2022-21 का बजट 1 फरवरी को पेश होने वाला है. इस बार बजट कोरोना महामारी से जुझ रही अर्थव्यवस्था के दौर में पेश किया जाएगा. ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी टीम को बजट तैयार करते समय विभिन्न सेक्टरों, नागरिकों और स्टेकहोल्डर्स की अलग -अलग मांगों को ध्यान में रखना होगा, हम यहां आम बजट, 2022-23 तैयार कर रही उस टीम के बारे में बता रहे हैं जिसके ऊपर यह अहम जिम्मेदारी है.
निर्मला सीतारमण
कोविड-19 के नए वैरिएंट को देखते हुए यह बजट कई मायनों में ज्यादा अहम हो जाता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण महामारी और आर्थिक सुस्ती के दौरान आर्थिक प्रतिक्रिया देने के लिए सरकार का मुख्य चेहरा रही हैं. उन्होंने अपने पिछले बजट में गरीब कल्याण और आत्मनिर्भर भारत जैसे प्रोग्राम की घोषणा की.
टीवी सोमनाथन
वित्त मंत्रालय के पांच सेक्रेटरीज में से सबसे सीनियर को फाइनेंस सेक्रेटरी बनाया जाता है, वर्तमान में एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन के पास यह जिम्मेदारी है. सोमानाथन 1987 बैच के तमिलनाडु कैडर के अधिकारी हैं . उन्होंने अप्रैल, 2015 से अगस्त, 2017 के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में काम किया है और इन्हें पीएम मोदी का करीबी माना जाता है. पीएमओ से बजट पर ज्यादातर सुझाव सोमनाथन और इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी तरुण बजाज के जरिए आने की जताई जा रही है. सोमानाथन ने इकोनॉमिक्स में पीएचडी भी की है.
ये तय है कि आगामी बजट कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिहाज से सबसे बड़ा होगा और पैसा खर्च होगा, ऐसे में सोमनाथन की जिम्मेदारी बड़ी है.
तुहीन कांत पांडे
तुहीन कांत पांडे पंजाब कैडर से 1987 बैच के अधिकारी हैं. वो डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट में सेक्रेटरी हैं. केंद्र सरकार की प्राइवेटाइजेशन की योजना को आगे बढ़ाने के बाद अब आगे के इस तरह कामों में अहम भूमिका निभानी होगी. अगले साल के पांडे की प्राथमिकताओं में भारत पेट्रोलियम, कोनकोर, शिपिंग कॉर्प के प्राइवेटाइजेशन के साथ ही एलआईसी का ब्लॉकबस्टर आईपीओ लाना शामिल होगा.
तरुण बजाज
पूर्व इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी और अब रेवेन्यू सेक्रेटरी तरुण बजाज ने भी पांच साल तक पीएमओ में काम किया और अप्रैल, 2020 में नॉर्थ ब्लॉक आ गए थे. तीन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के जरिये राहत उपायों को आकार देने में उनकी अहम भूमिका रही. बजाज 1988 बैच के हरियाणा कैडर के अधिकारी हैं. सोमनाथन की तरह, रिफॉर्म आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रहेगी.
अजय सेठ
अजय सेठ कर्नाटक कैडर से 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. अजय सेठ वित्त मंत्री के सबसे नए सदस्य हैं, इस बजट में इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी अजय सेठ पर सभी की निगाहें होंगी क्योंकि डीईए कैपिटल मार्केट, इनवेस्टमेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी नीतियों के लिए नोडल डिपार्टमेंट हैं.
सेठ के पास भारत की जीडीपी ग्रोथ को बरकरार रखने के क्रम में अर्थव्यवस्था में प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर को रिवाइव करने का मुश्किल काम भी होगा.
देबाशिष पांडा
मीडिया से दूर रहने वाले पांडा उत्तर प्रदेश कैडर से 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड हैं. रिकैपिटलाइजेशन के प्लान्स के साथ ही फाइनेंसियल सेक्टर से जुड़ी सभी घोषणाएं अनुमानित रूप से उन्हीं की जिम्मेदारी हैं.
चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर
मौजूदा चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने इस साल की शुरुआत में, अपने 17 दिसंबर को खत्म हो रहे तीन साल के कार्यकाल के बाद एकेडमिया में लौटने की घोषणा कर दी थी.
इस पद के लिए सरकार की नजर अब प्रिंसिपल इकोनॉमिक एडवाइजर संजीव सान्याल और मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के पूर्व सदस्य पामी दुआ की तरफ है. नए चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की इकोनॉमिक सर्वे 2020-21 की ड्राफ्टिंग में अहम भूमिका रहेगी, जिसे बजट का आइना कहा जाता है.
कोविड-19 के असर, जॉब्स, विभिन्न सेक्टर्स, छोटे बिजनेस, शिक्षा और हेल्थकेयर पर सर्वे के विचारों का सभी को इंतजार होगा, क्योंकि स्वतंत्र एजेंसियों की तुलना में उनकी सरकारी डाटा तक ज्यादा पहुंच होती है.