोटा बिजनेस या प्रोफेशन करते हैं तो ITR-4 आपके काम का फॉर्म है. आईटीआर-4 फॉर्म खासतौर पर उन लोगों के लिए लागू होता है, जिनकी आय आयकर अधिनियम की धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत निर्धारित आय अनुमान योजनाओं के आधार पर गणना की जाती है. ये योजनाएं छोटे व्यापारों और पेशेवरों के लिए हैं, जिनका टर्नओवर एक सीमा से कम है. नियमित वेतन या पेंशन से होने वाली आय को भी ITR-4 में दिखाया जा सकता है. 

ITR-5 
आईटीआर-5 फॉर्म संस्थाओं के लिए होता है. इसे पार्टनरशिप फर्म, LLPs, Associations of Persons (AOPs), Bodies of Individuals (BOIS) भर सकते हैं. मंदिर या धार्मिक संस्था, ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के लिए ITR-5 होता है. आईटीआर-5 फॉर्म को इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स, कंपनियां या फिर NRI नहीं भर सकते. ऐसे लोग जिनके पास विदेशी आय या संपत्ति हो, वे भी ITR-5 नहीं भर सकते हैं.

ITR-6 
आईटीआर-6 फॉर्म वे कंपनियां भर सकती हैं, जो आयकर अधिनियम 1961 की धारा 11 के तहत धार्मिक या चैरिटी संस्थानों से छूट नहीं लेतीं. इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स और Section 11 के तहत छूट प्राप्त करने वाली कंपनियां इसे नहीं भर सकती हैं.

ITR-7 
आईटीआर-7 फॉर्म वैसी कंपनियां सहित उन व्यक्तियों के लिए जिन्हें सिर्फ धारा 139 (4ए) या 139 (4बी) या 139 (4सी) या 139 (4डी) के तहत रिटर्न प्रस्तुत करना जरूरी है को आईटीआर-7 फॉर्म दाखिल करना होता है. इस फॉर्म को चैरिटेबल ट्रस्ट, रिसर्च संस्था, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अस्पताल, समाचार एजेंसियां भरती हैं. राजनीतिक दलों के लिए भी यही फॉर्म होता है.

इस बार बदल गए हैं इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़े कुछ नियम
टैक्सपेयर्स आपको मालूम हो कि इस बार इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़े कुछ नियम बदल गए हैं. इस बार आईटीआर भरना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा, क्योंकि सरकार ने कुछ नियम कड़े कर दिए हैं. अब नए फॉर्म में करदाता को अपनी आय और नुकसान की ज्यादा जानकारी देनी होगी जैसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी शेयर या प्रॉपर्टी बेचने से फायदा, शेयर बायबैक से हुआ नुकसान, कुछ खास बिजनेस ट्रांजैक्शन. इसका मतलब है कि यदि आपने शेयर बाजार या निवेश से कमाई या नुकसान किया है तो अब उसका पूरी और सही जानकारी देनी होगी. 


 

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