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2022-23 की दूसरी छमाही में कम हो सकती है महंगाई, RBI गर्वनर शक्तिकांत दास ने कही ये बड़ी बात

RBI on Inflation: दूसरी छमाही यानि अक्टूबर से मार्च के बीच से महंगाई दर में गिरावट आने की उम्मीद की जा रही है. इसकी जानकारी खुद RBI गर्वनर शक्तिकांत दास ने कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में दी है. उन्होंने कहा कि इस समय सप्लाई का आउटलुक ट्रेंड काफी पॉजिटिव दिखाई दे रहा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 2022-23 की दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो.

INFLATION
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 8:16 PM IST
  • अर्थव्यवस्था की रिकवरी के हैं संकेत 
  • दुनिया भर में बढ़ी है महंगाई 

भारत में महंगाई से जल्द निजात मिल सकता है. आने वाले कुछ महीनों में भारतीयों को महंगाई से राहत मिल सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गर्वनर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) ने शनिवार को ये बात कही कही है. उनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी छमाही यानि अक्टूबर से मार्च के बीच से महंगाई दर में गिरावट आने की उम्मीद की जा रही है. इसके लिए केद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए जो मौद्रिक उपाए अपना रहा है, वे सब जारी रखे जाएंगे. ताकि मजबूत और स्थाई ग्रोथ हो सके. 

दरअसल, शनिवार को हुए कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में गर्वनर शक्तिकांत दास ने उद्घाटन सत्र में कहा कि महंगाई धीरे धीरे कम होगी. 

अर्थव्यवस्था की रिकवरी के हैं संकेत 

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गवर्नर ने कहा कि इस समय सप्लाई का आउटलुक ट्रेंड काफी पॉजिटिव दिखाई दे रहा है. कई इंडीकेटर 2022-23 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सुधार या रिकवर होने की ओर इशारा कर रहे हैं. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 2022-23 की दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति (Inflation) धीरे-धीरे कम हो सकती है. इससे अर्थव्यवस्था को झटका लगने की आशंका भी कम हो जाएगी.

दुनिया भर में बढ़ी है महंगाई 

आरबीआई गवर्नर ने आगे कहा कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति का सामना कर रहे हैं. पूरी दुनिया में ही महंगाई बढ़ी है. सप्लाई चैन में व्यवधान, कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि और यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से होने वाली गिरावट के कारण ये महंगाई और बढ़ी है. ग्लोबल ट्रेड में गिरावट दर्ज की गई है. देश की अर्थव्यवस्था स्थिर रहे इसके लिए रिज़र्व बैंक अपनी पॉलिसीज को बदलते रहेगा.

आरबीआई ने बढ़ाया है रेपो रेट 

गौरतलब है कि मई में, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने मुद्रास्फीति के दबाव के कारण रेपो रेट को 40 से बढ़ाकर 4.40% कर दिया था. केंद्रीय बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए ऐसा किया था. बता दें, रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उधार देता है. अगस्त 2018 के बाद ऐसा पहली बार था जब इसे बढ़ाया गया था. 


 
 
 
 

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