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झारखंड के शशिकांत का कमाल ! खाली पड़े कोयला खदानों में कर रहे मछलीपालन, कमा रहे अच्छा खासा पैसा

रामगढ़ में सीसीएल परियोजना क्षेत्र में कई कोयला खदानें हैं, जो खाली पड़ी हैं. ऐसे में स्थानीय लोग इसका फायदा उठाते हुए इसमें मछलीपालन का काम कर रहे हैं और अच्छा खासा पैसा कमा रहे हैं.

शशिकांत खाली पड़े कोयला खदानों में कर रहे मछलीपालन
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST
  • झारखंड के रामगढ़ में मछलीपालन को मिल रहा बढ़ावा
  • बंद पड़े कोयला खदानों में मछलीपालन कर रहे स्थानीय लोग

झारखंड के रामगढ़ में स्थानीय निवासी शशिकांत सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड (CCL) की बंद पड़ी खदानों में मछलीपालन कर अपने लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं. इससे झारखंड को मछलीपालन के क्षेत्र में नई दिशा भी मिल रही है. इन खदानों में साल भर पानी जमा रहता है, इसलिए यहां मछलियां पालना आसान है. 

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक खनन परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन गंवाने वाले लोग सीसीएल से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद यहां मछलीपालन कर इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं. फिलहाल यह काम चार खदानों में किया जा रहा है. अन्य जगहों पर इसे जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के माध्यम से दोहराया जा रहा है.

PM अवार्ड के लिए अंतिम दौर तक पहुंचा था शशिकांत

सीसीएल परियोजना क्षेत्र में कई कोयला खदानें कोयला निकालने के बाद पिछले कई वर्षों से खाली पड़ी हैं, जो साल भर पानी से भरी रहती हैं, जिससे यह मछलीपालन के लिए उपयुक्त है. मॉडल को SKOCH अवार्ड के लिए भी नामांकित किया गया था और सर्वश्रेष्ठ नवाचार श्रेणी में PM अवार्ड के लिए अंतिम दौर तक भी पहुंचा. 

रामगढ़ जिला प्रशासन मछली पालन के लिए उपयुक्त पाए जाने पर परियोजना को अन्य कोयला खदान गड्ढों तक विस्तारित करने के पक्ष में है. रामगढ़ के उपायुक्त के मुताबिक कोयला गड्ढों में जमा पानी का इससे बेहतर इस्तेमाल नहीं हो सकता. आरा कोल पिट में मछली पालन की सफलता को देखते हुए, अन्य कोयला पिट क्षेत्रों में भी अब इसे बढ़ावा दिया जा रहा है. 

शशिकांत ने बताया कि यहां कई खाली पड़े खदान हैं. यहां से वह 40 से 45 किलों तक की मछलियां पकड़ लेते हैं. उन्होंने कहा कि वह मछलीपालन के काम को ही आगे बढ़ाना चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने सरकार से भी मदद मांगी है. उन्होंने कहा कि वह नौकरी नहीं करना चाहते हैं. मछलीपालन को ही आगे बढ़ाएंगे. 

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