कॉर्पोरेट जॉब की जगह खेती को दी तरजीह, 10 हजार से 20 लाख तक का किया सफर, युवा किसान की सफलता की कहानी

राजस्थान के कोटा के रहने वाले यशराज ने कॉर्पोरेट की नौकरी की बजाय खेती का रूख किया. इस युवा ने शुरूआत में कम पैसों से मशरूम की खेती शुरू की. इस दौरान यशराज को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. पैसों की दिक्कत आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज यशराज एक सफल स्टार्टअप के मालिक हैं और सालाना 20 लाख रुपए टर्नओवर है.

Mushroom Farming
चेतन गुर्जर
  • कोटा,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:31 PM IST

डिग्री लेने के बाद अच्छी नौकरी की तलाश करना आज लाखों युवाओं का सपना होता है. लेकिन राजस्थान के कोटा के एक युवा ने इस सोच को बदलकर दिखा दिया. बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने वाले यशराज ने कॉर्पोरेट नौकरी की कतार में खड़े होने के बजाय खेती में अवसर तलाशा और मशरूम की खेती को अपना भविष्य बना लिया. आज उनका एग्री-स्टार्टअप सालाना 20 लाख रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है और वे 15 से 20 लोगों को रोजगार देकर हाड़ौती के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

पढ़ाई के दौरान मिली ट्रेनिंग से बदली जिंदगी-
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मिली ट्रेनिंग ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. कृषि प्रशिक्षण में उन्हें मशरूम उत्पादन, डेयरी फार्मिंग और वर्मी कम्पोस्ट जैसी तकनीकों को करीब से समझने का मौका मिला. इसी दौरान उन्होंने एक अहम बात पर ध्यान दिया कि राजस्थान जैसे गर्म प्रदेश में मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है. लेकिन स्थानीय स्तर पर उत्पादन बेहद कम है. यहीं से उन्हें बाजार की जरूरत और अवसर दोनों दिखाई दिए. उन्होंने तय कर लिया कि नौकरी नहीं, बल्कि इसी कमी को अपना कारोबार बनाएंगे.

दोस्तों से पैसे जुटाकर शुरू की मशरूम की खेती-
हालांकि यह फैसला आसान नहीं था. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बड़ा निवेश किया जा सके. परिवार कॉलेज की फीस तक ही सहयोग कर पा रहा था. ऐसे में यशराज ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पॉकेट मनी से 10 से 15 हजार रुपये जुटाए और एक छोटे से कमरे में सिर्फ 50 बैग के साथ मशरूम की खेती शुरू कर दी. पहला ही प्रयास उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रहा. शुरुआती उत्पादन से उन्हें करीब 15 से 20 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ. इसी सफलता ने भरोसा दिलाया कि उनका आइडिया सही दिशा में है.

सामने आईं कई चुनौतियां-
छोटे स्तर से शुरू हुआ यह सफर आगे बढ़ा तो नई चुनौतियां सामने आ गईं. उत्पादन बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी. यशराज ने एमएसएमई में अपने स्टार्टअप का रजिस्ट्रेशन कराया और कई बैंकों व निजी कंपनियों से फंडिंग और लोन के लिए संपर्क किया. लेकिन हर जगह निराशा हाथ लगी. कई बार ऐसा लगा कि अब यह सपना यहीं खत्म हो जाएगा. वे बताते हैं कि एक समय ऐसा भी आया, जब वे पूरी तरह डीमोटिवेट हो गए थे और काम बंद करने का मन बना लिया था. लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय निजी स्तर पर पैसों का इंतजाम किया और संघर्ष जारी रखा.

सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपए-
आज वही संघर्ष उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. कभी 50 बैग से शुरू हुआ मशरूम उत्पादन अब एक सफल एग्री-स्टार्टअप में बदल चुका है. उनका कारोबार सालाना 20 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहा है. सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया, बल्कि 15 से 20 स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया है. स्टूडेंट लाइफ में मामूली रकम से शुरू हुआ उनका प्रयास आज एक सफल और मुनाफेदार उद्यम का रूप ले चुका है.

यशराज का मानना है कि सफलता किसी बड़े निवेश की मोहताज नहीं होती, बल्कि बड़े इरादों की होती है. वे कहते हैं कि अगर आप किसी लक्ष्य को पूरी शिद्दत से अपने दिमाग और दिल में बिठा लेते हैं, लगातार मेहनत करते हैं और मुश्किलों के आगे हार नहीं मानते, तो आपका संघर्ष एक दिन जरूर सफलता की कहानी बन जाता है.

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